नेपाल की रानी ने कहा-आर्थिक जाल में फंसा रहा चीन, भारत जल्द उठाए कदम
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काशी के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मी राजलक्ष्मी का विवाह नेपाल के शाही खानदान में राजा शिव प्रकाश शाह के साथ हुआ। विवाह के बाद वे नेपाल गईं और फिर अमेरिका जाकर बस गईं। लेकिन काशी से अमेरिका तक की यात्रा में भारत से उनका लगाव बना रहा। जब अप्रवासी भारतीय सम्मेलन का निमंत्रण उन्हें मिला, तो उन्हें अपनी मिट्टी से जुड़ने का यह एक अवसर महसूस हुआ। इसी यात्रा में एक कार्यक्रम के सिलसिले में वे दिल्ली पहुँचीं। हमारे संवाददाता अमित शर्मा ने उनसे मुलाकात की और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भारत आने पर आपका अनुभव कैसा रहा?
जय सियाराम। इनक्रेडिबल (अविश्वसनीय)। मैं भारत नहीं, अपने घर आई हूं। और घर आने पर वही अनुभव होता है जो एक बच्चे को अपनी मां के गोद में पहुंचने पर होता है। बेहद आत्मीय अनुभूति। काशी के अप्रवासी सम्मेलन से लेकर प्रयागराज के कुंभ तक, आध्यात्मिकता की एक पूरी धारा से गुजरने का अनुभव हुआ, अनूठा अनुभव। आजीवन याद रहेगा।
अध्यात्म में आपकी विशेष रूचि है?
बिलकुल। बल्कि ये कहिये कि जीवन का एकमात्र उद्देश्य ही यही है। मैं शुरू से भगवान शिव की उपासना करती रही हूं। काशी में भगवान विश्वनाथ तो नेपाल में भगवान पशुपति नाथ का आशीर्वाद मिला। अमेरिका जाकर भी मेरी ध्यान साधना सतत चल रही है। वहां एशियाई लोगों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन चलाती हूं। इसका उद्देश्य लोगों को खुद के साथ जोड़ना और अध्यात्म का प्रचार-प्रसार करना ही है। दुनिया में संस्कृत भाषा और योग का प्रचार-प्रसार कर रही हूं। मुझे लगता है कि दुनिया को अराजकता से बचाने का एक मार्ग अध्यात्म की शान्ति ही हो सकती है। दूसरा उपाय संभव नहीं। ॐ नम: शिवाय (आंखें बंद कर गहरी सांस छोड़ते हुए)।
आप लंबे अरसे बाद भारत आईं। कुछ अलग महसूस हुआ?
हां भी, और नहीं भी। काशी के मंदिर, काशी की गलियां, काशी की गंगा और काशी के भद्र और अल्हड़-मस्त लोग, सब कुछ वैसा ही है। कुछ भी नहीं बदला। लगता है समय काशी में आकर ठहर सा गया हो। लेकिन इसी बीच भारत ने बहुत तरक्की की है, साफ़ महसूस होता है। बीएचयू से मैंने ग्रेजुएशन किया है। समझती हूं कि आज बहुत कुछ बदला है। अच्छा लगता है। अपने देश पर गर्व महसूस होता है।
नेपाल की वर्तमान स्थिति, उसकी समस्याओं पर आपका क्या विचार है?
बेहद शांत और बहुत शांतिप्रिय लोगों का देश है। ईश्वर ने पृथ्वी पर एक वरदान के रूप में हिमाचल की गोद में नेपाल को बनाया है। लेकिन नेपाल की गरीबी यहां की सबसे बड़ी समस्या है। इस गरीबी के कारण ह्यूमन ट्रैफिकिंग यहां की सबसे बड़ी समस्या है। लड़कियों को गलत राह पर भेजने की समस्या विकराल है। भारत जैसे देशों को नेपाल के विकास पर बहुत ध्यान देना चाहिए। नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से यह परेशानी भारत की भी समस्या बढ़ाएगी। जितना समृद्ध नेपाल होगा, भारत के लिए उतना ही अच्छा होगा।
देखिये, अध्यात्म हमें एक बनाता है। दोनों देशों के बीच वैवाहिक रिश्ते दोनों देशों के बीच घरेलू संबंध बना देते हैं। भाषाई समानता बहुत अधिक है। इसलिए दोनों देशों के बीच गहरे संबंध हजारों साल पुराने हैं। लेकिन नेपाल की गरीबी का फायदा उठाकर चीन वहां पैर पसार रहा है, बल्कि कहिये कि पसार चुका है। वह उसे आर्थिक जाल में फंसा रहा है। भारत को नेपाल के विकास पर बिना देर किये बड़े कदम उठाने की जरूरत है। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी।
मधेशियों की समस्या पर आपका क्या विचार है?
देखिये, अब राजाओं-रानियों के दिन नहीं रहे। इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगी। लेकिन मैं समझती हूं कि नेपाल के लोग बहुत समझदार और शांतिपूर्ण स्वभाव के लोग हैं। वे मिल-बैठकर इस समस्या को सुलझा लेंगे। किसी के भी अधिकार की अवहेलना न हो, यही मेरी कामना है। नेपाल की अद्भुत संस्कृति को बचाए रखने के लिए वहां किसी बाहरी के जमीन खरीदने पर रोक होनी चाहिए, मैं इसका पूर्ण समर्थन करती हूं।
भारत में कुछ ही दिनों में लोकसभा के चुनाव होने हैं? नरेंद्र मोदी के बारे में आपका क्या विचार है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का नाम बहुत ऊंचा किया है। ये बात आप यहां रहकर शायद उतना महसूस नहीं कर पायेंगे। लेकिन एक बार जब आप न्यूयॉर्क, वाशिंगटन या कैलिफोर्निया में रहेंगे तब आप समझ पाएंगे कि वहां के अप्रवासी भारतीयों के लिए मोदी होने का मतलब क्या होता है। लोग उन्हें एक देशभक्त फकीर के रूप में देखते हैं। हर अप्रवासी उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहता है।
कांग्रेस भी इस बार मजबूती के साथ मैदान में है। राहुल गांधी के बारे में क्या कहेंगी?
भारत का प्रधानमंत्री कौन हो, इसका चुनाव तो आप लोगों (भारतीयों) को ही करना है। किसी के ऊपर क्या टिप्पणी करूं, लेकिन लगता है कि राहुल को देश सम्भालने के लिए अभी और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। एक प्रखर वक्ता बनने के लिए उन्हें और मेहनत करनी होगी।
प्रियंका गांधी को देश में बड़ी उम्मीद के साथ देखा जा रहा है?
नो डाउट (निःसंदेह)। शी हैज ग्रेट पोटेंशियल (उनमें बहुत सम्भावना है)। राहुल की तुलना में वे बड़ी नेता साबित होंगी। लेकिन भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री होने के लिए उन्हें अभी और समय देना चाहिए।