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प्रधानमंत्रियों की डाइनिंग टेबल के राज: इंदिरा की अंताक्षरी से मोदी की खिचड़ी तक, किताब में अनसुने किस्से
Sun, 23 Aug 2026 08:40 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 23 Aug 2026 08:40 PM IST
सार
एक राजनेता की थाली कई बार वह राज खोल देती है जो राजनीतिक जीवनियां भी नहीं बता पातीं। किताब द प्राइम मिनिस्टर्स टेबल में भारत के प्रधानमंत्रियों के निजी जीवन, खानपान की आदतों और रसोई से जुड़ी यादों को बताया गया है।
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देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी।
- फोटो : अमर उजाला/ANI/PMO
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विस्तार
किसी प्रधानमंत्री को समझने के लिए उसकी राजनीति और फैसलों को जानना जरूरी है, लेकिन उसकी पसंद की थाली और रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी उनके व्यक्तित्व की कई परतें खोल सकती हैं। पत्रकार पुरबी श्रीधर और संघिता सिंह की किताब 'द प्राइम मिनिस्टर्स टेबल' में देश के प्रधानमंत्रियों की निजी जिंदगी को भोजन, परिवार और रसोई से जुड़े किस्सों पढ़ने को मिलेंगे।
मंजुल पब्लिशिंग हाउस से प्रकाशित इस किताब में जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के जीवन के उन पहलुओं को तलाशने की कोशिश की गई है, जो आमतौर पर राजनीतिक जीवनी का हिस्सा नहीं बनते। किताब में प्रधानमंत्रियों की पसंद-नापसंद, उनकी रसोई, मेहमाननवाजी और खाने की मेज से जुड़े अनुभवों के साथ उन रिश्तों का भी जिक्र है, जिन्होंने उनके निजी जीवन को आकार दिया।
खाने की मेज पर दिखा प्रधानमंत्री का दूसरा रूप
मसलन किताब में इंदिरा गांधी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है। उन्हें अपने डॉक्टर के साथ अंताक्षरी खेलते हुए याद किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में बताया गया है कि विदेश में रहने के शुरुआती वर्षों के दौरान वह अपनी पत्नी की बर्तन धोने में मदद करते थे। यह छोटा-सा घरेलू प्रसंग उनके निजी जीवन की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
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वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी की पसंद में ताज महल होटल के सुनहरे रंग के तले हुए झींगे और लखनऊ की चाट का भी जिक्र मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा किस्सा भी किताब को खास बनाता है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता की पत्नी को अच्छी साबूदाना खिचड़ी बनाने का तरीका बताया था।
राजनीति से अलग निजी जिंदगी को जानने की कोशिश
किताब में प्रधानमंत्रियों के घर, पारिवारिक जीवन, दोस्ती, कामकाजी रिश्तों और खाने की मेज पर होने वाली बातचीत और उनकी पसंद को जगह दी गई है। इस तरह यह किताब देश के प्रधानमंत्रियों को सिर्फ उनके पद और राजनीति के जरिए नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और रिश्तों के जरिए समझने की कोशिश करती है।
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मंजुल पब्लिशिंग हाउस से प्रकाशित इस किताब में जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के जीवन के उन पहलुओं को तलाशने की कोशिश की गई है, जो आमतौर पर राजनीतिक जीवनी का हिस्सा नहीं बनते। किताब में प्रधानमंत्रियों की पसंद-नापसंद, उनकी रसोई, मेहमाननवाजी और खाने की मेज से जुड़े अनुभवों के साथ उन रिश्तों का भी जिक्र है, जिन्होंने उनके निजी जीवन को आकार दिया।
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खाने की मेज पर दिखा प्रधानमंत्री का दूसरा रूप
मसलन किताब में इंदिरा गांधी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है। उन्हें अपने डॉक्टर के साथ अंताक्षरी खेलते हुए याद किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में बताया गया है कि विदेश में रहने के शुरुआती वर्षों के दौरान वह अपनी पत्नी की बर्तन धोने में मदद करते थे। यह छोटा-सा घरेलू प्रसंग उनके निजी जीवन की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
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वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी की पसंद में ताज महल होटल के सुनहरे रंग के तले हुए झींगे और लखनऊ की चाट का भी जिक्र मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा किस्सा भी किताब को खास बनाता है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता की पत्नी को अच्छी साबूदाना खिचड़ी बनाने का तरीका बताया था।
राजनीति से अलग निजी जिंदगी को जानने की कोशिश
किताब में प्रधानमंत्रियों के घर, पारिवारिक जीवन, दोस्ती, कामकाजी रिश्तों और खाने की मेज पर होने वाली बातचीत और उनकी पसंद को जगह दी गई है। इस तरह यह किताब देश के प्रधानमंत्रियों को सिर्फ उनके पद और राजनीति के जरिए नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और रिश्तों के जरिए समझने की कोशिश करती है।