{"_id":"5dd16ae58ebc3e54eb2a818b","slug":"private-doctors-will-be-able-to-provide-disability-certificate-ministry-of-ayush-can-change-rules","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राइवेट डॉक्टर भी दे सकेंगे दिव्यांगता प्रमाणपत्र, नियमों में बदलाव के लिए आयुष मंत्रालय करेगा पहल ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
प्राइवेट डॉक्टर भी दे सकेंगे दिव्यांगता प्रमाणपत्र, नियमों में बदलाव के लिए आयुष मंत्रालय करेगा पहल
Sun, 17 Nov 2019 09:14 PM IST
आसिम खान
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 17 Nov 2019 09:14 PM IST
विज्ञापन
आयुष मंत्री श्रीपद येसोनाइक
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिव्यांग जनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र जिले के सरकारी अस्पताल या राज्य द्वारा तय किए गए किसी अन्य शीर्ष अस्पताल से जारी किया जाता है। चलने में अक्षमता के साथ-साथ सहित कई अन्य कारणों से दिव्यांगों को यह प्रमाण पत्र हासिल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन आने वाले समय में दिव्यांग यह प्रमाण पत्र अपने नजदीकी प्राइवेट डॉक्टर से भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए नियमों में संशोधन करने की आवश्यकता पड़ेगी।
विज्ञापन
केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय इसके लिए जरूरी पहल करने की योजना बना रहा है। आयुष मंत्री श्रीपद येसोनाइक ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि दिव्यांग जनों को यह प्रमाण पत्र पाने के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए उनके नजदीकी अस्पतालों और प्रशिक्षित डॉक्टरों को अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है। वे इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य संबंधित विभागों और मंत्रालयों को भी पत्र लिखेंगे।
विज्ञापन
अभी भी कई अहम फैसले होते हैं
आयुष मंत्रालय में सलाहकार डॉक्टर नवल कुमार ने बताया कि सरकारी क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं। जिले के मुख्य अस्पताल तक पहुंच भी दिव्यांगों के लिए बड़ी समस्या है। इसलिए प्राइवेट डॉक्टरों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति देना दिव्यांगों के लिए काफी अच्छा फैसला होगा।
विज्ञापन
इस अधिकार का दुरुपयोग न हो सके, इसके लिए दुरुपयोग पाए जाने पर डॉक्टर के प्रैक्टिस लाइसेंस खत्म करने जैसे कड़े प्रावधान किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी प्रशिक्षित प्राइवेट डॉक्टरों के द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र पर बीमा सहित कई अन्य क्षेत्रों में अहम फैसले लिए जाते हैं। इसलिए उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दिव्यांग जन आयुक्त कार्यालय के आयुक्त टीडी धारियाल ने अमर उजाला को बताया कि प्रावइवेट डॉक्टरों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देने के लिए राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलीटीज एक्ट 2016 और कुछ नियमों में परिवर्तन करना पड़ेगा। इसे व्यावहारिक बनाने के लिए कुछ तकनीकी मुद्दों पर विचार करने की आवश्कता है। जैसे प्राइवेट डॉक्टरों का भुगतान कैसे किया जाएगा, और जिन मामलों में एक से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका की आवश्यकता पड़ती है उनका समाधान कैसे किया जाएगा।
टीडी धारियाल के मुताबिक अभी भी जिन केसों में दिव्यांगता तय करने के लिए दूसरे क्षेत्र के विशेषज्ञों की जरूरत होती है, अगर वे सरकारी अस्पताल में नहीं हैं तो उनमें प्राइवेट विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया जा सकता है। इसके लिए प्रावधान में अभी भी अनुमति है। लेकिन उन्हें पूरी तरह अधिकार देने के लिए कई अन्य पहलुओं पर भी विचार करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश की भूमिका सराहनीय
दिव्यांगता प्रमाण पत्र (Divyangta Certificate or Disability Certificate) जारी करने में उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने सराहनीय पहल की है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जारी एक आदेश में अब पहली से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को उनके स्कूल से ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। इसके लिए तहसील या ब्लॉक स्तर में कैंप लगाए जाते हैं। दिव्यांगता से जुड़े हर क्षेत्र के डॉक्टरों सहित क्षेत्र के डीएम या एसडीएम इस पैनल में होते हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के द्वारा दिव्यांग छात्रों का अवलोकन कर उन्हें यह प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।