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महंगाई की मार: अब दवाएं भी होंगी महंगी, 10 फीसदी तक बढ़ेंगे बीपी, शुगर और एंटीबायोटिक दवाओं के दाम!

Tue, 15 Mar 2022 03:35 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Tue, 15 Mar 2022 03:35 PM IST
सार

दवा कंपनियों का कहना है कि 2016 में तो दवा कंपनियों को अधिसूचित दवाओं की कीमतें घटानी पड़ी थीं, क्योंकि कैलेंडर वर्ष 2015 में पिछले वर्ष की तुलना में डब्ल्यूपीआई में 2.71 फीसदी कमी आ गई थी। इस वर्ष डब्ल्यूपीआई के आधार पर एनएलईएम दवाओं के दाम में 10 फीसदी तक वृद्धि की इजाजत दे सकता है...

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Prices of notified drugs may increase by up to 10 per cent from April, national drug price regulator Wholesale Price Index may allow hike
दवाएं होंगी महंगी - फोटो : istock

विस्तार

तेल, दाल और ईंधन के बाद अब देश में दवाएं भी महंगी होने जा रही हैं। अप्रैल से अधिसूचित दवाओं के करीब 10 फीसदी तक दाम बढ़ सकते हैं। राष्ट्रीय दवा मूल्य नियामक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में हुए बदलाव अधिसूचित दवाओं की कीमतें बढ़ाने की इजाजत दे सकता है। अधिसूचित दवाएं आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) में आती हैं। इनमें एंटीबायोटिक, विटामिन, शुगर, ब्लड प्रेशर सहित अन्य दवाएं शामिल हैं। देश में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का दवा बाजार होता है। इसमें अधिसूचित दवाओं की हिस्सेदारी 18 फीसदी तक है।

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अमर उजाला को मिली जानकारी के मुताबिक देश में अधिसूचित दवाओं का मूल्य सरकार तय करती है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) 2013 के औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश के दायरे में आने वाली दवाओं का मूल्य निर्धारित करता है। प्राधिकरण हर साल मार्च में नियामक थोक महंगाई को देखकर ये तय करता है कि दवा कंपनियां दाम कितने फीसदी तक बढ़ा सकती है। इसमें एंटीबायोटिक, विटामिन, मधुमेह, रक्तचाप नियंत्रक सहित अन्य दवाएं आती हैं। दवा कंपनियां गैर-अधिसूचित दवाओं के दाम हर साल 10 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं। बढ़ी हुई कीमतें प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल से प्रभावी होती हैं। गैर-अधिसूचित दवाएं मूल्य नियंत्रण के दायरे में नहीं आती हैं।
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दवा उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि मार्च में थोक महंगाई देखकर एनपीपीए दवाएं के मूल्य तय करता है। जनवरी 2022 में थोक मूल्य महंगाई 12.96 फीसदी थी जो जनवरी 2021 में 2.51 फीसदी थी। हाल ही में डब्ल्यूपीआई में हुए बदलाव के आधार पर एनपीपीए अधिसूचित दवाओं की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी की अनुमति दे सकता है। अगर इस वर्ष अप्रैल में अधिसूचित दवाओं की कीमतें बढ़ती है, तो यह डीपीसीओ 2013 के बाद से दाम में सबसे बड़ा इजाफा होगा। दरअसल, हमें हर साल 0.5 फीसदी से 4 फीसदी तक दाम बढ़ाने की अनुमति मिलती है, जो अधिकतम होती है। ऐसी करीब 800 दवाएं हैं जो मूल्य नियंत्रण के दायरे में आती हैं। अगर दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ते हैं तो 2013 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब इतना बड़ा इजाफा होगा।
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दवा कंपनियों का कहना है कि 2016 में तो दवा कंपनियों को अधिसूचित दवाओं की कीमतें घटानी पड़ी थीं, क्योंकि कैलेंडर वर्ष 2015 में पिछले वर्ष की तुलना में डब्ल्यूपीआई में 2.71 फीसदी कमी आ गई थी। इस वर्ष डब्ल्यूपीआई के आधार पर एनएलईएम दवाओं के दाम में 10 फीसदी तक वृद्धि की इजाजत दे सकता है, मगर वास्तविक इजाफा इतना नहीं होगा। बाजार में प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से कीमतें नियंत्रित में रहेंगी।

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