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AP: विधानसभा में अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने का प्रस्ताव, CM नायडू ने केंद्र से की कानूनी मान्यता की मांग

Sat, 28 Mar 2026 01:48 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 28 Mar 2026 01:48 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश विधानसभा में अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया और केंद्र से इसे कानूनी मान्यता देने की मांग की गई। इस दौरान YSRCP के विधायक सत्र से अनुपस्थित रहे। 

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Proposal to make Amaravati the permanent capital in the Assembly, CM demands legal recognition from the Centre
एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश - फोटो : ANI

विस्तार

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य विधानसभा में अमरावती को स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से अमरावती को आधिकारिक तौर पर राजधानी का कानूनी दर्जा देने की भी मांग की। यह प्रस्ताव एक विशेष विधानसभा सत्र के दौरान लाया गया, जिसमें विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के विधायक मौजूद नहीं रहे।

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इस प्रस्ताव के पीछे की कहानी

दरअसल, अमरावती की कहानी आंध्र प्रदेश के 2014 के विभाजन से जुड़ी है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014के तहत राज्य दो हिस्सों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बंट गया था। उस समय तय किया गया था कि हैदराबाद 10 साल तक दोनों राज्यों की साझा राजधानी रहेगा और इस दौरान आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी विकसित करनी होगी।

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इसी पृष्ठभूमि में नायडू ने अमरावती को अपनी ड्रीम राजधानी परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया। 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने विशेषज्ञों की मदद से अमरावती को राजधानी के रूप में चुना और विकास की दिशा में कदम बढ़ाए। हालांकि, परियोजना को पर्यावरणीय और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण से राहत मिलने के बाद इसके आगे बढ़ने की उम्मीद जगी थी।
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लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में YSRCP ने भारी बहुमत हासिल किया और सत्ता में आने के बाद अमरावती परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नई सरकार ने विदेशी बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज को भी वापस कर दिया और तीन राजधानियों अमरावती (विधायी), विशाखापट्टनम (कार्यकारी) और कुरनूल (न्यायिक) का प्रस्ताव सामने रखा।


अब एक बार फिर सत्ता में लौटे नायडू ने अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से पुनर्जीवित कर दिया है। यह प्रस्ताव न केवल राज्य की राजधानी को लेकर जारी असमंजस को खत्म करने की कोशिश है, बल्कि पिछले एक दशक से चल रही राजनीतिक खींचतान का नया अध्याय भी खोलता है।

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