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प्राथमिकता रहेगी कि एनआरसी के दायरे से कोई असल नागरिक न रह जाए बाहर : महापंजीयक
भाषा, नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Aug 2018 07:45 PM IST
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राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे से 40 लाख लोगों को बाहर रखने पर जारी विवाद के बीच देश के शीर्ष जनगणना अधिकारी ने आज कहा कि ‘‘तकनीकी पक्ष” के कारण आखिरी सूची से कोई भी भारतीय छूटेगा नहीं और जो छूट गए हैं उनकी चिंताओं से अधिकारी अवगत हैं।
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भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त शैलेश ने पीटीआई-भाषा को एक साक्षात्कार में बताया कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी के लिए आवेदन प्रक्रिया के संबंध में ‘‘सूचना एवं जानकारी” की कमी की वजह से दूसरे और अंतिम मसौदे में कुछ नाम छूट गए होंगे जो 30 जुलाई को प्रकाशित हुआ था।
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उन्होंने कहा,“ये बातें हमारे लिए भी चिंता का विषय हैं और हम यह सुनिश्चत करना चाहते हैं कि कोई भी भारतीय नागरिक तकनीकी पक्षों की वजह से छूट न जाए। कुछ ऐसे मामले हो सकते हैं जहां सूचना एवं सशक्तिकरण की कमी की वजह से एक व्यक्ति के पास से कुछ कागजात गुम हो गए हों लेकिन अगर कोई वास्तव में भारतीय नागरिक है तो उसे बेफिक्र रहना चाहिए।”
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शैलेश से जब कुछ परिवारों के कुछ सदस्यों और महत्त्वपूर्ण लोगों के नाम छूट जाने की खबरों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा,“हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एक वास्तविक नागरिक को आवश्यक दस्तावेज मिलें।’’ असम कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी ने कहा कि वह इन मुद्दों से अवगत हैं। शैलेश ने कहा, “हम मुद्दों के प्रति संवेदनशील हैं। अगर कुछ व्यक्तियों द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों में छोटी सी भी गलती है तो उसको सही कराने का तरीका उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि 30 अगस्त से शुरू हो रही दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान एनआरसी अधिकारियों की प्राथमिकताओं में लोगों की शिकायत सुनना, जरूरतमंदों एवं अशिक्षित लोगों को सहयोग देना और पूरी प्रक्रिया समझाने के लिए सोशल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर एक गहन जागरुकता अभियान शुरू करना शामिल है।