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छह पनडुब्बी रोधी विमानों और स्वदेशी अवाक्स विमान की खरीद को हरी झंडी

Fri, 29 Nov 2019 06:25 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 29 Nov 2019 06:25 AM IST
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Purchase of six anti-submarine aircraft and indigenous AWACS aircraft cleared
p 81 - फोटो : social media

केंद्र सरकार ने सेना के लिए 22,800 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद के लिए गुरुवार को मंजूरी दे दी। अधिकारियों का कहना है कि इसके तहत स्वदेशी हवाई हमला चेतावनी व नियंत्रण प्रणाली (अवाक्स) विमान को विकसित करने और मध्य दूरी के छह पनडुब्बीरोधी युद्धक विमान पी-81 समेत विभिन्न प्रकार के मिलिट्री प्लेटफार्म व हथियारों की खरीद का प्रस्ताव है।

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इस खरीद प्रस्ताव पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में निर्णय लिया गया।

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि डीएसी ने बोइंग कंपनी से छह पी-81 विमानों की खरीद को अनुमति दे दी है, जिससे भारतीय नौसेना की गश्त, पनडुब्बी व जमीन पर मौजूद हमलावर वाहनों के खिलाफ आक्रमण क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
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फिलहाल नौसेना के पास 8 लंबी दूरी के पी-81 समुद्री विमान मौजूद हैं, जिन्हें तमिलनाडु में अराकोनम के करीब आईएनएस राजाली पर तैनात किया गया है।

मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि भारतीय तटरक्षक बल के लिए भी दोहरे इंजन वाले हैवी हैलिकॉप्टर (टीईएचएच) की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसकी मदद से तटरक्षक बल समुद्री आतंकवाद से निपटने और समुद्र के रास्ते घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाने में सक्षम हो जाएगा।

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वायुसेना को अजेय बनाएंगे स्वदेशी अवाक्स

सूत्रों के मुताबक, पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की एयर स्ट्राइक के दौरान अवाक्स विमानों की तैनाती से मिली सफलता के बाद इस प्रणाली वाले विमान बढ़ाने का निर्णय लिया गया। डीएसी ने अवाक्स प्रणाली वाले कम से कम दो विमानों की खरीद को मंजूरी दी है।

इस अवाक्स प्रणाली के लिए मिशन सिस्टम और सब-सिस्टम को डिजाइन, विकसित व मुख्य प्लेटफार्म (ब्राजील निर्मित एंब्रियर विमान) पर एकीकृत करने की जिम्मेदारी रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) की रहेगी यानी यह पूरी तरह स्वेदशी प्रणाली होगी।

फिलहाल भारत के पास इस्राइल और रूस की मदद से मिले तीन अवॉक्स विमान हैं, जिन्हें नेत्रा नाम दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन अवाक्स को शामिल करने से भारतीय वायुसेना की कवरेज का दायरा बढ़ेगा और उसकी रक्षा व आक्रमण क्षमता में बढ़ोतरी होने से वह अजेय सरीखी हो जाएगी।

अंधेरे में भी सटीक निशाना लगा सकेंगे सैनिक

डीएसी ने थल सेना की असॉल्ट राइफलों के लिए भी ‘थर्मल इमेजिंग नाइट साइट्स’ की खरीद का निर्णय लिया है। इनका विकास और निर्माण स्वदेश में ही भारतीय निजी रक्षा उद्यमों द्वारा किया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि इन्हें सीमा पर मोर्चे की पहली पंक्ति में मौजूद जवानों को दिया जाएगा। इससे भारतीय सैनिकों को घने अंधेरे और सभी तरह की मौसमी परिस्थितियों में लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में मदद मिलेगी।

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