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राफेल सौदे में सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यशवंत, शौरी और भूषण

Wed, 24 Oct 2018 09:09 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Oct 2018 09:09 PM IST
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prashant bhushan Says CBI Director removed to stop Rafael corruption
प्रशांत भूषण
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा व अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राफेल सौदे की सीबीआई जांच कराने की गुहार लगाई है। याचिका में कहा है कि उन्होंने गत चार अक्टूबर को सीबीआई को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई, लिहाजा उन्हें शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई को 32 पन्नों की दी गई शिकायत में उन्होंने 42 साक्ष्य पेश किए थे। 
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इन साक्ष्यों के आधार पर देश के कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के खिलाफ प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत संज्ञेय अपराध बनता है। शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज न कर सीबीआई ने अपनी वैधानिक दायित्व का पालन नहीं किया। याचिका में कहा गया कि इस मामले में प्रभावशाली लोग शामिल हैं, यही कारण है कि सीबीआई पर जांच न करने का भारी दबाव है। 
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इसी दबाव के कारण सीबीआई ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। याचिका में गुहार की गई है कि सीबीआई को उनकी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने सीबीआई को समयबद्ध तरीके से जांच करने और समय-समय पर जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश देने की मांग की थी।
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में देश का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। आलोक वर्मा इस मामले की जांच करने वाले थे। इस मामले की जांच रोकने के लिए ही सीबीआई डायरेक्टर को रातोंरात हटा दिया गया। 

राजधानी में एक कार्यक्रम में प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्होंने खुद सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से मिलकर राफेल की जांच करने के लिए शिकायत की थी। उनके साथ पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिंहा और अरुण शौरी भी थे। भूषण के मुताबिक जैसे ही आलोक वर्मा ने इस मामले की जांच करने की बात सोची, उन्हें तत्काल उनके पद से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि सीबीआई के अंदर मचे घमासान को सीबीआई बनाम सीबीआई बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह मामला सीधे-सीधे पीएमओ बनाम सीबीआई का है।


प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर को हटाने या ट्रांसफर करने के लिए भी विशेष कमेटी की इजाजत की जरुरत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पहले ही यह व्यवस्था दे रखी है। ऐसे में यह सवाल सरकार से पूछा जाना चाहिए कि उसने आलोक वर्मा को कैसे हटा दिया। उन्होंने कहा कि आलोक वर्मा की जगह जिस नए अधिकारी को अंतरिम डायरेक्टर बनाया गया है, उनके खिलाफ भी आरोप हैं और उनके होते किसी मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। 

 
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