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500 रुपये से शुरुआत कर सात कंपनियों की मालकिन बनीं कृष्णा बोलीं, आंदोलन करने वाले असली किसान नहीं

Fri, 26 Feb 2021 02:47 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 26 Feb 2021 02:47 PM IST
सार

  • श्री कृष्णा पिकल्स प्रा. लि. की मालकिन कृष्णा यादव कृषि कानूनों के पक्ष में, कहा- मेहनती किसान आज भी अपने खेतों में, किसान आंदोलन को बताया राजनीति से प्रेरित
  • पूसा किसान मेले में 'आत्मनिर्भर किसान' के रूप में सम्मानित हुईं कृष्णा यादव

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Pusa Kisan mela: shree krishna pickles private limited owner krishna yadav support Farm bills
श्री कृष्णा पिकल्स प्रा. लि. की मालकिन कृष्णा यादव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पति की नौकरी छूट जाने के बाद अपने एक रिश्तेदार से 500 रुपये उधार लेकर अचार बेचने का काम शुरू कर आज सात कंपनियों की मालकिन बन चुकीं कृष्णा यादव कृषि कानूनों के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि इन कानूनों से खेती और किसान दोनों की स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के पीछे छिपकर विपक्ष अपनी राजनीति कर रहा है और किसानों को यह असलियत समझनी चाहिए। किसान भाइयों को आत्मनिर्भर बनने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और कृषि में हो रहे नए प्रयोगों को सफलतापूर्वक अपनाना चाहिए।

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पूसा किसान मेले में 'आत्मनिर्भर किसान' के रूप में सम्मानित हुईं कृष्णा यादव ने अमर उजाला से कहा कि ये देश हमारा है और इस देश की सरकार भी हमारी है। कोई सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ कोई कानून कैसे बना सकती है? कानून में कुछ कमियां हो सकती हैं और किसान भाइयों को इसका विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार भी है। लेकिन इसके लिए आंदोलन करना और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कृषि कानूनों से किसी को कोई आपत्ति है तो इसे सरकार के साथ मिल-बैठकर सुलझा लेना चाहिए।

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लाल किला की हिंसा से दिल दुखी हुआ

अनपढ़ कृष्णा यादव आज सात कंपनियों की मालकिन हैं। आज वे अपने साथ हजारों महिलाओं-पुरूषों को रोजगार देती हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर 26 जनवरी को लाल किला पर जो कुछ भी हुआ, उससे पूरे देश की साख गिरी है। इससे किसानों का नाम बदनाम हुआ है जिससे किसी भी कीमत पर बचा जाना चाहिए था।

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अब अचार ही नहीं, आटा-तेल भी

शिक्षा से पूरी तरह वंचित रहीं कृष्णा यादव बताती हैं कि पति की नौकरी छूटने के बाद जब उन्होंने परिवार के साथ बुलंदशहर से दिल्ली का रुख किया था, तब उन्हें भी नहीं मालूम था कि जिंदगी में आगे कहां जाना है और क्या करना है। लेकिन दिल्ली पहुंचकर और कुछ न कर पाने की स्थिति में उन्होंने अचार बनाकर बेचना शुरू कर दिया। पहले यह काम अकेले किया, कुछ सफलता मिलने पर पूरा परिवार उसमें हाथ बंटाने लगा। ज्यादा काम बढ़ने पर पास-पड़ोस की महिलाओं को भी साथ में जोड़ लिया। इस तरह श्री कृष्णा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की नींव पड़ी।



कृष्णा यादव ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को वे पहली प्राथमिकता देती हैं। यही कारण है कि अपने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ कभी कोई समझौता नहीं करती हैं और यही उनकी सफलता का राज है। उन्होंने बताया कि अचार से शुरू होने के बाद आज उनकी कंपनी आटा, तेल, मसाले जैसी घरेलू उपयोग की अनेक चीजों की सप्लाई करता है और लोगों की पसंद बना हुआ है।

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