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मुश्किल हालात : गरीब देशों ने अपना कर्ज चुकाने में खर्च किए अरबों डॉलर, उच्च ब्याज दर पर मिला ऋण 

Sun, 17 Apr 2022 06:34 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 17 Apr 2022 06:34 AM IST
सार

यूएन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर देश बेहद कम ब्याज पर उधार ली गई रिकॉर्ड राशि के साथ महामारी की मंदी से उबर सकते हैं, लेकिन गरीब देश अभी भी अपना कर्ज चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट कहती है इस स्थिति ने विशाल वैश्विक वित्तीय अंतर पैदा किया है।

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Poor Countries spent Billions of dollars to repay their debt got loans at high interest rate
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट। - फोटो : Pixabay

विस्तार

कोरोना की मार से 2021 में करीब सात करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे पहुंच गए। कई विकासशील देश कर्ज पर दिए जाने वाले भारी ब्याज के कारण महामारी के दुष्प्रभावों से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

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यूएन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर देश बेहद कम ब्याज पर उधार ली गई रिकॉर्ड राशि के साथ महामारी की मंदी से उबर सकते हैं, लेकिन गरीब देश अभी भी अपना कर्ज चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट कहती है इस स्थिति ने विशाल वैश्विक वित्तीय अंतर पैदा किया है।
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गरीब देशों ने अपना कर्ज चुकाने में अरबों डॉलर खर्च किए और उन्हें उच्च ब्याज दर पर ऋण मिला था, इसलिए वे शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार, पर्यावरण और असमानता घटाने की दिशा में ज्यादा खर्च नहीं कर सके। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में 81.2 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे थे और रोजाना 1.90 डॉलर या उससे कम उनकी आमदनी थी। वहीं, 2021 तक महामारी के बीच ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर 88.9 करोड़ हो गई।
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संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने नई रिपोर्ट को डरा देने वाला बताया है। उन्होंने लाखों को भूख और गरीबी से बाहर निकालने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी स्थिति को और बदतर बना रही है। साथ ही यूक्रेन युद्ध का वैश्विक प्रभाव भी है।

सबसे गरीब देश कर्ज चुकाने पर खर्च कर रहे अरबों
रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे गरीब देश कर्ज चुकाने पर अरबों खर्च कर रहे हैं, जिससे उन्हें शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर खर्च में कटौती करनी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर विकसित देश बेहद कम ब्याज दरों पर उधार ले सकते हैं और अपेक्षाकृत आसानी से आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अमीर देश अपनी आय का 3.5 फीसदी कर्ज चुकाने पर खर्च करते हैं, जबकि कम अमीर देशों को अपनी आय का 14 फीसदी खर्च करना पड़ता है।

1.7 अरब लोग चुका रहे भोजन की अधिक कीमत
यूक्रेन युद्ध के परिणामस्वरूप 1.7 अरब लोगों को भोजन, ऊर्जा और खाद की उच्च कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन और रूस अनाज और ईंधन के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक हैं। युद्ध का विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ने लगा है। श्रीलंका ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि वह अपना कर्ज नहीं चुका पाएगा क्योंकि उसका विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया है।


नाइजीरिया-केन्या में व्यापार प्रभावित : दूसरी ओर नाइजीरिया और केन्या में ईंधन की कमी ने व्यापार को प्रभावित किया है। लोगों को ईंधन के लिए लंबी कतारों में खड़े होना पड़ रहा है। तीन दशकों में पहली बार गिरी सबसे गरीब परिवारों की आय अमेरिका और अधिकांश यूरोपीय देशों समेत विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ी है।

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