{"_id":"6155ac4e8ebc3e57891e535c","slug":"punjab-assembly-election-2022-has-congress-served-aap-victory-on-a-platter-will-the-delhi-model-of-arvind-kejriwal-be-the-election-guarantee-in-punjab","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Punjab Assembly Election 2022: क्या कांग्रेस ने ‘आप’ को थाली में जीत परोस दी है, दिल्ली मॉडल बनेगा पंजाब में चुनावी गारंटी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Punjab Assembly Election 2022: क्या कांग्रेस ने ‘आप’ को थाली में जीत परोस दी है, दिल्ली मॉडल बनेगा पंजाब में चुनावी गारंटी
Thu, 30 Sep 2021 05:55 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 30 Sep 2021 05:55 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
PTI (File Photo)
विस्तार
आम आदमी पार्टी पंजाब फतह करने के लिए दिल्ली मॉडल को आगे बढ़ा रही है और कांग्रेस आप की राह आसान करने के लिए अपने घर में कांटे बिछाती जा रही है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में भी दिल्ली मॉडल को अपनाने के लिए यहां फ्री बिजली के साथ-साथ फ्री स्वास्थ्य सेवा भी देने का वादा करके अपने सियासी बिसात बिछा दी है। 2017 में पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 20 सीटें जीत कर राज्य में मुख्य विपक्षी दल की हैसियत हासिल कर ली। अब अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के आंतरिक संकट और सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर शानदार प्रदर्शन करने और यहां सरकार बनाने की उम्मीद लगा रहे हैं।कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कथित बेअदबी के बाद उनके कांग्रेस से बाहर निकलने और पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण जिस तरह से बदल गए हैं, इससे राजनीतिक पंडित इस बात का अनुमान लगा रहे हैं कि सत्ता में आने का आप का सपना इस चुनाव में पूरा हो सकता है। पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस की कलह से मिल सकता है, पार्टी नेताओं ने इसे साल की शुरुआत में ही इस बात को भांप लिया था। कांग्रेस की अस्थिरता का फायदा उठाने के लिए आप नेताओं ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी।
एक सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को सत्ता में आने के आसार बढ़ गए। 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में आम आदमी पार्टी को 35.1 फीसदी वोटों के साथ 51 से 57 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। आप नेता इस सर्वे के नतीजे आने के बाद बेहद उत्साहित है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं राज्य विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले कांग्रेस के सियासी संकट से अगर किसी की पांचों उंगलियां घी में है तो वह है आम आदमी पार्टी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी आज एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की है कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता बढ़ रही है।
एक विशेषज्ञ का अनुमान है कि कांग्रेस की लड़ाई से आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचने वाला है, इतना फायदा तो अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को भी नहीं मिलेगा। कांग्रेस की अंदरूनी कलह और सियासी ड्रामे की वजह से आम आदमी पार्टी की बल्ले-बल्ले हो रही है।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पंजाब के इंचार्ज संजय सिंह
- फोटो :
अमर उजाला
पंजाब कांग्रेस के एक विधायक ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर कहा अमरिंदर सिंह और सिद्धू की लड़ाई से पार्टी का बहुत नुकसान हो चुका है। पंजाब और पंजाबियत का नुकसान हो रहा है। अब चुनाव में बहुत कम समय बचा है, जब चुनाव में उतरने का समय आया तो हमारे वरिष्ठ नेता आपस में लड़ने लगे, ऐसे में स्वाभाविक है दूसरी पार्टियां तो फायदा उठाएगी ही। हमारे लोग लड़ते रहे और उन्होंने (आम आदमी पार्टी) ने राज्य के अधिकतर हिस्सों में अपनी पकड़ बना ली है।
वहीं आप के वरिष्ठ नेता और पंजाब के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कहा हमें किसी से झगड़े से कोई लेना-देना नहीं। आगामी चुनावों में आप विजयी होगी क्योंकि पंजाब में पार्टी बहुत मजबूती से पंजाब में आगे बढ़ रही है। पिछली बार हम पहली बार चुनाव लड़े थे और राज्य में विपक्षी पार्टी बन गए। इस बार पंजाब में सरकार बनाएंगे। क्योंकि जनता कांग्रेस और अकाली दोनों के झूठे वादे से थक चुकी है। लोगों ने दोनों पार्टियों को आजमा लिया है। पहले जनता के पास कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली का काम उनके सामने है।
पिछली गलतियों से ‘आप’ ने क्या सीखा
1-आप इस बार सावधानी से आगे बढ़ते हुए केवल सिख वोट बैंक पर फोकस नहीं कर रही है। जिसकी वजह से 2017 में हिंदू मतदाता अलग-थलग पड़ गए थे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ, आप में नरम-हिंदुत्व दृष्टिकोण अपनाए हुए है जिससे हिंदू वोटर्स को भी अपी ओर खींचा जा सके।
2- पिछले विधानसभा चुनाव की भूलों को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी ने हर राज्य की तरह यहां भी मुफ्त बिजली, बिजली बिल माफ करने और निर्बाध बिजली आपूर्ति के वादे के साथ यह बता दिया है कि पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा दिल्ली के शासन मॉडल की तर्ज पर होगा। हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक निश्चित तौर पर इस चुनाव में हमें दिल्ली में हो रहे कामकाज का फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा दिल्ली जैसा काम पूरे देश में हो सकता है इसके लिए बस नीयत और नीति की जरूरत है। नीयत और नीति यदि साफ हो तो सब हो सकता है।
