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पंजाब: कौन हैं सुखपाल खैरा, किस मामले में हुए गिरफ्तार? जानें 'आप' से मोहभंग और कांग्रेस में वापसी की कहानी
Thu, 28 Sep 2023 03:54 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 28 Sep 2023 03:54 PM IST
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सुखपाल सिंह खैरा की गिरफ्तारी
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
पंजाब पुलिस ने कांग्रेस के विधायक सुखपाल खैरा को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार सुबह करीब पांच बजे जलालाबाद जिले की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। खैरा भुलत्थ विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। पुलिस के मुताबिक, खैरा के खिलाफ एक पुराना एनडीपीएस एक्ट का केस था जिस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया है।अब पुलिस की इस कार्रवाई पर आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। खुद कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान उनसे दुश्मनी निकाल रहे हैं। सुखपाल खैरा के बेटे मेहताब खैरा ने कहा कि इस मामले में वह कोर्ट जाएंगे।
सुखपाल खैरा गिरफ्तार
- फोटो :
ANI
पहले जानते हैं आखिर किस मामले में हुई गिरफ्तारी?
गिरफ्तारी का मामला ड्रग्स यानी मादक पदार्थों से जुड़ा है, जिसे मार्च 2015 में फाजिल्का के जलालाबाद में दर्ज किया गया था। इसमें नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें एक की पहचान गुरदेव सिंह के रूप में हुई थी। बाद में सभी को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट यानी स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया। गुरदेव सिंह को सुखपाल खैरा का करीबी बताया जाता है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो किलोग्राम हेरोइन, सोने के 24 बिस्कुट, एक देसी पिस्तौल, एक पॉइंट 315 बोर की पिस्तौल और दो पाकिस्तानी सिम कार्ड बरामद किए थे। जांच के दौरान ही खैरा का नाम सामने आया था। निचली आदलत ने अतिरिक्त आरोपी के तौर पर खैरा को तलब किया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने 2017 में खैरा के खिलाफ निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर रोक लगा दी।
इसके बाद 2021 में सुखपाल खैरा को 2015 के मादक पदार्थ मामले से जुड़े धन शोधन के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया। 2022 में उन्हें जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में 2015 के मादक पदार्थ मामले में खैरा के खिलाफ समन आदेश को रद्द कर दिया।
गिरफ्तारी का मामला ड्रग्स यानी मादक पदार्थों से जुड़ा है, जिसे मार्च 2015 में फाजिल्का के जलालाबाद में दर्ज किया गया था। इसमें नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें एक की पहचान गुरदेव सिंह के रूप में हुई थी। बाद में सभी को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट यानी स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया। गुरदेव सिंह को सुखपाल खैरा का करीबी बताया जाता है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो किलोग्राम हेरोइन, सोने के 24 बिस्कुट, एक देसी पिस्तौल, एक पॉइंट 315 बोर की पिस्तौल और दो पाकिस्तानी सिम कार्ड बरामद किए थे। जांच के दौरान ही खैरा का नाम सामने आया था। निचली आदलत ने अतिरिक्त आरोपी के तौर पर खैरा को तलब किया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने 2017 में खैरा के खिलाफ निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर रोक लगा दी।
इसके बाद 2021 में सुखपाल खैरा को 2015 के मादक पदार्थ मामले से जुड़े धन शोधन के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया। 2022 में उन्हें जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में 2015 के मादक पदार्थ मामले में खैरा के खिलाफ समन आदेश को रद्द कर दिया।
सुखपाल खैरा।
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SOCIAL MEDIA
अब जानिए कौन हैं सुखपाल खैरा
सुखपाल खैरा कांग्रेस के विधायक हैं। उनका जन्म जनवरी 1965 में पंजाब में हुआ था। सुखपाल दिग्गज अकाली नेता और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री सुखजिंदर सिंह खैरा के बेटे हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से हासिल की। डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई की।
सुखपाल खैरा कांग्रेस के विधायक हैं। उनका जन्म जनवरी 1965 में पंजाब में हुआ था। सुखपाल दिग्गज अकाली नेता और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री सुखजिंदर सिंह खैरा के बेटे हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से हासिल की। डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई की।
सुखपाल खैरा
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अमर उजाला
कैसा रहा है सियासी सफर
सुखपाल खैरा भुलत्थ सीट से तीन बार के विधायक हैं। इसके साथ ही वह भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। उनके सियासी सफर की बात करें तो उन्हें राजनीतिक विरासत अपने पिता कद्दावर अकाली नेता सुखजिंदर सिंह खैरा से मिली। 1994 में उन्होंने सियासत में कदम रखा, जब वह कपूरथला जिले के गांव रामगढ़ से पंचायत सदस्य के रूप में चुने गए।
1997 में वह यूथ कांग्रेस से जुड़ गए और उन्हें पंजाब यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल गई। 1999 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें अपने संगठन का सचिव नियुक्त किया। 2005 में वह कपूरथला जिले की कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। 2006 में खैरा केंद्रीय सहकारी बैंक, कपूरथला के निदेशक चुने गए।
