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समाज ताकतवर होगा तो भाषा भी ताकतवर होगी : राष्ट्रपति
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 17 Sep 2018 09:41 PM IST
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि समाज ताकतवर होगा तो भाषा भी ताकतवर होगी। विश्व हिन्दी सम्मेलन के क्रम में हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हिन्दी सेवियों को सम्मान, शुभकामना और बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भाषा और संस्कृति से आत्म गौरव बढ़ता है। राष्ट्रपति ने कहा कि भाषाविदों का सम्मान, देश का सम्मान है। विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने छह में से पांच हिन्दी सेवियों को सम्मानित किया।
सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में हिन्दी भाषा के विकास के क्रम में अपना योगदान देने वाले छह लोगों को सम्मानित किया जाना था। ये सभी लोग मारीशस में 18-20 अगस्त को आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन में नहीं जा सके थे। अतएव मंत्रालय ने इनका देश में ही सम्मान करने का निर्णय लिया था। सोमवार को इन छह लोगों में से एक मालती जोशी ने आने में असमर्थता जताई। मंत्रालय ने मालती जोशी को बाद में उनका सम्मान उन्हें देने का निर्णय लिया है। सोमवार को जिन पांच लोगों को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया, उनमें पी श्रीरामकृष्णैय्या, प्रो. रमेश चंद्र शाह, बशीर अहमद बलूची, प्रो. धर्मपाल बनर्जी और ब्रज किशोर शर्मा शामिल थे।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने हिन्दी के विस्तार के लिए तकनीक, मोबाइल एप जैसी विधाओं का सहारा लेने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हम अपनी भाषा को काफी समृद्ध बना सकते हैं। लोगों तक भाषा की पहुंच बना सकते हैं। डिजिटल प्रयोग में हिन्दी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में हिन्दी भाषा के विकास के क्रम में अपना योगदान देने वाले छह लोगों को सम्मानित किया जाना था। ये सभी लोग मारीशस में 18-20 अगस्त को आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन में नहीं जा सके थे। अतएव मंत्रालय ने इनका देश में ही सम्मान करने का निर्णय लिया था। सोमवार को इन छह लोगों में से एक मालती जोशी ने आने में असमर्थता जताई। मंत्रालय ने मालती जोशी को बाद में उनका सम्मान उन्हें देने का निर्णय लिया है। सोमवार को जिन पांच लोगों को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया, उनमें पी श्रीरामकृष्णैय्या, प्रो. रमेश चंद्र शाह, बशीर अहमद बलूची, प्रो. धर्मपाल बनर्जी और ब्रज किशोर शर्मा शामिल थे।
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समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने हिन्दी के विस्तार के लिए तकनीक, मोबाइल एप जैसी विधाओं का सहारा लेने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हम अपनी भाषा को काफी समृद्ध बना सकते हैं। लोगों तक भाषा की पहुंच बना सकते हैं। डिजिटल प्रयोग में हिन्दी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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नहीं आए मनोज तिवारी
विदेश मंत्रालय के इस कार्यक्रम में दिल्ली के सांसद और दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को गीत गाना था। भोजपुरी गायक और अभिनेता के तौर पर प्रसिद्धि पा चुके मनोज तिवारी को यह गीत राष्ट्रपति द्वारा हिन्दी सेवियों को सम्मानित करने से पहले गाना था। लेकिन मनोज तिवारी ने इस कार्यक्रम में शिरकत करने के बजाय विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
बुल्गारिया के राष्ट्रपति गुनगुनाने लगे गीत
राष्ट्रपति ने हिन्दी प्रेम को लेकर दो संस्मरण सुनाए। पहला बुल्गारिया का था। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें मालूम हुआ वहां के राष्ट्रपति को हिन्दी फिल्में अच्छी लगती हैं। इसलिए वह उनके लिए अपने साथ 25 हिन्दी फिल्मों का कैसेट लेते गए, जो उन्हें बहुत पसंद आए। इस दौरान राष्ट्रपति ने जैसे ही उनसे हाथी मेरे साथी फिल्म का जिक्र किया, बुल्गारिया के राष्ट्रपति इस फिल्म का गीत गुनगुनाने लगे। राष्ट्रपति ने बताया कि बुल्गारिया में उनकी यात्रा के दौरान फिल्म ब्रह्मा की शूटिंग चल रही थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन अभिनय कर रहे थे। जब राष्ट्रपति कोविंद ने बुल्गारिया के राष्ट्रपति के सामने शूटिंग देखने का प्रस्ताव रखा तो वह सहर्ष तैयार हो गए। हालांकि, यह प्रस्तावित कार्यक्रम में नहीं था। दोनों देशों के राष्ट्रपति ने रात 10.30 बजे जाकर फिल्म की शूटिंग देखी और लोगों से मिले।
राष्ट्रपति कोविंद ने दूसरा अनुभव चेक रिपब्लिक का बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि वहां उनका स्वागत चार विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया। यह सबसे गौरवान्वित होने वाली बात थी, क्योंकि चारो छात्रों ने हिन्दी, संस्कृत, बांग्ला और तमिल भाषा में उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह काफी अच्छा लगा। हमें भाषा, संस्कृति का सॉफ्ट पॉवर उपयोग में लाना चाहिए। इससे लोगों को कनेक्ट करने और उनसे कनेक्ट होने में आसानी होती है।
राष्ट्रपति कोविंद ने दूसरा अनुभव चेक रिपब्लिक का बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि वहां उनका स्वागत चार विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया। यह सबसे गौरवान्वित होने वाली बात थी, क्योंकि चारो छात्रों ने हिन्दी, संस्कृत, बांग्ला और तमिल भाषा में उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह काफी अच्छा लगा। हमें भाषा, संस्कृति का सॉफ्ट पॉवर उपयोग में लाना चाहिए। इससे लोगों को कनेक्ट करने और उनसे कनेक्ट होने में आसानी होती है।