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Politics: क्या चल गया विपक्ष का INDIA वाला दांव! मोदी के इस बयान से कांग्रेस क्यों हुई ताकतवर?

Tue, 25 Jul 2023 06:02 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 25 Jul 2023 06:02 PM IST
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सार
Politics: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सुदर्शन कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA का जिक्र करके विपक्ष को निशाने पर तो लिया, लेकिन विपक्ष ने उसका काउंटर करते हुए पूरे मामले को मणिपुर से जोड़ दिया...
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Politics: Did the opposition INDIA name work? Why Congress became strong after PM Modi statement
Politics - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को इंडियन मुजाहिदीन और ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना की, तो सियासत में हलचल मच गई। भाजपा से लेकर कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने इसको लेकर अपने-अपने तर्क और टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरह से विपक्षी दलों ने मिलकर नए गठबंधन का नाम INDIA रखा था, तभी से चर्चा यह हो रही थी कि इस नाम को लेकर भाजपा कैसे नए गठबंधन पर निशाना साधेगी। अब जब मोदी ने INDIA नाम पर निशाना साधा, तो विपक्षी दलों के सियासी गलियारे में चर्चा इस बात की होने लगी कि नए नाम रखने का फॉर्मूला हिट होने लगा है। वहीं सियासी जानकारों का मानना है कि मोदी की इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों के गठबंधन में कांग्रेस की मजबूत स्थिति हो गई है। क्योंकि जिस परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी ने गठबंधन को निशाने पर लिया है, उसमें लगातार विरोधी दल खासतौर से कांग्रेस के मुखिया मल्लिकार्जुन खरगे सदन में लगातार विरोध करते आ रहे हैं। इसलिए विपक्षी खेमे में अपने दल के मजबूत स्थिति होने का एक नैरेटिव भी सेट कर रही है।

यह भी पढ़ें: Manipur: मणिपुर के हालात से ऐसे बिगड़ सकती है नॉर्थ ईस्ट की आबोहवा, नहीं दिया दखल तो बढ़ेगी मुश्किल

सियासी जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से मणिपुर मामले पर कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है, उसमें अब उनके गठबंधन के नए नाम की भी चर्चा हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सुदर्शन कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA का जिक्र करके विपक्ष को निशाने पर तो लिया, लेकिन विपक्ष ने उसका काउंटर करते हुए पूरे मामले को मणिपुर से जोड़ दिया। वह कहते हैं कि जिस तरीके से सदन में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री की ओर से उनके गठबंधन को लेकर की गई टिप्पणी पर मणिपुर का जिक्र किया, उससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष इस पूरे मामले को किस तरफ लेकर चल रहा है। सुदर्शन कहते हैं कि जब विपक्षी दलों ने अपने गठबंधन का नाम इंडिया रखा था, तो चर्चा यही हुई थी कि आखिर सत्तापक्ष उन पर निशाना कैसे साधेगा। अब जब प्रधानमंत्री मोदी ने इंडियन मुजाहिद्दीन और ईस्ट इंडिया कंपनी के 'इंडिया' जोड़ लेने से उनके वजूद पर सवाल उठाया तो विपक्षी दलों ने उस पर जवाबी हमला भी बोला। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनके गठबंधन के नाम को लेकर जिस तरीके से सत्ता पक्ष में हलचल मच रही है, उससे जाहिर होता है कि विपक्षी दलों की ओर से रखा गया या नाम बहुत मजबूत भी है और उनका फॉर्मूला भी हिट हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से की गई टिप्पणी से विपक्षी दलों के प्रमुख घटक दल कांग्रेस को बड़ी मजबूती मिल रही है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सत्तापक्ष जितना उनके गठबंधन का नाम लेकर उनको निशाने पर लेगा उतना ही उनके गठबंधन का मकसद सफल होता हुआ आगे बढ़ेगा। सिर्फ यही नहीं राजनीतिक जानकार कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने जिस तरीके से इस पूरे मामले में अपना रुख और जवाब स्पष्ट किया है, उससे विपक्षी दलों के गठबंधन में वह एक बड़ी ताकत के तौर पर भी उभरा है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से की गई गठबंधन के नाम की टिप्पणी पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में जिस तरीके से उसका काउंटर किया, वह बताता है कि विपक्षी दलों के गठबंधन में कांग्रेस पार्टी की इस वक्त क्या हैसियत है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस वक्त विपक्षी दलों के गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर कौन सी पार्टी आगे होगी, उसे लेकर भी गठबंधन के दलों में कई तरह की अंदरूनी चर्चाएं भी हो रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर कांग्रेस के नेताओं की ओर से खुलकर जवाब देना एक तरह से संदेश भी देता है कि विपक्षी दलों में कांग्रेस कितनी मजबूत है। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि विपक्षी दलों में इस वक्त सबसे बड़े दल होने की अंदरूनी तौर एक रस्साकशी तो चल ही रही है। भले ही इसका तुरंत कोई असर न दिखता हो, लेकिन भविष्य के लिहाज से विपक्षी दलों में ताकतवर राजनीतिक दल की एक अलग ही अहमियत होगी। इसीलिए इस मामले में कांग्रेस ने शुरुआत से ही फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग शुरू कर दी है। ताकि विपक्षी दलों के गठबंधन में भी एक बड़ा नैरेटिव सेट किया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषक हरिओम तंवर कहते हैं कि विपक्षी दलों के गठबंधन के बाद हुई दो बैठकों से सदन का नजारा भी पूरी तरह से बदला हुआ है। सियासी दल एक साथ मिलकर एक ही मुद्दे मणिपुर पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा राज्यसभा के सांसद संजय सिंह को निलंबित किए जाने के मामले में एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास करा रहे हैं। तंवर कहते हैं कि मानसून सत्र कई मामलों में गठबंधन के दलों में आपसी एकता दिखाने का बड़ा जरिया भी बनता जा रहा है। वह कहते हैं कि जिस तरह से मणिपुर मामले में विपक्ष एकजुट होकर आवाज बुलंद कर रहा है, वह भी उनकी ताकत को प्रदर्शित कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के संसदीय दल की बैठक में विरोधी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस दौरान कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी जब भारत आई थी, तो उसके नाम में भी इंडिया शब्द था। इंडियन मुजाहिदीन के नाम में भी इंडिया आता है। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि केवल नाम में इंडिया रख लेने से कुछ नहीं होता। विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह अपनी ऐसी ही कारगुजारियों के चलते लंबे समय तक विपक्ष में रहने वाले हैं। मोदी के इस हमले पर कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो कहना है वह कहें। लेकिन हम इंडिया (INDIA) ही हैं। राहुल गांधी कहते हैं कि वह मणिपुर के साथ खड़े हैं। जब तक वे मणिपुर के हर महिला और बच्चे की आंखों से आंसू नहीं पोंछ लेते तब तक चैन नहीं लेंगे। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के इंडियन मुजाहिदीन और ईस्ट इंडिया कंपनी की टिप्पणी के बाद कहा कि वह मणिपुर में पहले की तरह अमन और शांति वापस लेकर आएंगे।

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