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मन की बात के 50वें एपिसोड में बोले पीएम, रेडियो कार्यक्रम की यात्रा जारी रहेगी

Sun, 25 Nov 2018 11:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Nov 2018 11:04 AM IST
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Prime Minister Narendra Modi is addressing nation for the 50th time through Mann ki Baat
नरेंद्र मोदी - फोटो : PMO Twitter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर यानी रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से 'मन की बात' की। आज इस कार्यक्रम के 50 एपिसोड पूरे हो गए हैं। इसके लिए पीएम ने देशवासियों और मीडिया को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों वह रेडियो के जरिए हर महीने लोगों को संबोधित करते हैं। इसके लिए उन्होंने एक कहानी सुनाई जिसके जरिए उन्होंने रेडियो के प्रभाव से लोगों को रूबरू करवाया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत का मूल-प्राण राजनीति या राजशक्ति नहीं बल्कि समाजनीति और समाज-शक्ति है तथा ऐसे में सब कुछ ‘राजनीति’ हो जाना, स्वस्थ समाज के लिए एक अच्छी व्यवस्था नहीं है। आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि जब ‘मन की बात’ शुरू हुई थी तभी उन्होंने तय किया था कि न तो इसमें राजनीति हो, न ही इसमें सरकार की वाहवाही हो और न ही इसमें कहीं मोदी हो। उन्होंने कहा कि उनके इस संकल्प के लिये सबसे बड़ा संबल, सबसे बड़ी प्रेरणा लोगों से मिली। 
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प्रधानमंत्री ने मन की बात के 50वें एपिसोड को संबोधित करते हुए अपने कुछ व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मोदी आएगा और चला जाएगा, लेकिन यह देश अटल रहेगा, हमारी संस्कृति अमर रहेगी। 130 करोड़ देशवासियों की छोटी-छोटी यह कहानियाx हमेशा जीवित रहेंगी और देश को नयी प्रेरणा तथा उत्साह से नयी ऊंचाइयों पर ले जाती रहेंगी।’ 
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उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के 50वें एपिसोड की सबसे बड़ी सिद्धि यही है कि आप प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि अपने एक निकटतम साथी से सवाल पूछ रहे हैं। ‘यही तो लोकतंत्र है।’ मोदी ने कहा, ‘कभी-कभी ‘मन की बात’ का मजाक भी उड़ता है लेकिन मेरे मन में हमेशा ही 130 करोड़ देशवासी बसे रहते हैं। उनका मन मेरा मन है। ‘मन की बात’ सरकारी बात नहीं है- यह समाज की बात है। ‘मन की बात’ एक महत्वाकांक्षी भारत की बात है।’ 

उन्होंने कहा कि भारत का मूल-प्राण राजनीति नहीं है, भारत का मूल-प्राण राजशक्ति भी नहीं है। भारत का मूल-प्राण समाजनीति है और समाज-शक्ति है। समाज जीवन के हजारों पहलू होते हैं और उनमें से ही एक पहलू राजनीति भी है। राजनीति सबकुछ हो जाए, यह स्वस्थ समाज के लिए एक अच्छी व्यवस्था नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी-कभी राजनीतिक घटनाएं और राजनीतिक लोग, इतने हावी हो जाते हैं कि समाज की अन्य प्रतिभाएँ और अन्य पुरुषार्थ दब जाते हैं। भारत जैसे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए जन-सामान्य की प्रतिभाओं, पुरुषार्थ को उचित स्थान मिले, यह हम सबका एक सामूहिक दायित्व है और ‘मन की बात’ इस दिशा में एक नम्र एवं छोटा सा प्रयास है।

Prime Minister Narendra Modi is addressing nation for the 50th time through Mann ki Baat
नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

‘मन की बात’ कार्यक्रम में आए लोगों के पत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे जब भी कोई पत्र पढ़ते हैं तो पत्र लिखने वाले की परिस्थिति, उनके भाव.. विचार का हिस्सा बन जाते हैं। वह पत्र सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं रहता। मोदी ने कहा कि कि उन्होंने करीब 40-45 साल अखंड रूप से एक परिव्राजक का जीवन जिया, देश के अधिकतर जिलों में गये और दूर-दराज के इलाकों में बहुत समय भी बिताया है। यही वजह है कि जब वे पत्र पढ़ते हैं तो वे उस स्थान और सन्दर्भ से खुद को आसानी से जोड़ लेते हैं। 

मीडिया का शुक्रिया अदा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह आकाशवाणी, एफ़.एम. रेडियो, दूरदर्शन, अन्य टीवी चैनल, सोशल मीडिया को भी धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, मादक पदार्थ मुक्त भारत, सेल्फी विद डॉटर जैसे कई विषयों को नवोन्मेषी तरीके से एक अभियान का रूप देकर आगे बढ़ाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ ने लोगों की बातों को एक सूत्र में पिरोकर कर हल्की-फुल्की बातें करते-करते 50 एपिसोड का सफ़र तय कर लिया। हाल ही में आकाशवाणी द्वारा ‘मन की बात’ पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि औसतन 70 प्रतिशत लोग नियमित ‘मन की बात’ सुनते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि ‘मन की बात’ का सबसे बड़ा योगदान ये है कि इससे समाज में सकारात्मकता की भावना बढ़ी है।

अंत में पीएम मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, 50 एपिसोड के बाद हम फिर एक बार मिलेंगे अगले ‘मन की बात’ में। मुझे विश्वास है कि आज ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के पीछे की भावनाओं को मुझे पहली बार आपके समक्ष कहने का मौका मिला क्योंकि आप लोगों ने ऐसे ही सवाल पूछे लेकिन हमारी यात्रा जारी रहेगी। आपका साथ जितना ज्यादा जुड़ेगा, उतनी यात्रा हमारी और गहरी होगी और हर किसी को संतोष देनेवाली मिलेगी।

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