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निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ा रेलवे, 109 जोड़ी प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए प्रस्ताव मंगाए
Wed, 01 Jul 2020 08:04 PM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Wed, 01 Jul 2020 08:04 PM IST
सार
- परियोजना में निजी क्षेत्र से लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा।
- यह भारतीय रेल नेटवर्क में यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी निवेश की पहली पहल है।
- अधिकांश ट्रेनों को भारत (मेक इन इंडिया) में ही बनाया गया है।
- इन ट्रेनों के वित्तपोषण, खरीद, परिचालन और रखरखाव के लिए निजी इकाई जिम्मेदार होगी।
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indian railway
- फोटो : social media
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विस्तार
काशी-महाकाल एक्सप्रेस समेत तीन रेलागाड़ियों को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) के हवाले करने के बाद अब रेलवे निजीकरण की दिशा में और आगे बढ़ गया है। रेल मंत्रालय ने औपचारिक रूप से 109 जोड़ी निजी ट्रेन चलाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) मंगाए हैं। इसकी शुरुआत 151 आधुनिक ट्रेनाें से होगी।
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इसके लिए पूरे देश के रेलवे नेटवर्क को 12 क्लस्टर में बांटा गया है और इन्हीं में प्राइवेट ट्रेनें चलाई जाएंगी। हर ट्रेन कम से कम 16 डिब्बे की होगी और अधिकतम 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। इन ट्रेनों का रोलिंग स्टॉक निजी कंपनी खरीदेगी। रख-रखाव भी उसी की जिम्मेदारी होगा। रेलवे सिर्फ ड्राइवर और गार्ड मुहैया कराएगा। यह रेलवे नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनों को चलाने के लिए निजी निवेश की बड़ी पहल है।
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निजी संस्थाओं को तय मार्ग पर ट्रेन संचालन की प्रक्रिया दो साल में पूरी कर ली जाएगी। दावेदारों की पहचान के बाद दूसरे चरण में प्रस्ताव मांगे जाएंगे। इसके राजस्व और मार्गों का निर्धारण बाद की प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। कोरोना से पहले आरके कैटरिंग, अडानी पोर्ट्स और मेक माई ट्रिप ने रेल चलाने में रुचि दिखाई थी। अब एल्सटन ट्रांसपोर्ट, बॉम्बार्डियर, सीमंस एजी और मैक्यूरी जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में उतरना चाहती हैं।
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मेक इन इंडिया के तहत बनेंगी
निजीकरण की इस पहल का उद्देश्य आधुनिक टेक्नोलॉजी को सामने लाना है जिससे रख-रखाव का बोझ कम हो सके। इससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव होगा। सभी ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाई जाएंगे। इससे यात्रा में लगने वाले समय में खासी कमी आएगी। एक ट्रेन द्वारा यात्रा में लगने वाला समय तुलनात्मक रूप से घट जाएगा या संबंधित रूट पर परिचालित भारतीय रेल की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन से भी ज्यादा गति हो जाएगी।
मुंबई-दिल्ली समेत 100 मार्गों की पहचान हो चुकी
इसी साल की शुरुआत में नीति आयोग के रेलवे के ‘प्राइवेट पार्टिसिपेशन: पैसेंजर ट्रेन’ शीर्षक वाले पत्र में 100 रूटों की पहचान प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए की गई है। इन रूटों में मुंबई सेंट्रल-नई दिल्ली, नई दिल्ली-पटना, इलाहाबाद-पुणे और दादर-वडोदरा, हावड़ा-चेन्नई, हावड़ा-पटना, इंदौर-ओखला, आनंद विहार-भागलपुर, सिकंदराबाद-गुवाहाटी, हावड़ा-आनंद विहार शामिल हैं।