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यूपी सरकार के कामकाज पर होगी पीएम के प्रधान सचिव की सीधी नजर
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
Updated Tue, 21 Mar 2017 06:19 AM IST
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यूपी के शासकीय कामकाज पर पीएम मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र की सीधी नजर रहेगी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय उनके लिए योग्य प्रशासनिक अधिकारियों की फौज खड़ी करने में अहम भूमिका निभाएगा।
सूत्र बताते हैं कि योगी के अधिकारियों की नियुक्ति नृपेंद्र मिश्र की देखरेख में होगी। योगी के पांव जमने तक मिश्र को यूपी में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखने के काम में लगाया गया है। वह योगी के शपथ ग्रहण समारोह 19 मार्च से एक दिन पहले ही लखनऊ पहुंच गए थे। उन्हीं की देखरेख में योगी के शपथग्रहण समारोह का आयोजन हुआ।
लखनऊ में नृपेंद्र मिश्र की उपस्थिति को देख उन्हें पीएमओ से यूपी भेजे जाने की सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, मिश्र जैसे पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी को यूपी के काम में लगाने के अहम सियासी मायने हैं।
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योगी को इससे न सिर्फ प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। बल्कि सरकार को पीएम मोदी का यूपी प्लान तेजी से आगे बढ़ाने में भरपूर मदद मिलेगी। रविवार को मिश्र की योगी के साथ अलग से करीब 45 मिनट की बैठक भी हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि योगी पर प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर उठ रहे सवालों को दूर करने के लिए पीएम मोदी की ओर से नृपेंद्र मिश्र को यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच समन्वय का काम देखने को कहा जा सकता है।
यूपी में ऐतिहासिक जनादेश आने के बाद से 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए मोदी का जोर जनता से किए वायदों को जल्द से जल्द पूरा करने पर है। इस प्रयास में ब्यूरोक्रेसी कहीं रोड़ा न बने इसलिए नृपेंद्र को यूपी के प्रशासनिक कामकाज से जोड़ा जा सकता है।
ताकि ब्यूरोक्रेसी में योगी की राह आसान बन सके। मिश्र यूपी कैडर के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया था। अब वे योगी के साथ यूपी में भी भूमिका निभा सकते हैं।
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सूत्र बताते हैं कि योगी के अधिकारियों की नियुक्ति नृपेंद्र मिश्र की देखरेख में होगी। योगी के पांव जमने तक मिश्र को यूपी में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखने के काम में लगाया गया है। वह योगी के शपथ ग्रहण समारोह 19 मार्च से एक दिन पहले ही लखनऊ पहुंच गए थे। उन्हीं की देखरेख में योगी के शपथग्रहण समारोह का आयोजन हुआ।
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लखनऊ में नृपेंद्र मिश्र की उपस्थिति को देख उन्हें पीएमओ से यूपी भेजे जाने की सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, मिश्र जैसे पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी को यूपी के काम में लगाने के अहम सियासी मायने हैं।
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योगी को इससे न सिर्फ प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। बल्कि सरकार को पीएम मोदी का यूपी प्लान तेजी से आगे बढ़ाने में भरपूर मदद मिलेगी। रविवार को मिश्र की योगी के साथ अलग से करीब 45 मिनट की बैठक भी हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि योगी पर प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर उठ रहे सवालों को दूर करने के लिए पीएम मोदी की ओर से नृपेंद्र मिश्र को यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच समन्वय का काम देखने को कहा जा सकता है।
यूपी में ऐतिहासिक जनादेश आने के बाद से 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए मोदी का जोर जनता से किए वायदों को जल्द से जल्द पूरा करने पर है। इस प्रयास में ब्यूरोक्रेसी कहीं रोड़ा न बने इसलिए नृपेंद्र को यूपी के प्रशासनिक कामकाज से जोड़ा जा सकता है।
ताकि ब्यूरोक्रेसी में योगी की राह आसान बन सके। मिश्र यूपी कैडर के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया था। अब वे योगी के साथ यूपी में भी भूमिका निभा सकते हैं।