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प्रद्युम्न हत्याकांड : बालिग या नाबालिग पर तय होगा फैसला

Fri, 15 Dec 2017 01:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो / गुरुग्राम
अमर उजाला ब्यूरो / गुरुग्राम Updated Fri, 15 Dec 2017 01:42 PM IST
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pradyuman Case: decide on adult or minor
भोंडसी स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में हुई दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युम्न की हत्या मामले में शुक्रवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में सुनवाई होगी। यहां आरोपी छात्र के बालिग व नाबालिग होने की याचिका पर बहस के बाद बोर्ड फैसला सुनाएगा। यदि बोर्ड द्वारा आरोपी को बालिग करार दिया तो न केवल उसे जमानत मिलने में दिक्कत हो जाएगी बल्कि आरोप साबित होने पर उसे 10 साल की सजा भी हो सकती है। 
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आरोपी की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट व साइकोलॉजिकल रिपोर्ट से उनका भविष्य तय होना है। बहस से पहले इस रिपोर्ट की कॉपी सभी पक्षों को पढ़ने के लिए बोर्ड रूम में उपलब्ध कराई जाएगी। इस रिपोर्ट को पढ़ने के तुरंत बाद ही बहस होगी। बोर्ड रूम छोड़ने से पहले ही इस रिपोर्ट को वापस बोर्ड में जमा करवा लिया जाएगा। शुक्रवार को ही आरोपी की जमानत याचिका पर भी बहस होनी है। सीबीआई द्वारा इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करना है। जिसके बाद इस पर भी बहस होगी। 
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बता दें कि 8 सितंबर को हुए प्रद्युम्न हत्याकांड में सीबीआई ने 11वीं कक्षा के छात्र को हिरासत में लिया था। आरोपी को बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह फरीदाबाद भेज दिया गया। इसके बाद से बोर्ड में प्रद्युम्न के पिता द्वारा आरोपी के खिलाफ याचिका दायर की गई थी कि उसने संगीन अपराध को अंजाम दिया है इसलिए उस पर नाबालिग की तरह मुकदमा न चलाया जाए। 
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पढ़ें- प्रद्युम्न हत्याकांड: अब आएगा सच सामने, तीनों आरोपी CBI के रिमांड पर

इस याचिका का आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने विरोध किया था और बोर्ड से आग्रह किया था कि उस पर नाबालिग की तरह ही मुकदमा चलाया जाए, लेकिन बोर्ड ने आरोपी के अधिवक्ता के आग्रह को खारिज कर दिया था। इस मामले में बोर्ड ने आरोपी की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करवाई थी। इसके साथ ही उसकी साइकोलॉजिकल रिपोर्ट भी तैयार करवाई गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही छात्र के भविष्य का फैसला होगा।  

अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया

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प्रद्युम्न
अंजू रावत नेगी, वरिष्ठ अधिवक्ता- छात्र पर संगीन अपराध करने का आरोप लगा है। यदि बोर्ड उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने का फैसला देता है तो आरोपी का मामला विशेष अदालत में जाएगा। इस अदालत में उसे नाबालिग तो माना जाएगा, लेकिन उसके नाबालिग होने के सभी अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इस फैसले के बाद उसे जमानत मिलने के भी आसार नहीं हैं। यदि छात्र पर आरोप साबित हो जाता है तो उसे 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

राम कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता- बोर्ड ने सोशल इन्वेस्टिगेशन व साइकोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करवाई है। इस रिपोर्ट में छात्र की दिमागी स्थिति भांपी गई है। यदि छात्र पर नाबालिग की तरह मुकदमा चलाया जाता है तो उसे काफी राहत मिलेगी। आरोपी साबित होने पर जुवेनाइल एक्ट में अधिकतम 3 वर्ष की सजा का प्रावधान है। जुवेनाइल को जमानत भी आसानी से मिल जाती है। 
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