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सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे प्रशांत भूषण

Wed, 24 Oct 2018 09:16 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Oct 2018 09:16 AM IST
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Prashant Bhushan said removal of CBI director is illegal
प्रशांत भूषण - फोटो : PTI

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। सरकार ने सीबीआई में मचे घमासान को थामने के लिए देर रात दो बजे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा, स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना और अतिरिक्त निदेशक एके शर्मा को जबरन छुट्टी पर भेज दिया। माना जा रहा है इन सभी के छुट्टी पर भेजे जाने से कई हाई प्रोफाइल मामलों पर असर पड़ सकता है।   


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वकील प्रशांत भूषण ने अमर उजाला को बताया कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे का मामला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा। भूषण के मुताबिक सीबीआई निदेशक की नियुक्ति दो साल के लिए सरंक्षित होती है, जिसे प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष दल के नेता की कोलेजियम मिल कर करती है। आलोक वर्मा के नाम का चयन प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व चीफ जस्टिस जेएस केहर और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की कोलेजियम ने किया था।

वकील प्रशांत भूषण ने उन्हें हटाने के पीछे इस संभावना पर बल दिया कि संभव है कि राफेल मुद्दे की जांच को लेकर वे सीबीआई निदेशक से मिले थे। उनके साथ अरुण शौरी और यशंवत सिन्हा भी थे। प्रशांत भूषण का कहना है कि सीबीआई निदेशक ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे राफेल मामले में उचित कार्रवाई करेंगे।

सूत्रों ने बताया कि रात साढ़े 11 बजे सीबीआई के तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला जारी किया गया। रात डेढ़ बजे सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम नागेशवर राव ने कार्यकारी निदेशक की कुर्सी संभाल ली। जिसके बाद सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर छुट्टी पर भेजे गए अधिकारियों के दफ्तर पर छापेमारी की गई और सीबीआई दफ्तर का 10वां और 11वां फ्लोर पूरी तरह सील कर दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई के इन तीनों वरिष्ठ अफसरों को छुट्टी पर भेजने से कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस पूरे प्रकरण का असर विजय माल्या के भारत प्रत्यापर्ण पर भी पड़ सकता है। क्योंकि माल्या मामले की जांच राकेश अस्थाना स्वयं कर रहे थे और उसके मामलों की सुनवाई के लिए लंदन भी गए थे।

 


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