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ओडिशा दौरा: राष्ट्रपति कोविंद बोले- मानवता को जाति के आधार पर नहीं बांटा जा सकता, जानें उनके दौरे के बारे में सबकुछ

Sun, 20 Feb 2022 04:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला,पुरी
न्यूज डेस्क अमर उजाला,पुरी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 20 Feb 2022 04:09 PM IST
सार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को पुरी में में गौड़ीय मठ और मिशन के संस्थापक श्रीमद् भक्ति सिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद की 150वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मानवता और सच्चाई को जाति, लिंग या धर्म के आधार पर विभाजित नहीं किया जा सकता है। 
 

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President Kovind inaugurated the celebrations of the 150th birth anniversary of Srimad Bhakti Siddhanta Saraswati Goswami Prabhupada
रामनाथ कोविंद - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को उड़ीसा के पुरी में कहा कि मानवता और सच्चाई को जाति, लिंग या धर्म के आधार पर विभाजित नहीं किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में हमेशा जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पुरी में गौड़ीय मठ और मिशन के संस्थापक श्रीमद् भक्ति सिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद की 150वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होने कोरोना मुक्त विश्व के लिए महाप्रभु से प्रार्थना भी की।

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इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न धार्मिक परंपराएं और प्रथाएं प्रचलित हैं, लेकिन केवल एक ही मान्यता है और वह संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानकर सभी के कल्याण के लिए कार्य करना है।
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उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मानवता और सत्य सर्वोच्च हैं, जिन्हें विभाजित नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य समाज का कल्याण है।
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डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की जय-जयकार करते हुए उन्होंने कहा कि इन लोगों ने महामारी काल में सेवा भावना को प्रदर्शित किया। जबकि इस काल में कई डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से संक्रमित हुए. कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे कई कोविड योद्धाओं ने इस महामारी के कारण अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन उनके सहकर्मियों का समर्पण अडिग रहा। ऐसे योद्धाओं का पूरा देश हमेशा ऋणी रहेगा।

राष्ट्रपति ने इस मौके पर कहा कि मैं आशा करता हूँ कि गौड़ीय मिशन, मानव कल्याण के अपने उद्देश्य को सर्वोपरि रखते हुए चैतन्य महाप्रभु की वाणी को विश्वभर में प्रसारित करने के अपने संकल्प में सफल होगा। इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने श्री चैतन्य महाप्रभु के आविभार्व के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही उन्होंने भक्त मीराबाई, कबीर एवं सूरदास, संत तुलसी दास, श्रीरामानुजाचार्य, गुरू नानक शंकर देव, नरसी मेहा, नारायण भट्ट, संत तुकाराम, एकनाथ, ज्ञानेश्वर आदि का भी स्मरण किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भक्ति-मार्ग की ईश्वर के प्रति पूर्ण भक्ति की विशेषता न केवल जीवन के आध्यात्मिक पक्ष में बल्कि दैनिक जीवन में भी प्रत्येक व्यक्ति के रूप में देखी जाती है। हमारी संस्कृति में जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। कोरोना के दौरान  यह भावना स्वास्थ्य कर्मियों ने दिखाई।




गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर ओडिशा पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। राष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान रविवार को गौड़ीय मिशन के संस्थापक श्रीमद भक्ति सिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद की 150वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया। 3 दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में देश भर से साधु संतों का समागम हुआ है। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति की पत्नि सविता कोविंद, राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व अन्य कई विशेष लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने एक स्मरणिका का भी विमोचन किया।

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