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पुंछ मुठभेड़: सर्दियां शुरू होते ही घुसपैठ की फिराक में आतंकी, चुनौतियों भरे ‘हॉट विंटर’ की आशंका

Mon, 11 Oct 2021 04:57 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 11 Oct 2021 04:57 PM IST
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सार
यह देखा गया है कि आतंकी संगठन इस फिराक में होते हैं कि सर्दियों से पहले अपने लोगों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करा दी जाए। क्योंकि ठंड और बर्फबारी बढ़ने से पास और पहाड़ी रास्तों के बंद हो जाने से घुसपैठ की उनकी कोशिश नाकाम होने लगती है। विशेषज्ञों की राय में आतंकी घटनाओं को लेकर ‘हॉट विंटर’ आने वाला है क्योंकि आतंकी दस्ते तैयार हो रहे हैं। इस तरह की कई घटनाएं अभी भारी चुनौती पैदा करने वाली है। उड़ी सेक्टर में पकड़े गए पाक आतंकी अली बाबर ने लश्कर और आइएसआइ की इन साजिशों का राजफाश भी किया था।    
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poonch jammu kashmir terrorist encounter winter has not started terrorists have started looking for infiltration terrorist attack may be increases
पुंछ जम्मू कश्मीर मुठभेड़ - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू के पुंछ जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में सेना के चार जवान और एक जेसीओ के जवान शहीद हो गए हैं। सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद के मुताबिक खुफिया सूचना के आधार पर सोमवार सुबह भारतीय सेना ने पुंछ के सुरनकोट क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया था। इसी दौरान मुठभेड़ शुरू हो गई।


आज सुबह से ही सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच यहां मुठभेड़ चल रही है। विशेषज्ञों की राय में सुरक्षाबलों के लिए अब हर दिन चुनौती वाली है क्योंकि सर्दियां बढ़ने और अफगानिस्तान पर तालिबान का राज होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ सकती है। 


पुंछ में तीन चार साल तक काम करने वाले सुरक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल एस वी पी सिंह (सेवानिवृत्त) बताते है कि पुंछ में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। पिछले चार पांच महीने के अंदर राजौरी-पुंछ में चार-पांच घटनाएं हुई हैं। पिछले महीने ही चार सितंबर में गुलपुर में बड़ी फायरिंग हुई थी। उनका मानना है कि आज की यह मुठभेड़ लंबी हो सकती है क्योंकि आतंकियों की तादाद ज्यादा हो सकती है।

बेहतर प्रशिक्षित हैं आतंकवादी
उनका मानना है कि जिस तरह से यह मुठभेड़ चली है उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि ये आतंकी  बेहतर प्रशिक्षित हैं। सुरक्षाबलों को यहां से तलाशी में अभी बड़ी संख्या में हथियार, नकद और आतंकियों के कपड़े, राशन-पानी जैसे अहम सबूत मिल सकते है, क्योंकि आंतकी संगठन अपनी मुहिम को कामयाब बनाने के लिए कुछ स्थानीय लोगों को डरा-धमका कर उनकी मदद लेते हैं। चमरेर जंगल और सुरनकोट में डेरा की गली जहां यह ऑपरेशन शुरू हुआ है यह पुरानी मुगल सड़क का इलाका है और यहां अभी और आतंकी छिपे हो सकते हैं।

 

जम्मू-कश्मीर के इस स्कूल में आतंकियों ने पिछले सप्ताह बरसाईं थी गोलियां
जम्मू-कश्मीर के इस स्कूल में आतंकियों ने पिछले सप्ताह बरसाईं थी गोलियां - फोटो : बासित जरगर

आतंकी कैंप सक्रिय
एस वी पी सिंह बताते हैं कि यह सारी घुसपैठ लाइन ऑफ कंट्रोल से हो रही है और सर्दियों का मौसम शुरू होते ही घुसपैठ बढ़ने लगती है। आतंकी पीरपंजार की घाटी की तरफ से भी आ सकते हैं। इस तरह की घुसपैठ के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई, जैश-ए मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसी आतंकी संस्थाओं का हाथ होता है।

अब तो अफगानिस्तान में तालिबान का राज होने से भी पाकिस्तान को और शह मिल रही है और इसलिए वह ज्यादा कूद भी रहा है। इसलिए इस बात की पूरी आशंका है कि इस महीने और आगे भी आतंकवादी घटनाएं होती रहेंगी। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि पीओके में कई आतंकी कैंप फिर से सक्रिय हो चुके हैं। जब इस तरह से आतंकी सक्रिय हो रहे हैं तो हमारी सरकार को बिना देर किए इन आतंकी कैंपों को नष्ट कर देना चाहिए। यदि यह कैंप चलते रहें तो निश्चित तौर पर हमें नुकसान पहुंचाएंगे।  

