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Amritpal: खालिस्तान की आड़ में खुद को गुरु ग्रंथ साहिब से श्रेष्ठ समझने की भूल कर बैठा अमृतपाल, ये है कहानी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sun, 19 Mar 2023 11:45 AM IST
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सार
पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों को गिरफ्तार करने के लिए बड़ा ऑपरेशन शुरु किया है। दर्जनों समर्थन पकड़े गए हैं, लेकिन अभी अमृतपाल सिंह का कहीं कुछ पता नहीं है।
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Punjab Amritpal Singh Khalistan sympathiser motive religion Sikh Fugitive Dubai Truck Driver news and updates
अमृतपाल सिंह गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में खालिस्तान की मांग उठाने वाला 'वारिस पंजाब दे' संगठन का प्रमुख अमृतपाल सिंह अब केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब पुलिस के निशाने पर आ गया है। पुलिस टीमें उसे गिरफ्तार करने के लिए निकली हैं। आखिर अब ऐसा क्या हुआ कि जिसके चलते अमृतपाल पर शिकंजा कसना जरुरी हो गया। आइये जानते हैं...


इसके पीछे अहम वजह वो खास रिपोर्ट है, जो खुफिया एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी है। इसमें बताया गया है कि अमृतपाल सिंह जो खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला 2.0 बताता है, वह धर्म को ढाल या हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। दुबई में ट्रक ड्राइवर रहा अमृतपाल सिंह, पाकिस्तानी आईएसआई के इशारे पर यह मानकर आगे बढ़ा कि धर्म जनता के लिए सच्ची अफीम है। हर व्यक्ति धर्म में सांत्वना खोजने की कोशिश करता है। अमृतपाल ने इसे भुनाया और धर्म की अपनी व्याख्या करते हुए खालसा राज को प्राप्त करने का एक मार्ग दे दिया। अजनाला कांड के बाद, उसने बेअंत सिंह और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का नाम लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दे डाली। 

देश में कानून व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं
बता दें कि पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों को गिरफ्तार करने के लिए बड़ा ऑपरेशन शुरु किया है। दर्जनों समर्थन पकड़े गए हैं, लेकिन अभी अमृतपाल सिंह का कहीं कुछ पता नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमृतपाल सिंह जो कुछ कर रहा है, उसके पीछे आईएसआई का हाथ है। वह अवसरवादिता और कायरता का मार्ग अपना चुका है। अजनाला में अपने साथी को पुलिस थाने से रिहा कराने के लिए उसने पालकी (मिनी बस) में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बीर को रख दिया। उसने जानबूझकर अपने निजी स्वार्थ के लिए ये सब किया था। उसने ऐसा कर बीर की पवित्रता का अपमान किया। अमृतपाल ने इस घटना के जरिए खुद को सिख पंथ बनाम अत्याचारी (राज्य) की लड़ाई के रूप में पेश कर दिया। वह किसी भी तरह से एक कट्टरपंथी नेता के रूप में अपनी छवि को बचाने का प्रयास कर रहा था। थाने पर हमला करना और पंजाब सरकार को आगे बढ़ने से रोक देना, ये देश में कानून व्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत नहीं था।
 

इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह जैसे हश्र की चेतावनी
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि अमृतपाल सिंह ने पंजाब के सीएम भगवंत मान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दे दी थी। वह बेअंत सिंह (पूर्व सीएम, पंजाब) जैसा परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था। उनकी हत्या दिलावर सिंह ने कर दी थी। अमृतपाल ने दावा किया था कि पंजाब के मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए कई दिलावर तैयार हो गए हैं। उन्हें भी इसी तरह से मार दिया जाएगा। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को धमकी भी दी कि वह खालिस्तान हासिल करने के हमारे प्रयास में हस्तक्षेप न करें। अन्यथा उनका भी वही हश्र होगा जो दिवंगत पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का हुआ था। धर्म को ढाल बनाकर वह समाज के निचले तबके और लक्ष्यहीन युवाओं को गुमराह करने लगा। सिख युवकों को दीक्षा देने और उन्हें धर्म से जोड़ने के लिए अमृतपान समारोह आयोजित करने के नाम पर, अमृतपाल सिंह राज्य से लोहा लेने की तैयारी में जुटा था। वह असंतुष्ट युवाओं की फौज तैयार करने की कोशिश कर रहा था। दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने अत्याचारियों से सुरक्षा के लिए खालसा का गठन किया। हालांकि, अमृतपाल ने इसका बिल्कुल उल्टा अर्थ दिया है। वह लोगों को अपने ही लोगों के खिलाफ अत्याचारी/खालसा बनने के लिए उकसा रहा है। 
 

