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किसानों के लिए चिंताजनक बनी 'आंदोलन बनाम भाजपा' की कहानी, कांग्रेस पार्टी से 'दोस्ती' का सच बताना होगा
Sat, 13 Feb 2021 04:27 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 13 Feb 2021 04:27 PM IST
सार
किसान नेता का कहना है कि सरकार तो पहले ही दिन से आंदोलन को तोड़ने में दिमाग लगा रही है। आंदोलन को हर तरीके से बदनाम करने की कोशिश की गई। जब ऐसे किसी भी प्रयास में कामयाबी नहीं मिली तो 'आंदोलन बनाम भाजपा' का राग छेड़ दिया...
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Ghazipur Farmers Protest
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
किसान आंदोलन जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से कुछ चुनौतियां भी आ खड़ी हुई हैं। 'आंदोलन बनाम भाजपा', किसान संगठनों के नेताओं के सामने यही पहली चुनौती है। इस कहानी का पर्दाफाश करना, किसान नेताओं के लिए चिंता का विषय बन चुका है। दूसरा, कांग्रेस पार्टी से आंदोलन की 'दोस्ती', यह भी किसान नेताओं के लिए गले की फांस बना है। लोगों को सच्चाई से अवगत कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। एआईकेएससीसी के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा कहते हैं, हमें इन दोनों चुनौतियों से पार पाना है। दूसरी कोई दिक्कत नहीं है, मगर ये दो बातें किसान आंदोलन को चिंता में डाल रही हैं।
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किसान आंदोलन, केंद्र सरकार की कृषि नीतियों के खिलाफ है। सरकार अगर किसानों की मांग मान ले तो आंदोलन खत्म हो जाएगा। अविक साहा के मुताबिक, सरकार तो पहले ही दिन से आंदोलन को तोड़ने में दिमाग लगा रही है। आंदोलन को हर तरीके से बदनाम करने की कोशिश की गई। जब ऐसे किसी भी प्रयास में कामयाबी नहीं मिली तो 'आंदोलन बनाम भाजपा' का राग छेड़ दिया।
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इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है। एक विशेष पार्टी के लोग गांव-गांव जाकर किसानों को बता रहे हैं कि ये आंदोलन उनके हितों के लिए नहीं है, बल्कि उनका निशाना तो भाजपा है। वे केवल किसानों के कंधे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह की भ्रामक बातें सुनने को मिल रही हैं। किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं ने इस दुष्प्रचार का मुंह तोड़ जवाब देने की रणनीति तैयार कर ली है।
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कांग्रेस पार्टी या कोई दूसरा दल, किसानों ने उन्हें अपने मंच पर कभी नहीं बुलाया। गणतंत्र दिवस के बाद गाजीपुर मंच को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर राजनीतिक दलों के नेताओं से दूरी बना कर रखी जा रही है। भाजपा ने हर मंच से कहना शुरू कर दिया है कि किसान आंदोलन के पीछे कांग्रेस पार्टी का हाथ और साथ है। बतौर साहा, हमें संभलकर चलना होगा। ये भी हमारे लिए चिंता का विषय है। आंदोलन के सभी नेता यह प्रयास कर रहे हैं कि ये कांग्रेस समर्थित आंदोलन न बनने पाए।
हम लोगों के बीच जाकर बता रहे हैं, कांग्रेस और किसान आंदोलन एक नहीं है। ये तो भाजपा का दुष्प्रचार है। आंदोलन को खत्म करने की साजिश है। कई बार यह होता है कि किसी आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप जरूरी भी होता है और चिंताजनक भी। यहां पर बता दें कि किसानों को किसी राजनीतिक दल के सहयोग की आवश्यकता नहीं है। किसान संगठन नहीं चाहते कि कोई उनके मंच पर आकर यह कहे, कांग्रेस ने किसानों के लिए क्या किया है, भाजपा ने किसानों के लिए क्या किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शनपाल कहते हैं, कुछ लोग ज्वलंत मुद्दों पर राजनीति करने लगते हैं। किसानों का मंच चुनावी मंच नहीं हैं। यह बात सभी को समझा दी गई है। राजनीतिक दलों को किसानों का मंच इस्तेमाल नहीं करने देंगे। चाहे वे समर्थन दें या न दें, किसानों का मंच पूरी तरह से अराजनीतिक रहेगा।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान के मुताबिक अब यह आंदोलन गति पकड़ चुका है। सारे देश में किसान महापंचायतें हो रही हैं। तय घोषणा के अनुसार, रेल भी रोकी जाएगी और रास्ते बंद करने पड़े तो वह भी करेंगे। अब लड़ाई आर या पार की है। सरकार चाहे किसानों के खिलाफ कितने भी मामले दर्ज करा दे, वे पीछे नहीं हटेंगे।