जेंडर गैप में भारत से बेहतर स्थिति में हैं बांग्लादेश और नेपाल: रिपोर्ट
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम ने मंगलवार को जेंडर गैप पर दुनियाभर के 149 देशों की एक रिपोर्ट जारी की है। जिससे पता चलता है कि भारत जेंडर गैप को कम करने में नाकाम साबित हुआ है। भारत से बेहतर स्थिति में बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका हैं। इंडेक्स के मुताबिक जेंडर गैप में भारत की रैंक 108 है। नेपाल की 105 और श्रीलंका की 100। वहीं भारत से भी अधिक जेंडर गैप मालदीव (113), भूटान (122) और पाकिस्तान (148) में है। यानी दक्षिण एशिया में सबसे बेहतर स्थिति बांग्लादेश की है।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम ने मंगलवार को जेंडर गैप पर दुनियाभर के 149 देशों की एक रिपोर्ट जारी की है। जिससे पता चलता है कि भारत जेंडर गैप को कम करने में नाकाम साबित हुआ है। भारत से बेहतर स्थिति में बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका हैं। इंडेक्स के मुताबिक जेंडर गैप में भारत की रैंक 108 है। नेपाल की 105 और श्रीलंका की 100। वहीं भारत से भी अधिक जेंडर गैप मालदीव (113), भूटान (122) और पाकिस्तान (148) में है। यानी दक्षिण एशिया में सबसे बेहतर स्थिति बांग्लादेश की है।
नहीं हुआ कोई सुधार
बीते साल जेंडर गैप के मामले में भारत की रैंक 108 थी और इस बार भी भारत की यही रैंक है। इससे साफ है कि भारत में इस ओर कोई प्रगति नहीं हुई है। जो हालात बीते साल थे, वही इस साल भी हैं। दुनियाभर के 149 देशों में सबसे बेहतर स्थिति आइसलैंड की है। इस देश की इंडेक्स में पहली रैंक है।
इंडेक्स के हैं चार पैमाने
इकोनोमिक फोरम ने इंडेक्स के लिए चार पैमाने तैयार किए हैं। ये पैमाने हैं, आर्थिक भागीदारी एवं अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक अधिकार। हालांकि राजनीतिक अधिकार के मामले में भारत 19वें स्थान पर है। वेतन के मामले में महिला-पुरुष में अंतर कम करने में भारत को थोड़ी कामियाबी मिली है। वेतन की समानता में भारत 72वें स्थान पर आ गया है। वहीं आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने में भारत का नंबर 142वां है। सेहत के मामले में भारत की स्थिति बेहद खराब है। स्त्री और पुरुष में बेहद अंतर है। इसमें भारत की रैंक 147वीं है।
भारत में सबसे कम सुधार
फोरम के मुताबिक स्वास्थ्य के मामले में भारत में बीते एक दशक में बेदह कम सुधार हुआ है। इस बार ये अंतर और भी अधिक बढ़ गया है।
एआई सबसे ज्यादा भारत में
महिलाओं पर ऑटोमेशन का अधिक असर
महिलाओं पर ऑोटोमेशन का सबसे अधिक असर पड़ रहा है। जिससे उनकी नौकरियां कम हो रही हैं। ऑटोमेशन का मतलब है किसी कार्य को पूरा करने के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली मशीनें। जिनका इस्तेमाल अब बढ़ता जा रहा है। अधिकतर महिलाएं वो काम करती हैं जिनमें अधिक भार वाला सामान नहीं उठाया जाता। ये अधिकतर छोटे उद्योग होते हैं। जैसे अचार बनाना, बीड़ी बनाना, पापड़ बनाना, जवे बनाना आदि। अब इन छोटे उद्योगों में मशीनें आती जा रही हैं। जिसके कारण महिलाओं की नौकरियां उनसे छिन रही हैं।
टॉप 5 में हैं ये देश
इंडेक्स में टॉप पांच पर आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और निकारागुआ हैं।
लगेंगे 202 साल
रिपोर्ट के अनुसार महिला पुरुष में वेतन के अंतर को खत्म करने के लिए 202 साल का वक्त लगेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेंडर गैप में बढ़ोतरी हुई है। जो कि दशक में पहली बार हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीति में अंतर बढ़ा है। वहीं आर्थिक भागीदारी में महिलाओं की स्थिति में सुधार आया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में ये देश शीर्ष पर
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भारत में जेंडर गैप काफी अधिक है। जिसमें भारत की रैंक 149 में से 147 है। इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति रूस की है। वहीं ओवरऑल रैंकिंग भी रूस की 75वीं है। ओवरऑल रैंकिंग मामले में अमेरिका की स्थिति रूस से भी बेहतर है। अमेरिका की रैंकिंग 51 है, चीन की 103 और जापान की 110। अमेरिका और रूस से भी बेहतर स्थिति में फ्रांस (12), जर्मनी (14) और इंग्लैंड (15) हैं।