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पुणे: गृहमंत्री अमित शाह बोले- कुछ अपराध के मामलों में एफएसएल की मदद से बढ़ाई जा सकती है सजा की दर

Mon, 20 Dec 2021 03:09 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, पुणे
एजेंसी, पुणे Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 20 Dec 2021 03:09 AM IST
सार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत में अपराध के मामलों में सजा की दर दुनिया में कहीं और की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य इस दर को बढ़ाना होना चाहिए।

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Pune: Home Minister Shah says in cases of crime with the help of FSL, the punishment rate can be increased
अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने नशीले पदार्थों, हथियारों की तस्करी, जाली नोट और घुसपैठ जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन बहुत से कदम उठाए जा सकते हैं और सजा की दर को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल) की मदद से बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में फोरेंसिक विज्ञान के लिए क्षमता निर्माण का विस्तार करने की आवश्यकता है।

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भारत में सजा की दर दुनिया में काफी कम 
शाह ने बताया कि भारत में अपराध के मामलों में सजा की दर दुनिया में कहीं और की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य इस दर को बढ़ाना होना चाहिए। शाह ने महाराष्ट्र के पुणे जिले के तालेगांव में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का दौरा किया। उन्होंने केंद्र के एक नए परिसर का उद्घाटन किया। शाह राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक इकाई भी गए, जहां उन्होंने एनडीआरएफ कर्मियों के साथ बातचीत की और बल के जवानों के साथ दोपहर का भोजन किया।
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तालेगांव में एनडीआरएफ परिसर में एक संयुक्त कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने बाढ़, चक्रवात या इमारत ढहने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बल के काम की सराहना की। गुजरात में एक अत्याधुनिक फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का उदाहरण देते हुए शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने एफएसएल की स्थापना का सख्ती से पालन किया था और यह अब दुनियाभर में एक मान्यता प्राप्त संस्थान बन गया है। 
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वैज्ञानिक साक्ष्य सीधे अदालतों को मिले यह सुनिश्चित करेंगे  
अगर हम अपराध को नियंत्रित करना चाहते हैं तो यह तब तक संभव नहीं है जब तक हम अपराधियों को सजा नहीं देते। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वैज्ञानिक साक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे अदालतों तक पहुंचे।

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