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सरोगेसी कानून: अब नहीं हो सकेगा किराए की कोख का कारोबार, राष्ट्रपति ने नए कानून को दी मंजूरी

Mon, 27 Dec 2021 03:49 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 27 Dec 2021 03:49 AM IST
सार

सरोगेसी कानून के जरिये बच्चे पैदा करके उसे बेचने, वेश्यावृति कराने और किसी अन्य प्रकार के शोषण पर रोक लगेगी।

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President Ram Nath Kovind has given assent to the Surrogacy Regulation Act 2021
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किराये की कोख या सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने इसे शनिवार को मंजूरी दी और गजट प्रकाशन के साथ ही यह कानून लागू हो गया है। इस कानून में सरोगेसी को वैधानिक मान्यता देने और इसके व्यवसायीकरण को गैरकानूनी बनाने का प्रावधान है।

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इस कानून से सरोगेसी के वाणिज्यिक पैमाने पर दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा। इसके जरिये केवल मातृत्व प्राप्त करने के लिए सरोगेसी की अनुमति मिलेगी, जिसमें सरोगेट मां को गर्भ की अवधि के दौरान चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज के अलावा कोई और वित्तीय मुआवजा नहीं मिलेगा।
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दरअसल व्यावसायिक स्तर पर सरोगेसी का आर्थिक लाभ अथवा कोई अन्य लाभ के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था। सरोगेसी की अनुमति तब दी जाती है जब संतान का इच्छुक जोड़ा चिकित्सा के आधार पर प्रमाणित बांझपन से प्रभावित हो। इस कानून के जरिये बच्चे पैदा करके उसे बेचने, वेश्यावृति कराने और किसी अन्य प्रकार के शोषण पर रोक लगेगी।
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क्या है सरोगसी
सरोगेसी एक ऐसी विधि है, जिसमें कोई महिला संतान के इच्छुक किसी जोड़े के बच्चे को अपने गर्भ में पालती है और जन्म के बाद इस बच्चे को जोड़े को सौंप देती है। इससे पहले उस जोड़े के शुक्राणु और अंडाणु को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है और जब यह एक भ्रूण के रूप में आ जाता है, तो इसे उस महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।


कानून के प्रावधान के मुताबिक 23 से 50 साल उम्र की महिलाएं सरोगेसी का रास्ता चुन सकती हैं। सरोगेट मां बनने के लिए महिला को विवाहित होना चाहिए।

संसद से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2019 को 17 दिसंबर को राज्यसभा से पारित करा लिया गया था। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही सदन ने इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। लोकसभा में यह  पहले ही पारित हो चुका था। लेकिन राज्यसभा में आने के बाद इसे प्रवर समिति को भेजा गया था।

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