फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rabindranath Tagore came to bolpur from outside to set up visva bharati university says vc bidyut chakraborty

कुलपति प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने कहा- टैगोर भी विश्व भारती की स्थापना के लिए बाहर से ही आए थे बोलपुर

Mon, 24 Aug 2020 02:49 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 24 Aug 2020 02:49 AM IST
विज्ञापन
Rabindranath Tagore came to bolpur from outside to set up visva bharati university says vc bidyut chakraborty
Visva Bharati University campus - फोटो : Social Media

विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने कहा, रवींद्रनाथ टैगोर ने भी बोलपुर में बाहर से आकर ही संस्थान की स्थापना की थी। अपने निर्णयों की रक्षा के लिए ‘बाहरी लोगों’ को परिसर में लाने के आरोपों से घिरे रहने वाले कुलपति ने यह व्यंग्य मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान को लेकर कसा। 

विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में गत सोमवार को हिंसा के बाद कहा था कि पौष मेला मैदान पर चहारदीवारी के निर्माण के दौरान बाहरी लोग मौजूद थे। यह कार्रवाई टैगोर के शिक्षा के आदर्शों के अनुरूप नहीं है।
विज्ञापन



इसे लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ने शनिवार को यह भी कहा कि बोलपुर औपनिवेशिक बंगाल में महज एक छोटा सा कस्बा था और यह टैगोर व उनके बाहर के सहयोगी थे, जिन्होंने यहां विश्व भारती की स्थापना करने और उसे विश्व में शैक्षिक नवाचारों के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनाने में मदद की थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, हमारे बोलपुर या पश्चिम बंगाल से बाहर के सहकर्मियों को बाहरी लोगों के रूप में चिह्नित करके अलग-थलग करने, बहिष्कृत करने और निष्कासित करने का लगातार प्रयास जारी है।

उन्हें यह कहा जाता है कि वे भावनात्मक रूप से सच्चे रवींद्रिक्स (टैगोरियन) बनने के लायक नहीं हैं। कुलपति ने कहा, इतिहास से पता चला है कि हमारे बाहर से आए कई सहयोगी धीरे-धीरे उस सांस्कृतिक परंपरा में डूब गए, जिसका प्रतिनिधित्व विश्व भारती करती है।

पौष मेला विश्वविद्यालय स्थापना के समय नहीं था
कुलपति ने उस पौष मेले को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की, जिसे विवाद का केंद्र बनाया गया था। कुलपति ने कहा, पौष मेला मैदान रवींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर की तरफ से स्थापित आश्रम का हिस्सा नहीं था। यह कोई विरासत नहीं है।


भारत में विरासत का स्तर केवल उस भवन या स्थान को दिया जाता है, जो 100 साल पहले से उपस्थित रहा हो। उन्होंने दावा किया कि पौष मेला टैगोर की मृत्यु के 20 साल बाद चालू किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed