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भारत-नेपाल सीमा विवाद: विदेश सचिव ने कहा- दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान के पक्ष में, राजनीतिकरण से बचने की जरूरत

Sat, 02 Apr 2022 09:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 02 Apr 2022 09:13 PM IST
सार

विदेश सचिव ने कहा कि नेपाली पीएम देउबा प्रधानमंत्री के तौर पर पांचवीं बार भारत दौरे पर आए हैं। इससे पहले भी वह अपने हर कार्यकाल में भारत आए हैं। हमारी पड़ोसी प्रथम नीति में नेपाल के साथ हमारे रिश्तों की खास जगह है। यह एक अनोखा रिश्ता है, जिसकी विशेषता खुली सीमाएं, लोगों से लोगों के बीच रिश्तेदारी और संस्कृति है। दुनिया में ऐसी समानताएं दो देशों के बीच बहुत ही कम हैं। 

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Politicisation of India Nepal border issue needs to be avoided Foreign Secretary Shringla Latest Update
हर्षवर्धन श्रृंगला, विदेश सचिव - फोटो : ANI

विस्तार

विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। इसमें दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी संक्षिप्त वार्ता शामिल है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में आम सहमति है कि सीमा विवाद का समाधान वार्ता के जरिये निकाले जाने की आवश्यकता है और ऐसे मुद्दों के राजनीतिकरण से बचने की जरूरत है। 

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नेपाली पीएम देउबा के भारत दौरे पर मीडिया से शृंगला ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सीमा विवाद समेत सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों पक्षों में आम राय थी कि सीमा विवाद का समाधान बातचीत और संवाद के जरिये होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी दो देशों के बीच हमेशा से कई मसले रहते हैं। उनका मानना है कि दो करीबी और मित्रवत पड़ोसी देशों के बीच यह महत्वपूर्ण है कि आप में एक साथ बैठने और चर्चा करने की क्षमता हो और इन मसलों का इस तरीके से समाधान निकाला जाए जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हों। हमने बांग्लादेश के साथ जमीन और समुद्री सीमा विवादों का समाधान निकाला। इसी तरह से इसके समाधान के लिए एक तंत्र है। हमें कोई संदेह नहीं है कि हम इन मसलों का समाधान निकालने के लिए कोई रास्ता नहीं निकाल सकते।  
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पिछले साल नेपाल द्वारा संशोधित अपने राजनीतिक नक्शे में भारतीय भूक्षेत्र को दिखाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए थे। नेपाल ने यह कदम कथित तौर पर भारत द्वारा नवंबर 2019 में त्रि-जंक्शन को अपने नक्शे में दिखाए जाने के बाद उठाया। इतना ही नहीं, 8 मई 2020 को कैलाश मानसरोवर वाया लिपूलेख सड़क के उद्घाटन के चलते भी दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बिगड़ गए थे। 
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- Ashwini Vaishnaw (@ashwinivaishnaw) 2 Apr 2022



पड़ोसी प्रथम नीति में नेपाल का अहम स्थान
विदेश सचिव ने कहा कि नेपाली पीएम देउबा प्रधानमंत्री के तौर पर पांचवीं बार भारत दौरे पर आए हैं। इससे पहले भी वह अपने हर कार्यकाल में भारत आए हैं। हमारी पड़ोसी प्रथम नीति में नेपाल के साथ हमारे रिश्तों की खास जगह है। यह एक अनोखा रिश्ता है, जिसकी विशेषता खुली सीमाएं, लोगों से लोगों के बीच रिश्तेदारी और संस्कृति है। दुनिया में ऐसी समानताएं दो देशों के बीच बहुत ही कम हैं। 

कोरोना महामारी में मदद के लिए देउबा ने दिया धन्यवाद
उन्होंने कहा कि नेपाली पीएम देउबा ने कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन, लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन, दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति के लिए भारत को धन्यवाद दिया। पीएम देउबा ने महामारी के पीक के दौरान भी द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखने और सप्लाई चेन को निर्बाध बनाने की कोशिशों की भी सराहना की। 

दौरे से कई सकारात्मक परिणाम निकले
विदेश सचिव ने कहा कि पीएम देउबा के दौरे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्र में कई सकारात्मक परिणाम निकले हैं। इनमें ऊर्जा सेक्टर में सहयोग, नेपाल में रुपे भुगतान कार्ड की शुरुआत, रेलवे में तकनीकी सहयोग और यात्री रेल की शुरुआत तथा नेपाल का अंतरराष्ट्रीय सोलर गठबंधन में शामिल होना शामिल है। 


पीएम मोदी ने देउबा को दी हिमाचल की पारंपरिक पेंटिंग
पीएम मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री देउबा को हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक ‘पहाड़ी स्कूल’ की उत्कृष्ट लघु पेंटिंग भेंट की। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पेंटिंग में श्रवण महीने के मौसम को दर्शाया गया है। यह पेंटिंग पारंपरिक ‘बारहमासा शृंखला’ का हिस्सा है। इसमें राधा और कृष्ण मानसून के बादलों की गड़गड़ाहट के बीच एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए प्रेमपूर्ण बातचीत में तल्लीन नजर आ रहे हैं। इस तरह की पेंटिंग 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, गुलेर और भासोली इलाकों में काफी प्रसिद्ध थी। 

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