फ्रांस में हो सकती है ट्रंप-मोदी की बीच मुलाकात, कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश से भारत खफा
तीसरी बार अलापा मध्यस्ता का राग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरी बार कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का राग अलापा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कहकर दुनिया को चौंकाया है कि कश्मीर पर जो बेहतर होगा, वह करेंगे। एक तरह से राष्ट्रपति ने इस बार सीधे मध्यस्थता करने की मंशा जाहिर कर दी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति का यह हस्तक्षेप भारत को नागवार गुजरा है। पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप ने मध्यस्थता की बात कही थी, जिसके बाद भारत ने कड़ा एतराज जताया था।
वाशिंगटन ने भी तब भारत के पक्ष में बयान दिया था और भारत और पाकिस्तान से द्विपक्षीय स्तर पर हल करने के संबंध में बयान दिया था। अमेरिकी राजनयिकों ने इसके समाधान के लिए शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र के तहत बातचीत का सुझाव दिया था। इसके कुछ दिन बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर मध्यस्थता का राग अलापा। तीसरी बार राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री इमरान खान से टेलीफोन पर बातचीत के बाद ट्वीट कर पेशकश की। राजनयिक गलियारों में ट्रंप की इस टिप्पणी को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।
अन्य मसलों पर भी हो सकती है बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 25 अगस्त को होने वाली संभावित बातचीत में कश्मीर पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। पहली बार राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्वीट में कश्मीर में हिन्दू और मुसलमान दोनों का जिक्र करके ट्वीट किया है। भारतीय कूटनीतिक गलियारे में इसे बहुत अच्छा नहीं माना जा रहा है। समझा जा रहा है कि ट्रंप से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद और घुसपैठ का मुद्दा भी उठा सकते हैं। इसके अलावा दोनों शिखर नेताओं के बीच आपसी सहयोग, व्यापार, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश तथा सहयोग, सामरिक साझेदारी समेत अन्य मसलों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
शिमला समझौते और लाहौर घोषणा पत्र से सुलझाएं मुद्दे
मेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर इसे सख्त लफ्जों में स्पष्ट कर चुके हैं। चीन यात्रा के दौरान उन्होंने अपने चीन के समकक्ष के साथ भी इसी लाइन को दोहराया था और अमेरिका के राष्ट्रपति का पहली बार मध्यस्थता से जुड़ा बयान आने पर विदेश मंत्री ने साफ कहा था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और वैधानिक स्थिति में बदलाव भारत का आंतरिक मामला है। भारत का साफ कहना है कि उसे जम्मू-कश्मीर के मामले में किसी भी तीसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था की मध्यस्थता स्वीकार नहीं है। भारत और पाकिस्तान दोनों शिमला समझौते और लाहौर घोषणा पत्र से बंधे हैं और आपसी मुद्दे का समाधान इसके जरिए ही उचित है।
अनुच्छेद 370 पर कई देशों ने दिया साथ
फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, बांग्लादेश समेत तमाम देशों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 की वापसी और जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव को भारत का आंतरिक मामला माना है। अमेरिकी राजनयिकों ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला माना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कहना है कि उसके इस कदम से जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति प्रभावित नहीं हुई है। ऐसे में दुनिया भर के देशों की निगाह 25 अगस्त को फ्रांस में होने वाली बैठक पर टिकी हैं।