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राफेल पर फैसले के बाद संसद में गूंजा 'राहुल गांधी माफी मांगो' के नारे, पीएम ने की बैठक

Fri, 14 Dec 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Dec 2018 12:45 PM IST
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Rafale Deal: BJP accused Congress of misleading nation, opposition want JPC probe
आनंद शर्मा-राजनाथ सिंह - फोटो : ANI

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को क्लिनचिट मिल जाने के बाद जहां भाजपा और सरकार में जोश भर दिया है वहीं कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां बैकफुट पर नजर आ रही हैं। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग की है वहीं कांग्रेस संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की अपनी पुरानी मांग पर अड़ी हुई है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला उस समय आया जब संसद की कार्यवाही शुरू हो रही थी। जैसे ही 'सुप्रीम' फैसले की जानकारी सरकार को मिली उसके बाद सरकार के मंत्री और भाजपा सांसद राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत बैठक बुलाई और करीब 20 मिनट तक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन से चर्चा की।

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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'यह मामला शुरुआत से ही एकदम साफ-सुथरा था और हम लगातार कह रहे थे कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। इन्हें राजनीतिक फायदा लेने के लिए लगाया गया है।' भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा कि सच की हमेशा जीत होती है। राफेद सौदे पर न्यायालय का फैसला राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान का पर्दाफाश करता है।
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वहीं, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, कांग्रेस जेपीसी जांच की मांग पर अड़ी हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरेजवाला ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी कहा था कि न्यायालय राफेल मामले पर फैसला नहीं कर सकता, सिर्फ जेपीसी जांच में सभी फाइलों और नोटिंग की जांच करके फैसला किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "सरकार ने राफेल सौदे के मामले में उच्चतम न्यायालय को एक-तरफा और आधी-अधूरी जानकारी दी।"
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तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां इस मामले की जांच संयुक्त ससंदीय दल से करवाना चाहती है। उन्होंने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने वह कहा जो उसे सही लगा लेकिन राजनीतिक पार्टियां इस मामले की जांच जेपीसी से करवाने की मांग कर रही हैं।'

वकील प्रशांत भूषण ने न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, 'मेरी राय में उच्चतम न्यायालय का आदेश पूरी तरह से गलत है। यह अभियान निश्चित रूप से कमजोर नहीं होगा। हम इस बात का निर्णय करेंगे कि क्या हम इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं या नहीं।'

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले पर भाजपा को खुश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर खुश होने का कोई कारण नहीं है जो स्वयं विरोधाभासी हैं। माननीय न्यायालय का कहना है कि उसके लिए राफेल के विवरण में जाना सही नहीं है।'

शर्मा ने आगे कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने किसी महत्वपूर्ण पहलू पर कोई टिप्पणी नहीं की। हम लगातार इस सौदे पर जेपीसी की मांग कर रहे हैं। जेपीसी के पास सभी दस्तावेजों को तलब करने का अधिकार है।' 

इस मसले पर संसद भवन में काफी हंगामा हुआ। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग करते हुए नारेबाजी की। सदन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष मे राजनीतिक फायदे के लिए जनता को गुमराह करने की कोशिश की और वैश्विक स्तर पर भाजपा की छवि खराब की। उन्हें सदन से और देश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने सोचा हम तो डूबे हैं सनम तुम को भी ले डूबेंगे।'

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'हमारी मांग जेरीसी की है और हम अब भी उसके साथ खड़े हैं। मुख्य मुद्दा कीमत का है और न्यायालय ने कहा कि वह उसपर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती है क्योंकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। गृहमंत्री एक जनहित याचिका पर दिए गए अधूरे फैसले पर बोल रहे हैं।'

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने कुछ गलत नहीं कहा। कीमत तय करना न्यायालय का कार्य नहीं है लेकिन राम मंदिर निर्माण को लेकर फैसला लेना भी उनका काम नहीं है। राफेल सौदे के मुद्दे को न्यायालय में नहीं संसद में हल करलिया जाएगा।'

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी राफेल सौदे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कहा, 'राफेल सौदे के संबंध में आज आए उच्चतम न्यायालय के फैसले से संकट में घिरी केंद्र की सरकार को थोड़ी राहत मिलने की संभावना है लेकिन देश की सभी रक्षा खरीद के संबंध में आमजनता की तमाम धारणाओं और आशंकाओं का उचित तौर पर समाधान निकालने के लिए बहुत जरूरी है कि इसमें सरकारी स्तर पर आधारभूत सुधार किए जाने की सख्त जरूरत है।' 

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