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बॉयोमीट्रिक्स का फर्जी उपयोग कंपनियो को पड़ा भारी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:16 PM IST
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आधार बॉयोमीट्रिक्स का गैरकानूनी इस्तेमाल भी आपको जेल की हवा खिला सकता है। ऐसे ही एक मामले में 3 कंपनियां फंस गई हैं। मामले को संज्ञान में लेते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने कहा कि ये कानून का उल्लंघन है। प्राधिकरण ने इस मामले की दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में आपराधिक शिकायत दर्ज करवा दी है।
आधार के नियम व कानून के उल्लंघन के तहत ऐक्सिस बैंक, मुंबई आधारित सुविधा इनफोवेयर, बेंगलुरु आधारित ई मुद्रा के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए नोटिस दिया गया है। ये साफ किया जा चुका है कि दिल्ली पुलिस ने UIDAI से मिली शिकायत के चलते प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली है।
बताया जा रहा है कि सबूत के तौर पर लगातार कई लेनदेन में बायोमेट्रिक मैच की गई जो की संभव नहीं है, बॉयोमीट्रिक्स को बिना संग्रहीत किये उनका अनधिकृत प्रयोग किया जा रहा UIDAI ने ये ठोस कदम तब उठाया जब एक नोटिस इन कंपनियों को परोसा गया था। आधार कार्ड का विनियमन 25 (प्रमाणीकरण) विनियम, 2016 के तहत यूआईडीऐआई ने जांच की जिसमें सामने आया कि 11 जनवरी से 17 जनवरी 2017 के बीच लेन-देन में गंभीर समस्याएं थी।
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वही आंतरिक ऑडिट की जांच में ये पाया गया कि तीनों कंपनियों में ऑडिट बनाने के लिए एक व्यक्ति द्वारा तीन संस्थाओं के प्रयासों के लिए जिम्मेदार पाया गया। बताया ता रहा है कि कई आधार सक्षम "संग्रहीत" बॉयोमीट्रिक्स का उपयोग करके लेनदेन किया तजा रहा था और उसके बाद अन्य लेनदेन के लिए भी इनका इस्तेमाल किया गया। लेकिन UIDAI को इस मामले का पता चलने के बाद कंपनियों के ये सारे प्रयास विफल साबित हुए। जांच के दौरान UIDAI को वो डिवाइस भी मिली, जिसका इस्तेमाल इस फर्जीवाड़े में किया जा रहा था।
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आधार के नियम व कानून के उल्लंघन के तहत ऐक्सिस बैंक, मुंबई आधारित सुविधा इनफोवेयर, बेंगलुरु आधारित ई मुद्रा के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए नोटिस दिया गया है। ये साफ किया जा चुका है कि दिल्ली पुलिस ने UIDAI से मिली शिकायत के चलते प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली है।
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बताया जा रहा है कि सबूत के तौर पर लगातार कई लेनदेन में बायोमेट्रिक मैच की गई जो की संभव नहीं है, बॉयोमीट्रिक्स को बिना संग्रहीत किये उनका अनधिकृत प्रयोग किया जा रहा UIDAI ने ये ठोस कदम तब उठाया जब एक नोटिस इन कंपनियों को परोसा गया था। आधार कार्ड का विनियमन 25 (प्रमाणीकरण) विनियम, 2016 के तहत यूआईडीऐआई ने जांच की जिसमें सामने आया कि 11 जनवरी से 17 जनवरी 2017 के बीच लेन-देन में गंभीर समस्याएं थी।
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वही आंतरिक ऑडिट की जांच में ये पाया गया कि तीनों कंपनियों में ऑडिट बनाने के लिए एक व्यक्ति द्वारा तीन संस्थाओं के प्रयासों के लिए जिम्मेदार पाया गया। बताया ता रहा है कि कई आधार सक्षम "संग्रहीत" बॉयोमीट्रिक्स का उपयोग करके लेनदेन किया तजा रहा था और उसके बाद अन्य लेनदेन के लिए भी इनका इस्तेमाल किया गया। लेकिन UIDAI को इस मामले का पता चलने के बाद कंपनियों के ये सारे प्रयास विफल साबित हुए। जांच के दौरान UIDAI को वो डिवाइस भी मिली, जिसका इस्तेमाल इस फर्जीवाड़े में किया जा रहा था।