फैसले की घड़ी: पुडुचेरी में क्या सरकार बना पाएगी भाजपा? दांव पर इन दिग्गजों की किस्मत
- पुडुचेरी में कुल 33 विधानसभा सीटें है। इनमें 30 सीटों पर विधानसभा चुनाव होते हैं, जबकि बाकी 3 सीटों पर सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की 30 सीटों पर आज (6 अप्रैल) मतदान हो रहा है। इसके लिए 323 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस की सरकार गिराने में कामयाब होने वाली भाजपा सत्ता में आ पाएगी या कांग्रेस-डीएमके गठबंधन दोबारा सत्तारूढ़ हो पाएगा?
इतने उम्मीदवार आजमा रहे किस्मत
बता दें कि पुडुचेरी में कुल 33 विधानसभा सीटें है। इनमें 30 सीटों पर विधानसभा चुनाव होते हैं, जबकि बाकी 3 सीटों पर सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। इन 30 सीटों में 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। बता दें कि इन चुनावों में भाजपा ने एन रंगासामी के नेतृत्व वाली एनआईएनआरसी व एआईएडीएमके से गठबंधन किया है। ऐसे में एआईएनआरसी 16, भाजपा 9 और एआईएडीएमके 5 पर चुनाव लड़ रही है। उधर, कांग्रेस और डीएमके गठबंधन भी ताल ठोक रहा है। कांग्रेस 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और यानम सीट पर एक निर्दलीय का समर्थन कर रही है। वहीं, डीएमके सहित अन्य दल 13 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। पुडुचेरी में अभिनेता से नेता बने कमल हसन और उनकी पार्टी भी किस्मत आजमा रही है।
चुनाव से ठीक पहले गिरी कांग्रेस सरकार
बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं, जबकि डीएमके ने तीन सीटें जीती थीं। इस गठबंधन से वी नारायणसामी मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले 22 फरवरी को उनकी सरकार गिर गई। ऐसे में कांग्रेस एक बार फिर राज्य की सत्ता में वापसी की हरसंभव कोशिश कर रही है, लेकिन एनडीए कड़ी चुनौती दे रहा है।
इन सीटों पर रहेगी नजर
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ही नहीं, बल्कि कई दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला भी होगा। यहां यानम विधानसभा सीट पर हर किसी की नजर बनी हुई है। दरअसल, इस सीट से एआईएनआरसी नेता एन रंगासामी चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा वह पुदुचेरी की थातांचवडी सीट से भी ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवी सुब्रमण्यन अपने गृह शहर कराईकल (उत्तर) से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में इस सीट पर भी नजरें बनी हुई हैं। एआईएडीएमके नेता ए अंबलगन उप्पलाम सीट और ओम सखी सेगर ओर्लीनपेट सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। अंबालागन उप्पलाम सीट पर साल 2001 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं, लेकिन इस बार उनके सामने डीएमके उम्मीदवार व पूर्व विधायक एनीबाल कैनेडी मैदान में हैं। ओम सल्थी सेगर दो बार से नेलिथोप से जीते, लेकिन इस बार वह ऑरलिथ सीट से उतरे हैं। कामराज नगर सीट से पूर्व मंत्री एमओएचएफ शाहजहां चुनाव लड़ रहे हैं तो एमबालम सीट पर एम कंदलसामी और तिरुनलार सीट से आर कमलाकनन मैदान में हैं। एआईएडीएमके नेता अंबलगन के भाई ए बसकर एआईएडीएमके के टिकट पर मुदलियारपेट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मन्नादीपिप भी सीट काफी अहम है, क्योंकि यहां से पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री ए नमस्सिवयम भाजपा के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने गृहनगर विलेनूर से चुनाव लड़ा था।
भाजपा की अब तक नहीं हुई एंट्री
तमिलनाडु की तरह पुडुचेरी की राजनीति कई दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सिमटी हुई है। तमिलनाडु में भले ही इन दोनों पार्टियों ने बारी-बारी से राज किया, लेकिन पुडुचेरी हमेशा कांग्रेस का गढ़ बना रहा। इसके अलावा भाजपा यहां अब तक एंट्री नहीं कर सकी। दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते यहां के तमाम फैसले केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एलजी करते हैं। इसके चलते मतदाता विकास के लिए राष्ट्रीय पार्टी को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में केंद्र की सत्ता पर काबिज मोदी सरकार की अगुवाई वाले गठबंधन को विश्वास है कि इस बार उसे पुडुचेरी में राज करने का मौका मिल सकता है।