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पानी की ट्रेन पर सियासत: खाली ट्रेन झांसी पहुंचने के बाद भिड़े सियासी दल

Fri, 06 May 2016 05:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झांसी/लखनऊ/दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, झांसी/लखनऊ/दिल्ली Updated Fri, 06 May 2016 05:52 AM IST
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पानी के खाली टैंकर पहुंचने पर प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सूखा त्रस्त बुंदेलखंड में पानी की ट्रेन पहुंचने से पहले ही बृहस्पतिवार को जबरदस्त सियासत छिड़ गई। बुंदेलखंड के महोबा सूखाग्रस्त क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए रतलाम से एक खाली ट्रेन झांसी पहुंचने के बाद लखनऊ से लेकर तक दिल्ली तमाम दलों में जुबानी जंग शुरू हो गई। खाली ट्रेन भेजने को बुंदेलखंड के लोगों के साथ भद्दा मजाक बताते हुए झांसी में कांग्रेसियों ने ट्रेन के पास प्रदर्शन किया।

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वहीं, सपा ने इसे भाजपा का राजनीतिक दांव करार दिया। अखिलेश सरकार ने केंद्र सरकार की ट्रेन से पानी भेजने की पेशकश को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रदेश में लातूर जैसा जल संकट नहीं है, जो वाटर ट्रेन की जरूरत पड़े। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से 10 हजार टैंकरों की व्यवस्था करने का आग्रह किया है जिससे कि बुंदेलखंड के जल स्रोतों से पानी जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को कहा था कि बुंदेलखंड के लिए पानी की ट्रेन भेजी जाएगी।
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लोकसभा में बुंदेलखंड के सूखे पर उठे सवाल पर महोबा क्षेत्र को सबसे प्रभावित बताया गया था। इस पर महोबा में रेलवे के जरिये टैंकरों से पानी भेजने के निर्देश जारी किए गए थे। चर्चा है कि इसी के तहत रेलवे बोर्ड ने मंडल रेल प्रशासन को दस खाली टैंकर उपलब्ध कराए हैं। मालगाड़ी का यह रैक बुधवार को रतलाम से झांसी आया था। रैक आने के बाद अपर मंडल रेल प्रबंधक ने महोबा के जिलाधिकारी से बात की थी।
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मगर उन्होंने अभी पानी लेने से इंकार कर दिया। महोबा जिलाधिकारी ने मंडल रेल प्रशासन को पत्र लिखकर बताया है कि अभी वह स्थानीय स्रोतों से ही पानी की पूर्ति कर रहे हैं। जरूरत पड़ते ही टैंकरों से पानी भेजने की डिमांड करेंगे। इस कारण टैंकरों को कैरिज एंड वैगन रिपेयर यार्ड में खड़ा कर दिया गया। रेल अफसरों का भी कहना है कि डिमांड आने पर झांसी से टैंकरों को भरकर संबंधित स्टेशन तक  भेजा जाएगा।

जल संकट से निजात दिलाने का श्रेय लेने को लेकर यूपी व केंद्र सरकार आमने-सामने आ गई हैं। अखिलेश सरकार ने कहा है कि हमने भारत सरकार से पानी की मांग ही नहीं की है। राज्य के सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री शिवपाल यादव ने तो केंद्र सरकार पर बुंदेलखंड में पानी के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

वहीं, बृहस्पतिवार शाम चार बजे कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता झांसी में खाली टैंकरों के पास पहुंच गए। कांग्रेस नेता रतलाम से खाली टैंकर भेजने को केंद्र सरकार का छलावा बता रहे थे। इस दौरान जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने भी खाली टैंकरों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी हासिल की।

सीएम कार्यालय ने डाले फोटो

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रतलाम से टैंकर लेकर आई मालगाड़ी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सीएम कार्यालय से ट्वीट करके बताया गया कि किस तरह झांसी और बुंदेलखंड में जल की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री की पहल का असर हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई जगह टैंकरों से जलापूर्ति के फोटो भी डाले गए। दरअसल, राज्य सरकार नहीं चाहती थी कि पानी की एक-दो ट्रेन भेजकर केंद्र सरकार सूखे से निपटने में मदद करने का श्रेय ले। 

मांग पर ही पानी की आपूर्ति करेंगे

पानी आपूर्ति के लिए रतलाम से झांसी पहुंची ट्रेन पर रेलवे का कहना है कि बुंदेलखंड इलाके के भाजपा सांसदों ने लातूर की तरह बुंदेलखंड में भी ट्रेन से पानी पहुंचाने की मांग की थी। इसे ही ध्यान में रख पानी सप्लाई करने वाली 10 टैंकर वाले कोच की ट्रेन भेज दी गई है। बिना पानी के टैंकर भेजे जाने पर रेलवे ने तर्क दिया कि रेलवे के पास पानी नहीं है, सिर्फ एक जगह से दूसरे जगह पानी की आपूर्ति ट्रेन से की जाती है। इस ट्रेन से पांच लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा सकती है। 50 हजार लीटर पानी एक कोच में आता है। 40 ट्रक के बराबर रेलवे के 10 कोच है। रेलवे बोर्ड के ट्रैफिक मेंबर ने कहा कि हमने झांसी में ट्रेन खड़ी कर दी है। राज्य सरकार की मांग पर ट्रेन से पानी पहुंचाया जाएगा। 

