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Rajya Sabha: AI से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए निजी विधेयक राज्यसभा में सूचीबद्ध, दिए गए ये प्रस्ताव
Sun, 28 Jul 2024 07:16 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 28 Jul 2024 07:16 PM IST
सार
इस विधेयक में कहा गया है कि जैसे-जैसे कार्यस्थलों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग में तेजी आती जा रही है, उसे देखते हुए श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों को अनुकूलित किया जाना चाहिए।
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संसद भवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यबल को कैसे प्रभावित कर सकता है? इस पर वैश्विक चिंताओं के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद मौसम नूर ने दफ्तरों में एआई प्रौद्योगिकियों के उपयोग में पारदर्शिता की वकालत की है। जिससे कि नियुक्ति और पदोन्नति में पक्षपात और भेदभाव को रोका जा सके। इस बाबत उन्होंने राज्यसभा में निजी सदस्य विधेयक के रूप में कार्यबल अधिकार (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) विधेयक, 2023 पेश किया है।
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इस विधेयक में कहा गया है कि जैसे-जैसे कार्यस्थलों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग में तेजी आती जा रही है, उसे देखते हुए श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों को अनुकूलित किया जाना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार को कार्यस्थल के भीतर एआई प्रौद्योगिकियों के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा, कर्मचारियों को लगता है कि एआई-जनित प्रक्रियाएं उनके अधिकारों या नैतिक मानकों का उल्लंघन करती हैं तो इस आधार पर कार्यों या निर्णयों के लिए मना करने का अधिकार भी देना चाहिए ।
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यह एआई कार्यान्वयन से प्रभावित कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और कौशल बढ़ाने के अवसर प्रदान करना चाहता है, और डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीय हैंडलिंग सहित कर्मचारी गोपनीयता अधिकारों की सुरक्षा भी प्रदान करता है।
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विधेयक में कहा गया है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियोक्ता एआई को लागू करने से पहले कर्मचारियों से स्पष्ट और सूचित सहमति प्राप्त करें जो सीधे उनके काम या अधिकारों को प्रभावित करता है। इसके अलावा, इसमें निष्पक्षता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर समानता प्रभाव मूल्यांकन करने की भी बात कही गई है। इस विधेयक में एआई को अमलीजामा पहनाने में डेटा पूर्वाग्रह से निपटने के लिए व्यापक दिशानिर्देश बनाने की बात भी कही गई है। इसमें एल्गोरिदम में पारदर्शिता की आवश्यकता, अनिवार्य ट्रेनिंह और डेटासेट के भीतर पूर्वाग्रहों का पता लगाने और उन्हें सुधारने के लिए उचित कदम उठाने की वकालत की गई है।
इसके अलावा, नूर ने 'डीपफेक' पर एक और बिल सूचीबद्ध किया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से डीपफेक पर प्रबिबंध लगाने की बात कही गई है। विधेयक में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, जो परेशान करने, या अपमानित करने, या हिंसा या शारीरिक नुकसान पहुंचाने के इरादे से डीपफेक बनाता है, वितरित करता है, प्रसारित करता है या साझा करता है, तो वह एक आपराधिक अपराध का दोषी होगा। इसके साथ ही इसमें राष्ट्रीय स्तर पर डीपफेक पर प्रतिबंध और डिजिटल प्रामाणिकता टास्क फोर्स के गठन की मांग की गई है।