देशभर में निजी डॉक्टर हड़ताल पर, आईएमए मना रही है 'काला दिवस'
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक पर मंगलवार को संसद में चर्चा हो सकती है। विधेयक में प्रस्ताव है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक एक 'ब्रिज कोर्स' पूरा कर लेने के बाद एलोपैथी डॉक्टर की तरह प्रैक्टिस कर सकते हैं। आईएमए के मुताबिक इससे बड़े पैमाने पर चिकित्सा का स्तर गिरेगा और यह मरीज की देखभाल और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा। आईएमए की मांग है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत प्रैक्टिस के लिए एमबीबीएस का मानक बना रहना चाहिए।
केरल, कर्नाटक समेत कई राज्यों से बंद के असर की खबरें आ रही हैं। केरल की राजधानी तिरूवनंतपुरम में डॉक्टरों ने राजभवन के बाहर प्रदर्शन किया।
Kerala: Doctors protest outside Raj Bhavan in Thiruvananthapuram against National Medical Commission Bill pic.twitter.com/bfnS9TyENV
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) January 2, 2018
तिरूवनंतपुरम में आईएमए की बंद का असर भी साफ दिखा। सामान्य अस्पताल में डॉक्टरों ने सुबह 9 से 10 बजे तक ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जिससे मरीजों की भीड़ जमा हो गई।
Thiruvananthapuram: Patients wait outside General Hospital as doctors boycott outpatient consultation from 9 am to 10 am after Indian Medical Association called for suspending private healthcare services for 12 hours in protest against National Medical Commission Bill #Kerala pic.twitter.com/0c74H7zBR5
— ANI (@ANI) January 2, 2018
आईएमए के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेड़े ने ऐलान किया था कि, 'एनएमसी विधेयक 2017 जन विरोधी और गरीब विरोधी, अलोकतांत्रिक और अपने चरित्र में गैर-संघीय है। इसलिए देशभर में रोजमर्रा की सभी सेवाएं सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक बंद रहेंगी।' आईएमए के 2.77 लाख सदस्य हैं जिसमें निजी अस्पताल, पॉली क्लिनिक और नर्सिंग होम शामिल हैं। आईएमए के ऐलान से निजी अस्पतालों में ओपीडी और वैकल्पिक सर्जरी की सेवाएं बंद रहेंगी।
प्रस्तावित विधेयक में संशोधन की मांग
हालांकि कर्नाटक के हुबली में विवेकानंद सामान्य अस्पताल में सन्नाटा पसरा हुआ है। डॉक्टरों ने मंगलवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद के समर्थन में कामकाज बंद कर दिया है।
#Visuals from Vivekananda General Hospital in Karnataka's Hubli; OPD services closed from 6 AM till 6 PM today in support of IMA's call for protest against National Medical Commission Bill pic.twitter.com/qrX3yj1b8o
— ANI (@ANI) January 2, 2018
एनएमसी विधेयक का विरोध करती रही आईएमए का कहना है कि, यह विधेयक डॉक्टरों के कामकाज को 'अपंग' बना देगा, जिससे डॉक्टर सिर्फ नौकरशाही और गैर-चिकित्सा प्रशासकों के प्रति पूरी तरह से उत्तरदायी हो जाएंगे। आईएमए ने इसके विरोध में मंगलवार को 'काला दिवस' घोषित किया।
आईएमए के सदस्य डॉक्टर पार्थिव सांघ्वी ने कहा है कि, 'डॉक्टरी के पेशे के इतिहास में पहली बार 'काला दिवस' कहने के अलावा केंद्र सरकार ने हमारे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। 'नेशनल मेडिकल कमिशन को ना कहना पूरे चिकित्सा समुदाय के साथ-साथ हर रोगी के लिए एक नारा है।'
The central government has left us no option but to call it a 'black day' in the history of medical profession. 'No to NMC (National Medical Commission)' is a slogan for medical community as well as every patient: Parthiv Sanghvi, Indian Medical Association pic.twitter.com/svYGvxyaJL
— ANI (@ANI) January 2, 2018
एनएमसी विधेयक 2017 लोकसभा में शुक्रवार को पेश किया गया था। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल और अध्यक्ष रवि वानखेड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलकर विधेयक में व्यापक संशोधन की मांग की है।
डॉक्टरों के हड़ताल के मुद्दे पर मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यसभा में बताया कि, 'आईएमए के सदस्यों से सोमवार को बातचीत हुई है। हमने उनकी बातें सुनी और अपना नजरिया भी सामने रखा।'
Spoke to Indian Medical Association yesterday, we have heard them and put forth our perspective as well: Union Health Minister JP Nadda in Rajya Sabha on doctors' strike
— ANI (@ANI) January 2, 2018
नए विधेयक से प्रभावित होगी चिकित्सा सेवाः डा. अजय अग्रवाल
वहीं इस मुद्दे पर नोएडा के मशहूर फोर्टिस अस्पताल के आतंरिक चिकित्सा विभाग के हेड और निदेशक डा. अजय अग्रवाल ने भी विरोध जताया। डा. अग्रवाल का कहना था कि सरकार द्वारा लाए जा रहे एनएमसी विधेयक 2017 के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर गिरेगा और बेहतर चिकित्सक तैयार करने की प्रक्रिया भी बाधित होगी।
डा. अग्रवाल के अनुसार सरकार जो आयुष चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स करके एलोपैथिक डॉक्टर के बराबर रखने की व्यवस्था कर रही है वह भी काफी नुकसानदायक है। एलोपैथिक चिकित्सक दस-दस साल की प्रैक्टिस के बाद जो अनुभव इकट्ठा करते हैं वो दो साल के ब्रिज कोर्स से कैसे पूरा हो सकता है।
इसके अलावा नए विधेयक में मेडिकल कालेजों में 60 फीसदी सीटें आरक्षण से भरने की मंशा भी खतरनाक है, यह सीधे सीधे मेडिकल एजुकेशन के स्तर को प्रभावित करेगी। मेडिकल जैसे फील्ड में जरूरी है कि छात्र आरक्षण के बजाय मेरिट से आएं।