जल एक्सप्रेस का अता पता नहीं

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पानी के टैंकर से पानी भरते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

यह चर्चा भी थी कि महाराष्ट्र के लातूर की तर्ज पर एक जल एक्सप्रेस कोटा के राणा प्रताप बांध से पानी भरकर वाया कानपुर होकर छह मई को महोबा पहुंचेगी। लेकिन, झांसी रेलवे मंडल के अफसरों ने ऐसी कोई भी जानकारी होने से साफ इनकार किया है। रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि ऐसी किसी ट्रेन की लोकेशन उनके मंडल के पास अभी नहीं है। महोबा कोई भी गाड़ी जाएगी तो उनके पास अवश्य जानकारी होगी। चर्चा थी कि हमीरपुर-महोबा के सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल के कहने पर रेल मंत्रालय कोटा से महोबा के लिए वाटर ट्रेन भिजवा रहा है। वाटर एक्सप्रेस के प्रत्येक टैंकर में 50 हजार लीटर पानी होगा। 

महोबा के डीएम ने किया पानी लेने से इनकार

महोबा के जिलाधिकारी ने रेलवे मंडल के अफसरों को पत्र लिखकर कहा कि अभी उनको पानी की आवश्यकता नहीं है। निजी स्रोतों से अभी पानी की मांग को पूरा किया जा रहा है। यदि आवश्यकता होगी तो वह पानी मांग लेंगे।

एक तरफ बुंदेलखंड पानी के लिए तरस रहा है और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री जल ट्रेन लौटा रहे हैं। इस तरह की राजनीति के चलते बुंदेलखंड और विदर्भ भयानक त्रासदी भी झेल रहे हैं। -राजा बुंदेला

सरकार ने किया भद्दा मजाक

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बैलगाड़ी से पानी ले जाता किसान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने केंद्र की मोदी और राज्य की अखिलेश सरकार पर बुंदेलखंड के लोगों के साथ क्रूर और भद्दा मजाक करने का आरोप लगाया है। जैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने खाली डिब्बे भेजे हैं जबकि पानी भर के ट्रेन महाराष्ट्र के लातूर में गई थी। जैन ने कहा कि आमतौर पर ट्रेन 45 डिब्बे की होती है। लातूर भी इतने ही डिब्बों की ट्रेन पानी लेकर गई थी। मगर झांसी में जो ट्रेन खड़ी है।

उसमें सिर्फ दस डिब्बे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश ट्विटर में पानी के भरे तालाब के चित्र दिखा रहे हैं और कह रहे हैं कि बुंदेलखंड में पानी की कमी नहीं है। सच्चाई तो यह है कि ये तालाब बुंदेलखंड के नहीं है। बुंदेलखंड में पानी की बेहद कमी है। वह सैफई के तालाब दिखा रहे हैं। जैन ने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड से रोजाना दस से 15 लोग आत्महत्या कर रहे हैं और प्रति दिन 70 हजार से एक लाख लोग पलायन कर रहे हैं।

चार दिन में आता है एक टैंकर

यूपी सरकार भले ही बुंदेलखंड में पानी की किल्लत से इनकार कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है, जिसकी एक बानगी ग्राम पंचायत कठवर रमपुरा में देखी जा सकती है। यहां किसान बैलगाड़ी से पानी ढो रहे हैं। हालांकि पानी की सहूलियत के लिए टैंकर भी लगाया गया है, लेकिन वह चार दिन के अंतराल पर आता है। इस ग्राम पंचायत में चार गांव कठवर, रमपुरा, जिजरवारा एवं संसुआ हैं। इस इलाके की जमीन पथरीली है। गांव में हैंडपंप तो लगे हैं, लेकिन अधिकांश हैंडपंपों का जल स्तर नीचा हो जाने के कारण उनमें पानी नहीं आ रहा है। 

वाटर ट्रेन को रेड सिगनल

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गोविंद सागर बांध में बहुत कम पानी बचा है - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

हमने केंद्र सरकार से पानी की मांग नहीं की है। वहां जल स्रोतों की कमी नहीं है, टैंकरों की जरूरत है। हम जलापूर्ति के लिए नए टैंकर खरीद रहे हैं। बुंदेलखंड में पानी की ऐसी किल्लत नहीं है कि ट्रेन से पानी भेजा जाए। 400 टैंकर खरीदकर उनसे गांवों में पानी भेजा जा रहा है। केंद्र सरकार 10 हजार टैंकरों की व्यवस्था कर दे को सभी गांवों में आसानी से जलापूर्ति हो सकती है।
आलोक रंजन, मुख्य सचिव, यूपी 

हमारे पास पानी स्टोर करने की जगह नहीं

बुंदेलखंड में पानी की समस्या नहीं है। यदि जरूरत पड़ी तो हम केंद्र से पानी मांग लेंगे। पानी की ट्रेन भेजकर केंद्र सरकार राजनीति करना चाह रही है। ट्रेन से भेजे गए पानी को स्टोर करने की जगह हमारे पास नहीं है।
शिवपाल सिंह यादव, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री

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