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इस सप्ताह मोदी सरकार पेश करेगी बड़े रक्षा प्रॉजेक्ट्स के लिए रोडमैप
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Thu, 11 May 2017 08:59 AM IST
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एयर फ़ोर्स
- फोटो : source
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डिफेंस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने देश के बड़े रक्षा परियोजनाओं के लिए कंपनियों का चुनाव करने प्रक्रिया शुरु कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए सामान के उत्पादन में निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसके इस सप्ताह के अंत तक सामने आने की संभावना है। बताया जा रहा है कि भारतीय कंपनियनों और विदेशी कंपनियों के चुनाव की प्रक्रिया अलग-अलग होगी।
भारतीय कंपनियों को आर्थिक मजबूती, तकनीकी सक्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर चुना जाएगा। वहीं विदेशी कंपनियों को बतौर साझेदार शामिल किया जाएगा, जिसके लिए तकनीक और व्यवसायिक आधाप पर चयन किया जाएगा। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार रक्षा मंत्रालय की नई स्ट्रैटजी पॉलिसी (एसपी) मॉडल में आधा दर्जन भारतीय कंपनियों का गुट बनाया जाएगा। इन कंपनियों को विशेष दर्ज दिया जाएगा। साथ ही बड़ी डिफेंस प्रॉडक्शन डील करने का मौका शुरु हो जाएगा।
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भारतीय कंपनियों को आर्थिक मजबूती, तकनीकी सक्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर चुना जाएगा। वहीं विदेशी कंपनियों को बतौर साझेदार शामिल किया जाएगा, जिसके लिए तकनीक और व्यवसायिक आधाप पर चयन किया जाएगा। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार रक्षा मंत्रालय की नई स्ट्रैटजी पॉलिसी (एसपी) मॉडल में आधा दर्जन भारतीय कंपनियों का गुट बनाया जाएगा। इन कंपनियों को विशेष दर्ज दिया जाएगा। साथ ही बड़ी डिफेंस प्रॉडक्शन डील करने का मौका शुरु हो जाएगा।
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खत्म हो जाएंगे सारे MoU
us navy's super carrier
पहले दौर में इन भारतीय कंपनियों को चार बड़े प्रॉजेक्ट के लिए बोली लगाने के लिए क्वालिफाई करना जरूरी है। इन चार बड़े प्रॉजेक्ट्स में पनडुब्बियों, फाइटर प्लेन और आर्मी हेलीकॉप्टर के लिए हथियारों से लैस वाहनों का निर्माण शामिल है। नियमों के मुताबिक, किसी भी तरह के एकाधिकार को रोकने के लिए एक भारतीय कंपनी को केवल एक ही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप प्रॉजेक्ट के लिए अनुमति होगी। इस मॉडल के साथ मंत्रालय को उम्मीद है कि वह प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर सवालिया निशानों से बच सकेगा।
नई पॉलिसी के आने के बाद पिछले तीन सालों में इन प्रॉजेक्ट्स के लिए भारतीय कंपनियों और विदेशी साझेदारों के बीच हस्ताक्षर किए गए लगभग सभी मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिग (MoU) बेकार हो जाएंगे। रक्षा मंत्रालय कुछ ही समय में क्वॉलिफिकेशन प्रॉसेस के लिए कंपनियों को आमंत्रित करेगी। कंपनियों से चारों प्रॉजेक्ट्स में से अपनी प्राथमिकता तय करने के लिए कहा जाएगा। उसके बाद वित्तीय पैमानों और योग्यताओं के आधार पर कुल 6 कंपनियों का चयन कर लिया जाएगा।
नई पॉलिसी के आने के बाद पिछले तीन सालों में इन प्रॉजेक्ट्स के लिए भारतीय कंपनियों और विदेशी साझेदारों के बीच हस्ताक्षर किए गए लगभग सभी मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिग (MoU) बेकार हो जाएंगे। रक्षा मंत्रालय कुछ ही समय में क्वॉलिफिकेशन प्रॉसेस के लिए कंपनियों को आमंत्रित करेगी। कंपनियों से चारों प्रॉजेक्ट्स में से अपनी प्राथमिकता तय करने के लिए कहा जाएगा। उसके बाद वित्तीय पैमानों और योग्यताओं के आधार पर कुल 6 कंपनियों का चयन कर लिया जाएगा।