भारतीय संविधान को खारिज कर चुका है अमृतपाल
उन्होंने सिखों से कहा, वे देश के कानून पर भरोसा नहीं करें। वह गुरु से निर्देश लेने पर जोर देता है। गुरु के नाम पर, वह सिख संगत द्वारा पालन किए जाने वाले हुकुमनामा के रूप में अपने स्वयं के दृष्टिकोण देता है जो आम तौर पर देश के कानून के अनुरूप नहीं होते हैं। उसके समर्थकों ने बुजुर्गों और विकलांग लोगों के बैठने के लिए कुछ फर्नीचर रखने की परंपरा का पालन करने के लिए दो गुरुद्वारों में तोड़फोड़ की। वह खुद को श्री गुरु ग्रंथ साहिब से श्रेष्ठ मानता है। अमृतपाल ने भारतीय संविधान को खारिज करते हुए कहा, भारत के संविधान को अपनाकर भारत ने भले ही खुद को गणतंत्र घोषित कर दिया हो, लेकिन उक्त संविधान और कुछ नहीं बल्कि सिखों की गुलामी को कायम रखने का एक तरीका है। उन्होंने सिखों के लिए एक अलग संविधान बनाने की वकालत की। 'हिंदुस्तान दा संविधान जद्द दा लागु हो गया है, सिखाना दे हक ही मारे गए ने। अस्सी अपना आप दा संविधान लागु करेंगे'। जब उसने 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख की कमान संभाली तो वह कार्यक्रम भिंडरावाले के पैतृक गांव रोडे में हुआ था।

वह खुद को सिख धर्म का एकमात्र रक्षक मानने लगा
अमृतपाल सिंह गुरुद्वारों और अकाल तख्त का अनादर (सर्वोच्च लौकिक सीट) करने लगा था। उसने जत्थेदार अकाल तख्त को, गुरु ग्रंथ साहिब को धरना स्थल पर ले जाने के लिए उसके खिलाफ बनाई गई कमेटी को लेकर धमकी दे दी थी। वह सिख मर्यादा का पालन किए बिना खुद हुकुमनामा देने लगा। उसने पंज प्यारों को लेकर चली आ रही सिख परंपरा का विरोध किया। वह खुद को सिख धर्म का एकमात्र रक्षक मानने लगा था। गुरुद्वारे से संबंधित कमेटी को बिना लूप में लिए उसने गुरुद्वारों की संपत्ति को तोड़ना शुरु कर दिया। रिपोर्ट में सामने आया है कि अवतार सिंह (यूके स्थित एसएडी/एक कार्यकर्ता और खालिस्तानी आतंकवादी जगतार सिंह तारा का करीबी सहयोगी) को अमृतपाल सिंह का मुख्य संचालक और दिमाग बताया जाता है। जगतार सिंह, बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े परमजीत सिंह पम्मा का करीबी है। उसे मालूम है कि सिख युवाओं को गुमराह करने के लिए किस तरह से उनके लिए सैद्धांतिक कट्टरपंथी प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। पंजाब को अस्थिर करने के लिए वह अमृतपाल सिंह का इस्तेमाल कर रहा है। इस टोली के सदस्यों ने बर्मिंघम और ग्लासगो में लाइव प्रदर्शन कर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस 'आईईडी' बनाने की कोशिश की है। अमृतपाल के लखबीर सिंह रोडे (प्रमुख, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन) के साथ भी संबंध हैं। रोडे पर, हथियारों की तस्करी और देश में बड़े नेताओं पर हमला करने की साजिश रचने का भी आरोप है। 

भविष्य में भी अजनाला जैसी घटना होने की बात कही
केंद्र को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमृतपाल ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की आड़ में अपने साथी लवप्रीत सिंह तूफान को पुलिस गिरफ्त से छुड़ाने के लिए 23 फरवरी को अजनाला थाने पर हमला बोल दिया था। उस वक्त पंजाब पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगे थे। हालांकि पुलिस ने  बहुत चतुराई से वह मामला संभाला था। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा का ख्याल रखते हुए पुलिस ने स्थिति को अधिक बिगड़ने से रोक दिया। निजी स्वार्थों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का उपयोग करना, अमृतपाल के इस कृत्य की पूरे सिख समुदाय ने निंदा की थी। गुरु साहिब के अनादर की जांच करने का आदेश दिया गया। इसके बाद अमृतपाल ने धमकी दी कि भविष्य में भी अजनाला जैसी घटना हो सकती है। अमृतपाल सिंह एक एनआरआई है, जो दुबई में ट्रक ड्राइवर था। वहीं पर वह आईएसआई के संपर्क में आया। उससे कहा गया है कि वह धर्म के नाम पर भोले-भाले सिख युवाओं को एकत्रित करे। इसके लिए आईएसआई पैसा खर्च करेगी।

उस दौर में वापस नहीं जाना चाहता पंजाब
आईएसआई के इशारे पर ही उसने 'खालसा वहीर' नामक अभियान चलाया। इसके जरिए उसने पंजाब के मुद्दों को लेकर लोगों को भड़काना शुरु कर दिया। भारत सरकार के खिलाफ बयानबाजी की। बीते दिनों पंजाब में जो कुछ हुआ, उससे लोगों के जेहन में आतंकवाद के बुरे दौर की यादें ताजा हो गईं। पंजाब बड़ी मुश्किल से उस दौर से निकला है और अब लोग दोबारा से उस दौर में वापस नहीं जाना चाहते। पंजाब को फिर से अंधेरे में जाने से बचाने के लिए केंद्र और पंजाब सरकार को अमृतपाल के खिलाफ कठोर कदम उठाना बहुत जरूरी हो गया था। अमृतपाल ने आनंदपुर खालसा आर्मी नामक एक नई सेना का गठन किया है। यह सेना खतरनाक हथियारों के साथ हमेशा उसके आसपास रहती है। सवाल यह उठता है कि क्या अमृतपाल का यह कदम देश में एक नए युद्ध की घोषणा है। 
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