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पुलवामा आतंकी हमले के बाद अजहर पर इस तरह विकल्प तलाश रहा है चीन
Sun, 17 Feb 2019 12:20 PM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अजय सिंह
Updated Sun, 17 Feb 2019 12:20 PM IST
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मसूद अजहर
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पुलवामा में आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले को अपना निशाना बनाया था। इस आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद से देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। ऐसे में चीन पाकिस्तानी (वैश्विक) आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर पर अपने कदम के बारे में दोबारा विचार कर रहा है।
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चीन के विदेश मंत्री ने इस हमले की निंदा की है। हालांकि इस बयान में अजहर का कोई उल्लेख नहीं था। चीन इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना फैसला लेने से पहले सभी विकल्पों पर ध्यान दे रहा है क्योंकि इससे उसका सहयोगी पाकिस्तान नाराज हो सकता है। उसने कई बार पाकिस्तान की मदद करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा काउंसिल से अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने में रोड़ा अटकाया है।
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इसका संकेत एक आतंकरिक रिव्यू में मिलता है जिसे चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एक संदेश भेजा है। इसमें उन्होंने सीआरपीएफ के जवानों की शहीदी पर शोक व्यक्त किया है। दूसरा संकेत उस बयान से मिला है जिसे चीन के विदेश मंत्रालय पर लगाया गया है। बयान में कहा गया है कि अजहर पर कोई भी फैसला करने से पहले निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की चर्चा में हिस्सा लेगा।
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बयान में लिखा है, 'हम इसे करना जारी रखेंगे और इस मुद्दे पर भारत सहित सभी पक्षों के साथ बातचीत करना जारी रखेंगे।' इससे पता चलता है कि चीन भारत के साथ आगे की बातचीत करने के बाद इसपर विचार करना चाहता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी कि चीन बिना किसी फायदे के अपने मौजूदा रुख से पलट जाएगा।
पूर्व राजनयिक और रणनीतिकार विशेषज्ञ फुनचोक स्टोबडैन ने कहा, 'चीन एक बहुत बड़ी सौदेबाजी करने के बाद ही मसूद अजहर पर अपने मौजूदा रुख में बदलाव करने पर विचार कर सकता है। इसके बदले में उसे भारत से कुछ रियायतों की उम्मीद होगी।' उन्होंने कहा कि बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन से सार्वजनिक मांग करने की बजाए भारत कैसे इस मसले पर मोलभाव करता है। चीन के नेता भारत की मांग के आगे नहीं झुकना चाहते क्योंकि इससे पाकिस्तान में मौजूद उसकी छवि को चोट पहुंचेगी।