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आयकर मामला: सोनिया-राहुल की याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई

Wed, 14 Nov 2018 03:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 14 Nov 2018 03:46 AM IST
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Question on backgound of Income tax notice against rahul gandhi and Sonia Gandhi in Supreme Court
rahul gandhi and sonia gandhi

आयकर विभाग की तरफ से राहुल गांधी, सोनिया गांधी और ऑस्कर फर्नांडिस को जारी नोटिस के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई संक्षिप्त, लेकिन रोचक रही। एकतरफ तीनों कांग्रेसी नेताओं के वकीलों ने शीर्ष अदालत को मामले का बैकग्राउंड समझान का प्रयास किया, वहीं जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने उन्हें कहा कि बैकग्राउंड की अहमियत नहीं है, मामला नोटिस के वैध होने या नहीं होने का है। बता दें कि आयकर विभाग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ऑस्कर फर्नांडिस को वर्ष 2011-12 के कर निर्धारण का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले में विस्तार से 4 दिसंबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया। 

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इससे पहले  मंगलवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई में राहुल, सोनिया और फर्नांडिस की ओर से वरिष्ठ वकील पी चिदम्बरम, कपिल सिब्बल और अरविंद दत्तार पेश हुए, जबकि आयकर विभाग की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान पीठ की तरफ से नोटिस की वैधता के मुद्दे पर ही बहस होने की बात उठाने पर कहा कि सवाल ये है कि नोटिस जारी करने के लिए दिए गए कारण सही हैं या नहीं। चिदंबरम ने कहा कि यंग इंडिया कंपनी में राहुल और सोनिया शेयरधारक हैं और इस कंपनी ने एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के कुछ शेयर को खरीदा था। साथ ही एसोसिएटेड जर्नल के 90.2 करोड़ रुपये के कर्ज का भी अधिग्रहण किया था। इसका मतलब यह नहीं कि इससे राहुल-सोनिया की आमदनी में इजाफा हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि यंग इंडिया मुनाफा कमाने वाली कंपनी नहीं है और शेयर लेने मात्र से कर का दायित्व नहीं बन जाता। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस तरह के सवालों पर विस्तृत सुनवाई के दौरान बहस की जानी चाहिए। 

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दो विकल्प दिए थे पीठ ने
इसके बाद पीठ ने दो विकल्प दोनों पक्षों को दिए। पीठ ने कहा कि एक तरीका यह हो सकता है कि हम इस मामले में नोटिस जारी कर देते हैं लेकिन असेसिंग ऑफिसर को पुन: मूल्यांकन करने की प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत दे सकते हैं या हम दो सप्ताह बाद सुनवाई की तारीख तय करते हैं और मामले का निपटारा कर देते हैं। तुषार मेहता ने दूसरे विकल्प को चुना। कांग्रेसी नेताओं की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि इस मामले में नोटिस जारी किया जाए। लेकिन कोटे ने कहा कि चूंकि तुषार मेहता पहले से बतौर कैविएट मौजूद हैं लिहाजा नोटिस जारी करना जरूरी नहीं है। 

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