{"_id":"62df3fe499716241d12c69a3","slug":"president-droupadi-murmu-as-governor-defender-of-tribal-interests","type":"story","status":"publish","title_hn":"President Murmu: राज्यपाल के रूप में राज्य सरकार को कई बार आईना दिखाया मुर्मू ने, लौटाए थे भाजपा सरकार के बिल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
President Murmu: राज्यपाल के रूप में राज्य सरकार को कई बार आईना दिखाया मुर्मू ने, लौटाए थे भाजपा सरकार के बिल
Tue, 26 Jul 2022 06:44 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 26 Jul 2022 06:44 AM IST
सार
जून 2017 को तत्कालीन राज्यपाल मुर्मू (Droupadi Murmu) ने भाजपा सरकार द्वारा भेजे गए दो अहम विधेयकों छोटानागपुर और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम को वापस कर दिया था। इसके अलावा, दुमका में आदिवासी महिला के साथ दुष्कर्म और रांची में खराब कानून व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने राज्य के डीजीपी को तलब कर फटकार लगाई थी।
विज्ञापन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
द्रौपदी मुर्मू आदिवासी हितों की मुखर रक्षक रही हैं। झारखंड में राज्यपाल रहते हुए वे भाजपा की ही रघुवर दास सरकार से भी विरोध जताने से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने रघुवर दास सरकार के उन दो विधेयकों को लौटा दिया था, जिन्हें आदिवासी हितों के खिलाफ माना जा रहा था।
विज्ञापन
जून 2017 को तत्कालीन राज्यपाल मुर्मू ने भाजपा सरकार द्वारा भेजे गए दो अहम विधेयकों छोटानागपुर और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम को वापस कर दिया था। इसके अलावा, दुमका में आदिवासी महिला के साथ दुष्कर्म और रांची में खराब कानून व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने राज्य के डीजीपी को तलब कर फटकार लगाई थी। मुर्मू के कार्यकाल में ही पत्थलगड़ी का विवाद शांत कराने के लिए मुर्मू ने ग्राम प्रधानों और मानकी-मुंडाओं को राजभवन में बुलाकर उनसे बातचीत की थी। ब्यूरो
विज्ञापन
स्वर्ण जड़ित बग्घी नहीं बनी शपथ समारोह का हिस्सा
पारंपरिक स्वर्ण जड़ित बग्घी इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा नहीं रही। निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन से संसद तक लिमोजिन गाड़ी से ले गए। शपथ ग्रहण के बाद मुर्मू कोविंद के साथ ही काले रंग की लिमोजिन कार से राष्ट्रपति भवन पहुंचीं और खुली मारुति जीप पर सवार होकर राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
तीन दशक पहले सुरक्षा कारणों से बग्घी का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था। लेकिन दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2014 में बग्घी की सवारी की फिर से शुरुआत की थी। कोविंद ने 2017 में 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के बाद बग्घी पर सवार होकर गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया था। वायसराय के समय से चली आ रही बग्घी काले रंग की है और इसमें सोने से राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न बना हुआ है। इसे छह घोड़े मिलकर खींचते हैं।
अनुभवी प्रशासक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि "भारतीण गणतंत्र के इतिहास में उल्लेखनीय दिन है। पूरा भरोसा है कि द्रौपदी मुर्मू का विधायी व प्रशासकीय अनुभव देश के लिए काम आएगा।"
गर्व की बात
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि "भारत के इतिहास में ओडिशा के एक दूरस्थ गांव की आदिवासी महिला को देश की राष्ट्रपति बने हुए देखना गर्व का क्षण है।"
देश के लोकतंत्र की रक्षा करेंगी
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि "पूरा भरोसा है कि वे भारत के लोकतंत्र, संविधान और कानून की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी और अपने कार्यकाल के दौरान देश को और अधिक गौरवान्वित करेंगी।"
खरगे को पद के मुताबिक सीट न देने की शिकायत
विपक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के को उनकी गरिमा के अनुरूप सीट न दिए जाने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू से इसकी शिकायत की है। वहीं, राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने विपक्ष के आरोपों का खंडन किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर पर कहा, शपथ समारोह में खरगे को उनके पद के अनुरूप बैठने के लिए स्थान नहीं दिया गया।
ढाई लाख पेंशन, लुटियंस में बंगला...और भी कई रिटायरमेंट लाभ पाएंगे कोविंद
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सोमवार को लुटियंस दिल्ली में जनपथ 12 बंगले में शिफ्ट हो गए। वे बाकी जीवन यहीं रहेंगे। उन्हें 2.5 लाख मासिक पेंशन व अन्य रिटायरमेंट लाभ राष्ट्रपति के लिए बने 1951 के कानून के तहत मिलेंगे। इसमें क्या-क्या शामिल है, पढ़िए -
- पेंशन : पांच लाख मासिक वेतन पाने वाले राष्ट्रपति को कार्यकाल खत्म होने या इस्तीफे के बाद 2.5 लाख रुपये मासिक पेंशन मिलती है।
- आवास : टाइप-8 श्रेणी का बंगला आजीवन मिलता है। 12 जनपथ बंगला सुसज्जित करके दिया गया है। वे 10 जनपथ में रह रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पड़ोसी बनेंगे।
- बाकी सुविधाएं : दो फोन, एक इंटरनेट व ब्रॉडबैंड, एक नेशनल रोमिंग युक्त मोबाइल फोन कनेक्शन, एक कार या कार का भत्ता।
- स्टाफ : एक-एक निजी सचिव, अतिरिक्त निजी सचिव और निजी सहायक व दो चपरासी। एक लाख सालाना कार्यालय भत्ता ।
- यात्राएं व स्वास्थ्य : एक संबंधी या साथी के साथ देश में कहीं भी आने-जाने के लिए रेल, विमान या स्टीमर की सर्वोच्च श्रेणी से यात्रा के पात्र होंगे। निशुल्क स्वास्थ्य व इलाज भी मिलेगा।
- पत्नी के लिए : पत्नी भी पूर्व राष्ट्रपति की पेंशन की 50 प्रतिशत परिवार पेंशन की पात्र। चिकित्सा सुविधाएं, सुसज्जित आवास व रखरखाव, एक-एक निजी सचिव व चपरासी और 20 हजार रुपये सालाना कार्यालय भत्ता भी मिलता है। निशुल्क फोन, कार या कार भत्ता, एक संबंधी या साथी के साथ देश में रेल, विमान या स्टीमर से यात्रा पात्रता।