वहीं आप के वरिष्ठ नेता और पंजाब के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कहा हमें किसी से झगड़े से कोई लेना-देना नहीं। आगामी चुनावों में आप विजयी होगी क्योंकि पंजाब में पार्टी बहुत मजबूती से पंजाब में आगे बढ़ रही है। पिछली बार हम पहली बार चुनाव लड़े थे और राज्य में विपक्षी पार्टी बन गए। इस बार पंजाब में सरकार बनाएंगे। क्योंकि जनता कांग्रेस और अकाली दोनों के झूठे वादे से थक चुकी है। लोगों ने दोनों पार्टियों को आजमा लिया है। पहले जनता के पास कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली का काम उनके सामने है।
पिछली गलतियों से ‘आप’ ने क्या सीखा
1-आप इस बार सावधानी से आगे बढ़ते हुए केवल सिख वोट बैंक पर फोकस नहीं कर रही है। जिसकी वजह से 2017 में हिंदू मतदाता अलग-थलग पड़ गए थे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ, आप में नरम-हिंदुत्व दृष्टिकोण अपनाए हुए है जिससे हिंदू वोटर्स को भी अपी ओर खींचा जा सके।
2- पिछले विधानसभा चुनाव की भूलों को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी ने हर राज्य की तरह यहां भी मुफ्त बिजली, बिजली बिल माफ करने और निर्बाध बिजली आपूर्ति के वादे के साथ यह बता दिया है कि पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा दिल्ली के शासन मॉडल की तर्ज पर होगा। हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक निश्चित तौर पर इस चुनाव में हमें दिल्ली में हो रहे कामकाज का फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा दिल्ली जैसा काम पूरे देश में हो सकता है इसके लिए बस नीयत और नीति की जरूरत है। नीयत और नीति यदि साफ हो तो सब हो सकता है।
अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
ट्विटर ANI
क्या फ्री बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं देने का फॉर्मूला पंजाब में चलेगा? इस बारे में पूछे जाने पर आप के एक नेता ने कहा राज्य में अब आम आदमी पार्टी से ही बदलाव की उम्मीद है। “मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी किसे नहीं चाहिए? गुजरात हो या पंजाब या उत्तराखंड, लोग बिजली की ऊंची कीमतों से तंग आ चुके हैं। इन राज्यों में अपनी बिजली का उत्पादन करने के बावजूद, लोग इसे उच्च टैरिफ पर खरीदने के लिए मजबूर हैं। आप लोगों से बात करें और वे आपको यह बताएंगे कि उन्हें फ्री बिजली और फ्री स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए कि नहीं।”
3-पार्टी ने पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरे के लिए किसी नाम की घोषणा नहीं की थी। जिससे पार्टी को आलोचना का तो सामना करना ही पड़ा साथ ही मतदाताओं में भी उलझन की स्थिति रही। पिछले चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी ने इस बार घोषणा भी है कि उसके मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार सिख समुदाय से होगा। पार्टी ने अनुसूचित जाति से एक उपमुख्यमंत्री बनाने की भी घोषणा की है।
‘आप’ के लिए चुनौतियां क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि सभी धारणाओं और अटकलों को एक तरफ रख दें तो पंजाब में आप क लिए जीत उतनी आसान भी नहीं है। कांग्रेस के एससी समुदाय के मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी का चेहरा अब आगे है। जिससे राज्य के एससी मतदाताओं को लुभाने के लिए आप को नए सिरे रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने यहां गठबंधन किया है जिसने आप की राह थोड़ी और मुश्किल कर दी है। दूसरी चुनौती यह है कि राज्य में पार्टी के पास मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं है। इसके अलावा आप को लेकर यह धारणा यह भी है कि आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली में रहते हैं तो माना यह जा रहा है कि पंजाब की सरकार दिल्ली से चलेगी।
3-पार्टी ने पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरे के लिए किसी नाम की घोषणा नहीं की थी। जिससे पार्टी को आलोचना का तो सामना करना ही पड़ा साथ ही मतदाताओं में भी उलझन की स्थिति रही। पिछले चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी ने इस बार घोषणा भी है कि उसके मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार सिख समुदाय से होगा। पार्टी ने अनुसूचित जाति से एक उपमुख्यमंत्री बनाने की भी घोषणा की है।
‘आप’ के लिए चुनौतियां क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि सभी धारणाओं और अटकलों को एक तरफ रख दें तो पंजाब में आप क लिए जीत उतनी आसान भी नहीं है। कांग्रेस के एससी समुदाय के मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी का चेहरा अब आगे है। जिससे राज्य के एससी मतदाताओं को लुभाने के लिए आप को नए सिरे रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने यहां गठबंधन किया है जिसने आप की राह थोड़ी और मुश्किल कर दी है। दूसरी चुनौती यह है कि राज्य में पार्टी के पास मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं है। इसके अलावा आप को लेकर यह धारणा यह भी है कि आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली में रहते हैं तो माना यह जा रहा है कि पंजाब की सरकार दिल्ली से चलेगी।