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प्रशांत भूषण बोले- अन्ना आंदोलन जैसी क्रांति दोबारा हो तो फिर दूंगा साथ

Sat, 05 Jan 2019 01:06 AM IST
अनिल पांडेय अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 05 Jan 2019 01:06 AM IST
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prashant bhushan says If there is a revolution like Anna movement then I will again
प्रशांत भूषण
आम आदमी पार्टी के पंजाब इकाई के बड़े नेता एचएस फुल्का ने अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने पार्टी छोड़ने के बाद कहा कि अब वे चुनावी राजनीति में नहीं उतरेंगे और एक सामाजिक संस्था बनाकर पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 
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उन्होंने अन्ना के सभी पूर्व साथियों से अपील की कि वे भी एक गैर राजनीतिक संगठन बनाकर 2012 की तरह का आंदोलन करें। फुल्का की इस अपील पर प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर अन्ना आंदोलन की तरह का कोई आंदोलन फिर खड़ा होता है तो वे उसका पूरी तरह समर्थन करेंगे। 
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सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आंदोलन के बाद राजनीति का रास्ता यह सोचकर अपनाया गया था कि इससे हम लोगों के जीवन में असली बदलाव ला सकेंगे। लोगों को भ्रष्टाचार और जातिवाद-संप्रदायवाद से बचा सकेंगे। लेकिन देखा गया कि जो लोग बदलाव का सपना लेकर सामने आए थे, वे खुद बदल गए और वही करने लगे जिसके खिलाफ हमने आंदोलन की शुरुआत की थी।  
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वहीं, उनके इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि एचएस फुल्का बेहद ईमानदार और अपने सरोकारों के लिये लड़ने वाले आदमी हैं। ऐसे लोगों को राजनीति नहीं छोड़नी चाहिए। उन्हें राजनीति में रहकर ही अपने उद्देश्यों की लड़ाई लड़नी चाहिए। 

अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ स्वराज इंडिया पार्टी बना चुके योगेंद्र यादव ने कहा कि कुछ लोग राजनीति का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, इसका मतलब ये नहीं होना चाहिए कि बाकी ईमानदार और अच्छे लोगों को राजनीति छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे फुल्का की व्यक्तिगत तौर पर बहुत इज्जत करते हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा समाज के हित के लिए राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा को पीछे रखा।


बता दें कि एचएस फुल्का ने पंजाब विधानसभा का चुनाव बड़े अंतर से जीता था। आम आदमी पार्टी ने उन्हें पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया था। लेकिन चूंकि नेता प्रतिपक्ष का पद नियमों के तहत एक मंत्री के बराबर होता है, इसलिए उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद त्याग दिया था जिससे वे एक वकील के रूप में सिख दंगों के पीड़ितों की लड़ाई आगे ले जा सकें। कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सिख दंगों में सजा दिलाने के लिए एचएस फुल्का ने ही सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी।
 
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