BS Yediyurappa Resignation: येदियुरप्पा के इस्तीफे के बहाने अपना संदेश देने में कामयाब रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
येदियुरप्पा के इस्तीफा देने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को एक बार फिर सकारात्मक संदेश देने में कामयाब हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने ही सक्रिय राजनीति में 75 साल की आयु को उपयुक्त माना है। प्रधानमंत्री ने संदेश दे दिया है कि भाजपा अपनी रीतियों, नीतियों से कोई समझौता नहीं करती...
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संसद भवन में 26 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा काफी व्यस्त रहे। गृहमंत्री के सचिवालय की गंभीरता से लग रहा था कि कोई बड़ा ऑपरेशन चल रहा है। थोड़ी देर बाद खबर आई कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा राज्यपाल थावर चंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंपने जा रहे हैं। कुछ ही समय बाद येदियुरप्पा ने पद से इस्तीफा देकर मीडिया को भी इसकी जानकारी दे दी। इस पूरे प्रकरण को भाजपा के कई शीर्ष नेता दिल्ली में बैठकर टीवी स्क्रीन पर देख रहे थे। जबकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और नड्डा इसके आगे की रणनीति पर विचार कर रहे थे।
येदियुरप्पा के इस्तीफा देने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को एक बार फिर सकारात्मक संदेश देने में कामयाब हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने ही सक्रिय राजनीति में 75 साल की आयु को उपयुक्त माना है। येदियुरप्पा इस समय 78 साल के हैं। वह जब मुख्यमंत्री बने थे, तब भी इस आयुसीमा पर काफी चर्चा हुई थी। इस तरह से प्रधानमंत्री ने संदेश दे दिया कि भाजपा अपनी रीतियों, नीतियों से कोई समझौता नहीं करती।
असंतोष के साथ-साथ इस्तीफा देने का कयास पहले से था
मीडिया और सोशल मीडिया में कर्नाटक के मुख्यमंत्री से इस्तीफा लिए जाने की खबर काफी पहले से आ रही थी। इस्तीफा दे चुके बीएस येदियुरप्पा यह भले ही कहें इस्तीफा देने के लिए उन पर केंद्रीय नेतृत्व का कोई दबाव नहीं था, लेकिन भाजपा के अंदरखाने की राजनीति कुछ और चुगली कर रही है। प्रधानमंत्री से पिछले दिनों भेंट के बाद ही तय हो गया था कि उन्हें पद छोडऩे के लिए कह दिया गया है। इसके कई कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि येदियुरप्पा 78 साल के हो चुके हैं। जब वह कर्नाटक के दो साल पहले मुख्यमंत्री बने थे तब भी वह 75 साल की उम्र पार कर चुके थे। दूसरा बड़ा कारण कर्नाटक में युवा, वरिष्ठ नेताओं की येदियुरप्पा को लेकर बढ़ रही नाराजगी थी। येदियुरप्पा को कर्नाटक में कमल खिलाने वाले नेताओं में गिना जाता है। प्रधानमंत्री से उनकी नजदीकी है, येदियुरप्पा इसी के साथ अपने तरीके से कर्नाटक की सरकार चला रहे थे। वह पार्टी के सांसदों, मंत्रियों, सहयोगियों, नेताओं तथा कार्यकर्ताओं में तालमेल तथा कामकाजी वातारण बनाने में चूक गए।
कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की सलाह पर
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व येदियुरप्पा के इस्तीफा देने के बाद कर्नाटक के घटनाक्रम पर तेजी से नजर रख रहा है। भाजपा नेतृत्व कर्नाटक में लिंगायत समुदाय में अच्छा प्रभाव रखने वाले येदियुरप्पा को नाराज नहीं करना चाहता। इसलिए मुख्यमंत्री का पद छोड़ने से पहले जहां अपने हितों को लेकर येदियुरप्पा ने कुछ शर्तें मनवाईं और उन पर भरोसा पाया है, वहीं केंद्रीय नेतृत्व भी राज्य में किसी तरह का राजनीतिक गतिरोध पैदा करने के मूड में नहीं है। येदियुरप्पा की कई मांगों में एक मांग अपने बेटे बीवाई विजयेन्द्र के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी है। बीवाई विजयेन्द्र कर्नाटक में भाजपा के नेता हैं और पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव में येदियुरप्पा की सलाह को महत्व दिया जा सकता है और येदियुरप्पा के बेटे विजयेन्द्र को राज्य सरकार में सम्मानजनक जगह मिल सकती है।