सुखपाल भुलत्थ सीट से पहली बार 2007 में विधायक बनकर पंजाब विधानसभा पहुंचे। हालांकि, इससे पहले वह 1997 और 2002 में अपनी किस्मत आजमा चुके थे, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। पहले 2009 और फिर 2014 में उन्हें पंजाब कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया। इस बीच 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में खैरा को हार मिली। पंजाब में 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने खराब प्रदर्शन किया। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 2014 में पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया।
सुखपाल खैरा भुलत्थ सीट से तीन बार के विधायक हैं। इसके साथ ही वह भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। उनके सियासी सफर की बात करें तो उन्हें राजनीतिक विरासत अपने पिता कद्दावर अकाली नेता सुखजिंदर सिंह खैरा से मिली। 1994 में उन्होंने सियासत में कदम रखा, जब वह कपूरथला जिले के गांव रामगढ़ से पंचायत सदस्य के रूप में चुने गए।
1997 में वह यूथ कांग्रेस से जुड़ गए और उन्हें पंजाब यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल गई। 1999 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें अपने संगठन का सचिव नियुक्त किया। 2005 में वह कपूरथला जिले की कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। 2006 में खैरा केंद्रीय सहकारी बैंक, कपूरथला के निदेशक चुने गए।
सुखपाल भुलत्थ सीट से पहली बार 2007 में विधायक बनकर पंजाब विधानसभा पहुंचे। हालांकि, इससे पहले वह 1997 और 2002 में अपनी किस्मत आजमा चुके थे, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। पहले 2009 और फिर 2014 में उन्हें पंजाब कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया। इस बीच 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में खैरा को हार मिली। पंजाब में 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने खराब प्रदर्शन किया। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 2014 में पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया।
सुखपाल सिंह खैरा
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कांग्रेस छोड़ आप में आए
दिसंबर 2014 में खैरा ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ जाने का भी एलान कर दिया। वे आप समन्वयक अरविंद केजरीवाल से भी मिले। बाद में उन्होंने आप की आधिकारिक रूप से सदस्यता भी ले ली। 2017 में वह आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत गए।
सुखपाल जुलाई 2017 से जुलाई 2018 के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। हालांकि, आप के साथ उनका सफर ज्यादा नहीं चला और 2018 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए आप से निलंबित कर दिया गया। जनवरी 2019 में खैरा ने आप को अलविदा कह दिया और पंजाब एकता पार्टी के नाम से खुद की पार्टी बना ली।
दिसंबर 2014 में खैरा ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ जाने का भी एलान कर दिया। वे आप समन्वयक अरविंद केजरीवाल से भी मिले। बाद में उन्होंने आप की आधिकारिक रूप से सदस्यता भी ले ली। 2017 में वह आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत गए।
सुखपाल जुलाई 2017 से जुलाई 2018 के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। हालांकि, आप के साथ उनका सफर ज्यादा नहीं चला और 2018 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए आप से निलंबित कर दिया गया। जनवरी 2019 में खैरा ने आप को अलविदा कह दिया और पंजाब एकता पार्टी के नाम से खुद की पार्टी बना ली।
प्रेस वार्ता करते सुखपाल सिंह खैरा।
- फोटो :
संवाद न्यूज एजेंसी
लोकसभा चुनाव के लिए विधायकी से इस्तीफा दिया, लेकिन मिली हार
मार्च 2019 में पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के तहत बठिंडा लोकसभा सीट से खैरा ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की। लोकसभा में किस्मत आजमाने के लिए अप्रैल 2019 में उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। जब 2019 में लोकसभा चुनाव नतीजे सामने आए तो उन्हें करारा झटका लगा। उन्हें बठिंडा से हार का सामना करना पड़ा।
मार्च 2019 में पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के तहत बठिंडा लोकसभा सीट से खैरा ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की। लोकसभा में किस्मत आजमाने के लिए अप्रैल 2019 में उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। जब 2019 में लोकसभा चुनाव नतीजे सामने आए तो उन्हें करारा झटका लगा। उन्हें बठिंडा से हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस में शामिल होते सुखपाल सिंह खैरा
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कांग्रेस में शामिल हुए और फिर बने विधायक
आप से निलंबित सुखपाल सिंह खैरा ने जून 2021 में कांग्रेस में वापसी की। सुखपाल सुखपाल खैरा दो अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। अगले साल ही यानी मार्च 2022 में खैरा भुलत्थ से तीसरी बार विधायक चुने गए। उन्हें जुलाई 2022 में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आप से निलंबित सुखपाल सिंह खैरा ने जून 2021 में कांग्रेस में वापसी की। सुखपाल सुखपाल खैरा दो अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। अगले साल ही यानी मार्च 2022 में खैरा भुलत्थ से तीसरी बार विधायक चुने गए। उन्हें जुलाई 2022 में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।