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रोड-शो से मतदाताओं की महफिल लूट लेंगी प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस में हो रहा मंथन
Wed, 06 Feb 2019 08:11 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शशिधर पाठक
Updated Wed, 06 Feb 2019 08:11 PM IST
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Priyanka Gandhi
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रोड-शो से सोनिया गांधी ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी और 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सत्ता में आ गई थी। रोड-शो का कांग्रेस पार्टी का सबसे पुराना और हिट फार्मूला रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी इस फार्मूले को अपनाएंगी।
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इसका खाका तैयार हो रहा है और नौ फरवरी तक पार्टी के रोड-शो को लेकर कोई निर्णय हो जाएगा। उ.प्र. के चार दिग्गज कांग्रेस नेताओं में से एक का मानना है कि प्रियंका गांधी का यह रोड-शो उ.प्र. के मतदाताओं की महफिल लूट लेगा। सात और नौ फरवरी को पार्टी नेताओं के साथ इस पर भी चर्चा होने के पूरे आसार हैं।
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सूत्र का कहना है कि यदि प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव बनाने की घोषणा कहीं जुलाई-अगस्त 2018 में हुई होती तो उ.प्र. से पार्टी की 40 सीटें आनी तय थी। अब लोकसभा चुनाव की घोषणा होने में महज कुछ दर्जन दिन बचे हैं। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव 2019 में अपना कमाल जरूर करेगी।
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एक डर भी है
प्रियंका सुलझी हुई हैं। सधा, जमीनी बयान देती हैं। चुनाव के पैंतरे को बखूबी समझती हैं। कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार प्रियंका का जनता के भीतर एक क्रेज है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह, उ.प्र. कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर भी प्रियंका गांधी को बहुत लोकप्रिय मानते हैं।
ऐसे में कांग्रेस नेताओं को डर है कि कहीं प्रियंका के रोड-शो को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भी मंजूरी न दे। ठीक वैसे ही जैसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को रोड-शो नहीं करने दिया। बताते हैं इसके कारण अभी प्रियंका गांधी वाड्रा या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के रोड-शो और चुनाव प्रचार अभियान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
जनता की नब्ज टटोलिए
राज बब्बर कहते हैं कि आप जरा देखिए। उनके चेहरे पर आखिर इतनी घबराहट क्यों है? संजय सिंह कहते हैं कि जरा चुनाव को थोड़ा और नजदीक आने दीजिए, सब पता चल जाएगा। राहुल गांधी के कार्यालय के एक सक्रिय सदस्य बदलाव से जुड़े सवाल पर सीधे राहुल की जनसभाओं की तस्वीर भेज देते हैं।
सदस्य कहते हैं कि आप 2013 याद कीजिए। राहुल जी के कार्यक्रम की जगह खोजनी पड़ती थी। कुर्सियां खाली रह जाती थी। आज भी जगह खोजनी पड़ती है, क्योंकि जनसभा के लिए बड़ा मैदान चाहिए। जनता जनार्दन की जोरदार भीड़ उमड़ रही है। सूत्र का कहना है कि पटना के गांधी मैदान में राहुल गांधी की जनसभा में इतनी भीड़ के बारे में हमने सोचा नहीं था। उड़ीसा में ही देख लीजिए। राहुल गांधी को सुनने लोग आ रहे हैं। सूत्र का कहना है कि यह वक्त बदलाव का है।