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महाराष्ट्र में कोचिंग पर सख्ती: 13 साल से छोटे बच्चों के दाखिले पर रोक, नियम तोड़ने पर ₹50 लाख का जुर्माना
Sun, 23 Aug 2026 07:25 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 23 Aug 2026 07:25 PM IST
सार
महाराष्ट्र सरकार निजी कोचिंग केंद्रों पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों के दाखिले से लेकर फीस, पढ़ाई के घंटे, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य तक, नए कानूनी मसौदे में कोचिंग व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के व्यापक प्रावधान किए गए हैं। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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महाराष्ट्र में कोचिंग केंद्रों पर लगाम
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र सरकार निजी कोचिंग केंद्रों को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। एक दिन में पांच घंटे से अधिक कक्षाएं नहीं चल सकेंगी। फीस, बुनियादी सुविधाओं, छात्र सुरक्षा, शिकायतों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। स्कूल शिक्षा और खेल विभाग ने महाराष्ट्र निजी कोचिंग केंद्र पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकार सितंबर में इस मसौदे पर विचार करेगी। यह कदम नीट प्रश्नपत्र लीक और उसमें कोचिंग केंद्रों की कथित भूमिका के बाद उठाया गया है।
पंजीकरण, फीस और दाखिले के नियम
मसौदे के अनुसार, 25 से अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग केंद्रों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। 13 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं होगा। रैंक या अंकों को लेकर भ्रामक दावे और सफलता की गारंटी देने पर भी रोक होगी। पढ़ाने वाले व्यक्ति का स्नातक होना जरूरी होगा।
मसौदे से जुड़ी पांच बड़ी बातें
छह महीने के भीतर कराना होगा पंजीकरण
मौजूदा केंद्रों को कानून लागू होने के छह महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य रहेगा और हर शाखा का अलग पंजीकरण जरूरी होगा। केंद्रों को शिक्षकों, पाठ्यक्रम, फीस, समय, सुविधाओं, प्रवेश क्षमता और फीस वापसी की जानकारी अपनी वेबसाइट पर देनी होगी।
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हर छात्र के लिए कम से कम एक वर्ग मीटर जगह, अग्नि और भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र, पर्याप्त हवा और रोशनी, पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, प्राथमिक उपचार और वाहन खड़ा करने की व्यवस्था जरूरी होगी। तहखाने में केंद्र नहीं चल सकेंगे। पूरे परिसर में निगरानी कैमरे लगाने होंगे और रिकॉर्डिंग कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखनी होगी।
यह भी पढ़ें: कर्नाटक: IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के घर पर ED की रेड, तीन घंटे इंतजार के बाद डुप्लीकेट चाबी से खुला फ्लैट
मानसिक दबाव कम करने पर सरकार जोर
कक्षाएं सुबह बहुत जल्दी या शाम बहुत देर तक नहीं चलेंगी। सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों और शिक्षकों को अवकाश देना होगा। अवकाश के अगले दिन परीक्षा या परीक्षण भी नहीं लिया जा सकेगा। केंद्रों को परामर्श की व्यवस्था करनी होगी और तनाव में फंसे विद्यार्थियों को तत्काल मदद देनी होगी।
प्रवेश से पहले परीक्षाओं की कठिनाई बतानी होगी। यह भी स्पष्ट करना होगा कि कोचिंग से प्रतियोगी परीक्षा में सफलता या पेशेवर पाठ्यक्रम में प्रवेश की गारंटी नहीं है। विद्यार्थियों की क्षमता और रुचि जानने के लिए योग्यता परीक्षण का प्रस्ताव है। केवल अभियांत्रिकी और चिकित्सा पर जोर देने के बजाय दूसरे करियर विकल्पों पर भी चर्चा करनी होगी।
उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान
प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग बैच बनाने की अनुमति नहीं होगी। शिकायतों के निपटारे की औपचारिक व्यवस्था भी बनेगी। गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। उल्लंघन पर एक लाख से पांच लाख और गंभीर मामलों में 10 लाख से 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। पंजीकरण निलंबित, रद्द या केंद्र बंद करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
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पंजीकरण, फीस और दाखिले के नियम
मसौदे के अनुसार, 25 से अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग केंद्रों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। 13 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं होगा। रैंक या अंकों को लेकर भ्रामक दावे और सफलता की गारंटी देने पर भी रोक होगी। पढ़ाने वाले व्यक्ति का स्नातक होना जरूरी होगा।
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मसौदे से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- 13 साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला नहीं मिलेगा।
- एक दिन में पांच घंटे से अधिक कक्षाएं नहीं चलेंगी।
- पाठ्यक्रम के बीच फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
- बीच में पढ़ाई छोड़ने पर बची अवधि की फीस 10 दिन में लौटानी होगी।
- गंभीर उल्लंघन पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना लग सकता है।
छह महीने के भीतर कराना होगा पंजीकरण
मौजूदा केंद्रों को कानून लागू होने के छह महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य रहेगा और हर शाखा का अलग पंजीकरण जरूरी होगा। केंद्रों को शिक्षकों, पाठ्यक्रम, फीस, समय, सुविधाओं, प्रवेश क्षमता और फीस वापसी की जानकारी अपनी वेबसाइट पर देनी होगी।
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हर छात्र के लिए कम से कम एक वर्ग मीटर जगह, अग्नि और भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र, पर्याप्त हवा और रोशनी, पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, प्राथमिक उपचार और वाहन खड़ा करने की व्यवस्था जरूरी होगी। तहखाने में केंद्र नहीं चल सकेंगे। पूरे परिसर में निगरानी कैमरे लगाने होंगे और रिकॉर्डिंग कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखनी होगी।
यह भी पढ़ें: कर्नाटक: IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के घर पर ED की रेड, तीन घंटे इंतजार के बाद डुप्लीकेट चाबी से खुला फ्लैट
मानसिक दबाव कम करने पर सरकार जोर
कक्षाएं सुबह बहुत जल्दी या शाम बहुत देर तक नहीं चलेंगी। सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों और शिक्षकों को अवकाश देना होगा। अवकाश के अगले दिन परीक्षा या परीक्षण भी नहीं लिया जा सकेगा। केंद्रों को परामर्श की व्यवस्था करनी होगी और तनाव में फंसे विद्यार्थियों को तत्काल मदद देनी होगी।
प्रवेश से पहले परीक्षाओं की कठिनाई बतानी होगी। यह भी स्पष्ट करना होगा कि कोचिंग से प्रतियोगी परीक्षा में सफलता या पेशेवर पाठ्यक्रम में प्रवेश की गारंटी नहीं है। विद्यार्थियों की क्षमता और रुचि जानने के लिए योग्यता परीक्षण का प्रस्ताव है। केवल अभियांत्रिकी और चिकित्सा पर जोर देने के बजाय दूसरे करियर विकल्पों पर भी चर्चा करनी होगी।
उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान
प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग बैच बनाने की अनुमति नहीं होगी। शिकायतों के निपटारे की औपचारिक व्यवस्था भी बनेगी। गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। उल्लंघन पर एक लाख से पांच लाख और गंभीर मामलों में 10 लाख से 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। पंजीकरण निलंबित, रद्द या केंद्र बंद करने का आदेश भी दिया जा सकता है।