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Politics: विशेष सत्र को लेकर BJP-कांग्रेस में टकराव जारी, प्रह्लाद जोशी ने जयराम रमेश पर लगाए यह आरोप

Thu, 07 Sep 2023 02:25 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 07 Sep 2023 02:25 PM IST
सार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को आरोप लगाया था कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह कहकर गुमराह किया है कि केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने में विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है। वहीं, अब जोशी ने पलटवार किया है। 

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Pralhad Joshi accuses Ramesh of twisting facts on constitutional provisions, parliamentary procedures
Pralhad Joshi vs Jairam Ramesh - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रमेश ने संसद सत्र से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। संसदीय कार्य मंत्री ने रमेश के एक बयान का जवाब देते हुए कहा कि संसद और इसकी प्रक्रियाओं को बदनाम करने वाली गलत सूचना के प्रसार को रोकना महत्वपूर्ण है।

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रमेश ने लगाया यह आरोप

बता दें, रमेश ने बुधवार को आरोप लगाया था कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह कहकर गुमराह किया है कि केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने में विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है। उन्होंने कहा था कि कितना गुमराह करेंगे जोशी-जी?प्रत्येक विशेष सत्र/बैठक का एजेंडा पहले से ही पता होता था। यह सिर्फ मोदी सरकार ही है जो लगातार संसद का अपमान कर रही है और संसदीय परंपराओं को विकृत कर रही है। पिछली सरकारों ने इसमें आपकी सरकार भी शामिल हैं, जिन्होंने संविधान दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन और ऐसे अन्य अवसरों के लिए कई विशेष बैठकें बुलाई हैं। रमेश ने यह भी कहा था कि अतीत में कई मौकों पर सरकारों ने विशेष सत्र बुलाने से पहले उसके एजेंडे के बारे में जानकारी दी थी। इस संदर्भ में उन्होंने कई मिसालें भी दीं।

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जोशी का पलटवार

वहीं, अब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रमेश पर पलटवार किया है। उन्होंने रमेश के इस दावे को झूठ करार दिया कि जीएसटी लागू करने के लिए साल 2017 की 30 जून को संसद के सेंट्रल हॉल में हुआ ऐतिहासिक समारोह संसद सत्र था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह बिल्कुल सच नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत सत्र नहीं था। 

जोशी ने कहा कि आइए एक और गलतबयान पर नजर डालते हैं। रमेश ने संविधान की 70वीं वर्षगांठ के लिए 26 नवंबर, 2019 को सेंट्रल हॉल में एक विशेष बैठक का उल्लेख किया था। लेकिन, यह संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत संसदीय सत्र नहीं था। उन्होंने कहा कि आगामी सत्र संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत संसद का सत्र है और एजेंडा स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुसार साझा किया जाएगा।

संविधान का अनुच्छेद 85 सत्र से...

गौरतलब है, संविधान का अनुच्छेद 85 सत्र से संबंधित है और इसके अनुसार, संसद के सदनों को प्रत्येक वर्ष में कम से कम दो बार बैठक के लिए बुलाया जाएगा और एक सत्र में उसकी अंतिम बैठक और अगले सत्र में उसकी पहली बैठक के बीच छह महीने का अंतर नहीं होगा। राष्ट्रपति समय-समय पर सदनों या किसी भी सदन को ऐसे समय और स्थान पर बैठक के लिए बुलाएंगे, जिन्हें वह उचित समझें।

जोशी ने कहा कि विशेष अवसरों पर सत्र के आयोजन और औपचारिक संसदीय सत्रों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता को बनाए रखने में सटीक जानकारी मायने रखती है। जयराम रमेश के हालिया बयान काफी भ्रामक हैं। वह संवैधानिक प्रावधानों और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि संसद सत्र बुलाना लोकतंत्र में सबसे बड़ा उपहार है। हालांकि, विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अवरोध पैदा करने वाले विरोधियों की एक लॉबी है जो इसका विरोध करती है। उन्होंने रमेश से कहा कि वे सटीक जानकारी पर ध्यान केंद्रित करें और भ्रामक बयानों को संवैधानिक प्रावधानों और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में हमारी समझ पर हावी न होने दें।

जोशी ने आपातकाल का उल्लेख किया और कहा कि यह कांग्रेस सरकार थी जो संसदीय लोकतंत्र विकृत करने के लिए जानी जाती थी। उन्होंने रमेश से कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोगों ने आपातकाल लागू होते देखा है और कैसे 1975 में उनकी पार्टी की सरकार ने इस देश के लोगों और संस्थानों के अधिकारों पर अंकुश लगाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग करते हुए 90 से अधिक बार लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया।

बुधवार को जोशी का गांधी को जवाब
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे जवाबी पत्र में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा था कि केंद्र सरकार ने 18-22 सितंबर तक संसद का सत्र बुलाने में प्रासंगिक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है। जोशी ने कहा कि संसद का सत्र बुलाने से पहले राजनीतिक दलों से सलाह-मशविरा करने की कोई परंपरा नहीं है।

यह भी पढ़ें- Pralhad Joshi: 'लोकतंत्र के मंदिर के कामकाज का राजनीतिकरण करने का प्रयास', सोनिया को प्रह्लाद जोशी का जवाब

सोनिया गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि विशेष सत्र के लिए कोई एजेंडा सूचीबद्ध नहीं किया गया। उन्होंने जाति आधारित जनगणना, चीन के साथ सीमा विवाद, और मणिपुर हिंसा समेत 9 मुद्दों पर चर्चा का भी आग्रह किया।

 

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