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फिल्म पुरस्कार वितरण विवाद: राष्ट्रपति कोविंद नहीं बदलेंगे एक घंटे वाला नियम

Wed, 09 May 2018 01:40 AM IST
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली 
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Wed, 09 May 2018 01:40 AM IST
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President Ram Nath Kovind will not change one hour rule in any condition

राष्ट्रपति द्वारा अपने हाथ से सभी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं देने पर उठे विवाद के बावजूद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सार्वजनिक समारोहों को एक घंटे का समय देने के अपने नियम में कोई तब्दीली नहीं करेंगे। इसकी वजह उनका हद से ज्यादा व्यस्त कार्यक्रम बताया जा रहा है। वे खुद को रिबन काटने और पुरस्कार वितरण करने तक सीमित नहीं रखना चाहते हैं।

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राष्ट्रपति देश के 140 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति यानी चांसलर होने के नाते उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वे नए विश्वविद्यालयों को पुरानी यूनिवर्सिटी के स्तर तक लाने के लिए उन्हें छह-छह के समूहों में बांट कर उनके वीसी के साथ बैठक कर रहे हैं।
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इन बैठकों में मानव संसाधन विकास मंत्री व सरकार के कई प्रतिनिधि रहते हैं। वे हर वाइस चांसलर से समस्या समझ कर उसका निदान करते हैं। वे हर समूह के साथ साल में कम से कम दो बार जरूर मिल रहे हैं। जबकि उनके पूर्ववर्ती साल में केवल एक बार सभी 140 वीसी को भोजन पर बुलाते थे।

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एक साल में 29 राज्य, 10 देशों का दौरा

President Ram Nath Kovind will not change one hour rule in any condition
कोविंद 10 मई को सैनिकों से मिलने सियाचिन जा रहे हैं। डा. अब्दुल कलाम के बाद ऐसा करने वाले वे दूसरे राष्ट्रपति होंगे। 13 मई को वे राजस्थान की यात्रा पर होंगे। पिछले दस महीने में यह 24वां राज्य होगा, जिसकी वे यात्रा करेंगे। 

उन्हें उम्मीद है कि 25 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में एक साल पूरा होने तक देश के सभी 29 राज्यों का दौरा पूरा कर लेंगे। उनके पूर्ववर्ती पांच वर्षों में 11-12 राज्यों का दौरा ही करते थे। इसी तरह पिछले दस महीनों में ही कोविंद सात देशों का दौरा कर चुके हैं। जबकि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पांच साल में 14 देशों की यात्राएं की थी और प्रणव मुखर्जी ने 21 देशों की।

क्या था विवाद
राष्ट्रपति कोविंद एक घंटे के नियम के चलते उन्होंने कुल 130 फिल्म पुरस्कारों में से केवल 11 पुरस्कार अपने हाथों से दिए थे। शेष सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने बांटे थे। इसी से नाराज होकर साठ कलाकारों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था। सूत्रों के अनुसार इस विवाद से राष्ट्रपति नाराज हैं। उनका मानना है जब प्रोटोकॉल के बारे में सूचित कर दिया गया था, तो सूचना प्रसारण मंत्रालय ने उचित कदम क्यों नहीं उठाए।

पूर्व राष्ट्रपतियों के लिए भी एकसाथ डेढ़ सौ पुरस्कार दे पाना आसान नहीं था
डेढ़-दो सौ लोगों को एक साथ पुरस्कार दे पाना पूर्व राष्ट्रपतियों के लिए भी आसान नहीं था। कई ने आपत्ति भी जताई। प्रतिभा पाटिल ने बीमारी के चलते एक साल पुरस्कार बांटे ही नहीं, तो प्रणब मुखर्जी ने बीच में एक ब्रेक भी लिया था।
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