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Indian Rice Congress: राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा- चावल खाद्य सुरक्षा का आधार, अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण
Sun, 12 Feb 2023 02:10 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटक
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 12 Feb 2023 02:10 AM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि धान की पारंपरिक किस्मों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हमें एक ओर पारंपरिक किस्मों का संरक्षण करना है और दूसरी तरफ पारिस्थितिक संतुलन भी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से बचाने की चुनौती भी है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
- फोटो : ANI
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को ओडिशा के कटक स्थित राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में द्वितीय भारतीय चावल कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि चावल भारत में खाद्य सुरक्षा का आधार है और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी एक प्रमुख कारक है। राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि भारत आज चावल का अग्रणी उपभोक्ता और निर्यातक है, लेकिन जब देश आजाद हुआ तो स्थिति अलग थी। उन दिनों हम अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर थे। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र उस निर्भरता को दूर कर सका और सबसे बड़ा निर्यातक बना, तो इसका बहुत श्रेय राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान को जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि धान की फसल के लिए अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन दुनिया के कई हिस्से जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं। सूखा, बाढ़, चक्रवात अब अधिक आते हैं, जिससे चावल की खेती जोखिम भरी हो गई है।
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि धान की पारंपरिक किस्मों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हमें एक ओर पारंपरिक किस्मों का संरक्षण करना है और दूसरी तरफ पारिस्थितिक संतुलन भी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से बचाने की चुनौती भी है। मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे उर्वरकों पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक पर्यावरण के अनुकूल चावल उत्पादन प्रणाली विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं।
उच्च प्रोटीन चावल का हुआ विकास
राष्ट्रपति ने कहा कि चावल हमारी खाद्य सुरक्षा का आधार है, इसलिए इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए। चावल के जरिये प्रोटीन, विटामिन व आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने से कुपोषण से निपटने में मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में देश का पहला उच्च प्रोटीन चावल विकसित करने पर उन्होंने कहा कि इस तरह की जैव-फोर्टिफाइड किस्मों का विकास आदर्श है।
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राष्ट्रपति ने लिंगराज मंदिर में की पूजा-अर्चना
भुवनेश्वर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने ओडिशा दौरे के दूसरे दिन शनिवार को यहां 11वीं सदी के प्रसिद्ध श्री लिंगराज मंदिर में पूजा-अर्चना की। बेटी इतिश्री मुर्मू के साथ, राष्ट्रपति कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर पहुंचीं। इस दौरान उनकी एक झलक पाने के लिए बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। मुर्मू करीब 40 मिनट तक मंदिर में रहीं। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल गणेशी लाल भी मौजूद थे।
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रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि धान की पारंपरिक किस्मों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हमें एक ओर पारंपरिक किस्मों का संरक्षण करना है और दूसरी तरफ पारिस्थितिक संतुलन भी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से बचाने की चुनौती भी है। मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे उर्वरकों पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक पर्यावरण के अनुकूल चावल उत्पादन प्रणाली विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं।
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उच्च प्रोटीन चावल का हुआ विकास
राष्ट्रपति ने कहा कि चावल हमारी खाद्य सुरक्षा का आधार है, इसलिए इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए। चावल के जरिये प्रोटीन, विटामिन व आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने से कुपोषण से निपटने में मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में देश का पहला उच्च प्रोटीन चावल विकसित करने पर उन्होंने कहा कि इस तरह की जैव-फोर्टिफाइड किस्मों का विकास आदर्श है।
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राष्ट्रपति ने लिंगराज मंदिर में की पूजा-अर्चना
भुवनेश्वर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने ओडिशा दौरे के दूसरे दिन शनिवार को यहां 11वीं सदी के प्रसिद्ध श्री लिंगराज मंदिर में पूजा-अर्चना की। बेटी इतिश्री मुर्मू के साथ, राष्ट्रपति कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर पहुंचीं। इस दौरान उनकी एक झलक पाने के लिए बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। मुर्मू करीब 40 मिनट तक मंदिर में रहीं। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल गणेशी लाल भी मौजूद थे।