सर्दी बढ़ते ही लाइन ऑफ कंट्रोल पर चुनौती दोगुनी 
कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार सुजाउल हक बताते हैं कि एक ट्रेंड देखा गया है कि जम्मू कश्मीर में जैसे ही सर्दी शुरू होती है, वैसे ही लाइन आफ कंट्रोल पर सेना के लिए चुनौतियां बढ़ जाती हैं। खासतौर पर अक्तूबर में क्योंकि इस समय पाकिस्तान की तरफ से आतंकी संगठन सीजफायर तोड़कर अपने लोगों की घुसपैठ करवाने की कोशिश करते हैं। भारतीय सेना हर बार आतंकी घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए कई लेवल की सिक्योरिटी सेट तैयार रखती है लेकिन वे किसी न किसी तरह जम्मू-कश्मीर के अंदर आने की फिराक में रखते हैं। बल्कि ऐसा कहा जा सकता है कि यह घुसपैठ रूकी ही नहीं। आज की घटना भी घुसपैठ की ही एक कोशिश कही जा सकती है।

जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल
जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
तालिबान के आने से बढ़ सकती हैं ऐसी घटनाएं
सुरक्षा विशेषज्ञ और टेरिटॉरिअल आर्मी के पूर्व प्रमुख मेजर जनरल अश्विनी सिवाच (सेवानिवृत) की राय में जब से अफगानिस्तान के अंदर तालिबान आया है इस तरह की घटनाएं बढने लगी है। क्योंकि पाकिस्तान के आंतकवादी संगठनों को लगता है कि जब तालिबान को जीत मिल सकती है तो उन्हें क्यो नहीं?  लश्कर ए तैयबा और जैश ए मुहम्म्द के करीब 10 हजार आतंकवादी तालिबान के साथ कंधे से कंधे मिलाकर लड़ रहे थे अब वे अफगानिस्तान से फ्री हो गए हैं और उनके हाथ अमेरिका के आधुनिक हथियार भी लग गए हैं इसलिए वे अब हिन्दुस्तान की तरफ आ रहे हैं।

उनके मुताबिक पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि इन सर्दियों में इस तरह की घटनाएं बढ़ेंगी। इसलिए पाकिस्तान की कोशिश अफगानिस्तान से आए 10 हजार आतंकियों को बर्फबारी से पहले भारत में घुसपैठ कराने की होगी। वे मानते है कि जम्मू-कश्मीर में अभी आतंकवादी घटनाएं और बढ़ सकती हैं यह हॉट विंटर हो सकता है जिसमें ड्रोन से भी हमले होंगे। साथ ही केरल में स्पीलर सेल को भी ले कर भी चुनौती सामने आ सकती है। उनका मानना है कि अभी आतंकी ज्यादा प्रशिक्षित हैं और तकनीक का सहारा ले रहे हैं। 
 
सीमापार तनाव बढ़ने की आशंका
सुजाउल हक बताते हैं कि जब-जब आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश करते हैं उसके साथ तनाव भी बढ़ जाता है। देखना होगा कि अभी कुछ समय से सीजफायर के बाद शांति बनी हुई थी तो क्या यह तनाव फिर बढ़ेगा। उनका मानना है कि केवल आर्टिकल 370 हटाना ही काफी नहीं है क्योंकि पाकिस्तान वहीं है, सीमा वहीं है, सीमा पार आतंकी संगठन भी वहीं है, सरकार को न्यू कश्मीर के लिए जल्दी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

वहीं सिवाच कहते हैं कि निश्चित तौर पर सीमा पार से अब सीजफायर का उल्लंघन  हो सकता है पाकिस्तान कवरिंग फायर देने की कोशिश करेगा। इसलिए भारत को अब अपनी रणनीति नए तरीके से तैयार करनी होगी क्योंकि उसकी चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं। 
 

जम्मू कश्मीर में अवाम की आवाज
जम्मू कश्मीर में अवाम की आवाज - फोटो : अमर उजाला
डेमोग्राफिक प्रोफाइल बदलने का डर
सुरक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल एस वी पी सिंह एक और पहलू पर प्रकाश डालते हैं। उनका मानना है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 हटने के बाद से गैर कश्मीरियों के लिए भी वहां जाना और जमीन खरीदना आसान हुआ है। इससे भी पाकिस्तान को इस बात का डर हो गया है कि कश्मीर घाटी की डेमोग्राफिक प्रोफाइल बदल जाएगी और यहां मुस्लिम आबादी धीरे-धीरे कम हो सकती है। इसी वजह से 1990 में कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार शुरू हुआ था और कश्मीरी पंडितों का पलायन करना पड़ा और यही कारण है कि आज भी कश्मीर पंडितों में आतंक पैदा करने के लिए आतंकी फिर सक्रिय हो गए हैं। 

बढ़ सकता है हाईब्रीड वारफेयर  
सुरक्षा विशेषज्ञ सिवाच यह भी बताते हैं कि आतंकियों को टारगेट किलिंग के निर्देश दिए गए हैं। इससे हाईब्रीड वारफेयर (समाज में घुलमिल कर हमले करना) की घटनाएं बढ़ सकती है। कश्मीरी पंडितों और सिखों के बीच आतंक पैदा करने और दरार डालने के लिए ऐसा किया जाता है। 

विलेज डिफेंस कमिटी बनाई जाए
एस वी पी सिंह मानते हैं कि इस तरह की आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए सैन्य बलों की सक्रियता के साथ-साथ कश्मीर पंडितों के लिए विलेज डिफेंस कमिटी बनानी चाहिए।  साथ ही सरकार को मदरसों पर भी नजर रखने और कश्मीरी पंडितों को भरोसे में लेने की जरूरत है।
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