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जब 1962 में चीन सीमा पर ले गए थे हथियार तो आज खाली हाथ क्यों, सर्वदलीय बैठक में उठेगा सवाल!

Fri, 19 Jun 2020 04:25 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 19 Jun 2020 04:25 PM IST
सार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि लद्दाख में चीन के धोखे का भारत को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। अगर वे हमारा एक जवान मारते हैं, तो हमें उनके पांच जवान मारने होंगे...

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Punjab Chief Minister captain Amrinder singh asked questios, why soldiers were unarmed on china border at clash point
अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo

विस्तार

लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद हुए भारतीय जवानों को लेकर कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है। राहुल गांधी से लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह तक कई नेताओं ने इस बात पर सख्त एतराज जताया है कि बॉर्डर पर चीनी सैनिकों के सामने भारतीय जवानों को बिना हथियारों के क्यों भेजा गया।
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि लद्दाख में चीन के धोखे का भारत को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। अगर वे हमारा एक जवान मारते हैं, तो हमें उनके पांच जवान मारने होंगे।

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तभी चीन सबक सीखेगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुताबिक, 1962 की जंग में भी हम बिना हथियारों के चीनी सैनिकों के सामने कभी नहीं गए थे।

चीन के मसले पर पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस पार्टी की ओर से बॉर्डर पर निहत्थे सैनिक भेजे जाने का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, 1962 की जंग में हम बिना हथियारों के कभी नहीं गए। मैं नहीं जानता कि यह आदेश किसने जारी किए हैं, लेकिन सिपाही हमेशा हथियारों के साथ पैट्रोलिंग करते हैं।


दो सेनाओं के बीच कोई बातचीत होती है, या सामान्य गश्त है तो भी उन्हें हथियारों से लैस होना चाहिए। लद्दाख की घटना ने साबित कर दिया है कि चीनी सैनिक पूरी तैयारी के साथ आए थे। उनका मकसद बातचीत करना नहीं था।

भारतीय सैनिकों को चीन के धोखे और कायरता का अंदाजा नहीं था। ये जवाब तो किसी को देना होगा कि सैनिकों को वहां निहत्थे क्यों भेजा गया। अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, हम पत्थरों के युग में नहीं, बल्कि परमाणु युग में जी रहे हैं।

लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा था।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना था कि केंद्र सरकार, चीन की मंशा समझने में पूरी तरह विफल रही है।

सरकार की इस चूक की कीमत देश के सैनिकों को अपनी शहादत देकर चुकानी पड़ी है। हमारे बहादुर सैन्य अधिकारी और सैनिकों को दुश्मन के पास निहत्था क्यों भेजा गया।

किसने हमारे सैन्य अधिकारी तथा सैनिकों को यह आदेश दिया था। कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी यह सवाल उठाया है।

हालांकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीमा पर भारतीय सैनिकों को निहत्थे भेजे जाने की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि जवान पोस्ट छोड़ते ही हथियारों से लैस हो जाते हैं।

गलवां घाटी में 15 जून को भारतीय सेना का एक भी जवान निहत्था नहीं था। भारत के हर सैनिक के पास पर्याप्त हथियार थे, लेकिन एक समझौते के अनुसार गलवां घाटी में हथियारों का इस्तेमाल नहीं होना था।


जयशंकर ने अपने ट्वीट में लिखा,

'हमें तथ्यों को ठीक से समझ लेना चाहिए। बॉर्डर ड्यूटी पर लगे सभी सैनिक हमेशा हथियार के साथ होते हैं, खासकर पोस्ट से निकलते वक्त। उन्होंने कहा कि गतिरोध के वक्त हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी परंपरा (1966 और 2005 समझौतों के तहत) रही है।'

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