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कानों देखी: ममता बनर्जी और तृणमूल से ज्यादा भाजपा का ध्यान उनके चोटिल पैर पर

Thu, 25 Mar 2021 08:05 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Mar 2021 08:05 PM IST
सार

राजनीति में क्या चल रहा है अंदरखाने, चुनावों में किधर बह रही है हवा, समोसे और आलू-टिक्की को लेकर क्या कहता है एक मंत्री का अर्थशास्त्र समेत पढ़ें राजनीतिक जगत की गपशप हमारे विशेष कॉलम कानों-देखी में...

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political gossips of india: BJP has more focus on Didi injured foot rather than mamata Banerjee and Trinamool congress
ममता बनर्जी की व्हीलचेयर वाली पेंटिंग। - फोटो : ANI (File)

विस्तार

ममता बनर्जी के चोटिल पैर का सोशल मीडिया में एक वीडियो ट्रेंड कर रहा है। इस वीडियो को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्थ चटर्जी का व्यंग्य भी कम मजेदार नहीं है। पार्थ कहते हैं कि भाजपा नेताओं का ध्यान ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर कम बल्कि दीदी के पैर पर ज्यादा है। हो भी क्यों न। ममता बनर्जी जितना अपने दम पर नहीं कर पाईं, चुनाव घोषणा के बाद ऐन वक्त पर पैर की चोट ने उससे बड़ा कमाल कर दिया। भाजपा की पूरे चुनाव प्रचार की रणनीति ही बदलकर रख दी।

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भाजपा के पश्चिम बंगाल के एक नेता का कहना है कि व्हील चेयर पर बैठकर प्रचार कर रहीं ममता के चोटिल पैर को देखकर नहीं लगता कि उन्हें कोई ऐसी गंभीर चोट है। वह तो इसके बहाने राज्य की जनता को छलकर सहानुभूति बटोरने में लगी हैं। भाजपा से जुड़े विवेक सन्याल कहते हैं कि चिंता न कीजिए। यह बंगाल है। यहां जनता खूब समझती है। क्या पता पहले चरण का मतदान होते-होते इसका राज भी खुल जाए। खबर है कि भाजपा के नेता ममता के चोटिल पैर से जुड़े कुछ रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पूरी मेहनत भी कर रहे हैं।

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मंत्री ने पूछा समोसे से क्यों महंगी है आलू टिक्की

समोसे से आलू टिक्की महंगी क्यों हैं? एक मंत्री के सवाल का आप क्या उत्तर दे सकेंगे। केन्द्र सरकार के एक मंत्री को इसका अर्थशास्त्र समझ में नहीं आ रहा है। वह समोसे की महिमा बताते हुए कहते हैं कि उसे बनाने में ज्यादा मेहनत और समय दोनों लगता है। मैदा, आलू, मसाला, तेल, तलना सब कुछ। जबकि उससे कम खर्च में आलू टिक्की तैयार हो जाती है। लेकिन जनता को चाट में टिक्की पसंद है। चाय के साथ समोसा पसंद है। इसलिए आलू-टिक्की समोसे से ज्यादा महंगी है। वह कहते हैं कि जिस दिन आलू टिक्की और समोसे के इस अर्थशास्त्र का मतलब समझ में आ जाएगा, उस दिन यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार और वर्तमान की मोदी सरकार की अर्थनीति आसानी से समझ में आ जाएगी।

कांग्रेस ने पहले यूपी-बिहार में किया सरेंडर, अब पश्चिम बंगाल में भी

कांग्रेस पार्टी को अंदरूनी कलह से इस साल भी निजात मिलने के आसार कम हैं। समूह-23 के नेता पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के स्टैंड को लेकर अपने सांसद राहुल गांधी के सलाहकारों से तंग हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने चुनाव प्रचार का पूरा फोकस असम, केरल, तमिलनाडु में कर रखा है। उन्हें मजबूती देने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी साथ दे रही हैं। वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं का अकाल है। इन नेताओं को पार्टी का उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद यह 'सरेंडर' कम समझ में आ रहा है।

यह तर्क भी दे रहे हैं कि भाजपा का प्रवाह रोकने के लिए कांग्रेस एक-एक राज्य में ऐसा करती जाएगी तो बचेगा क्या? इनकी यह परेशानी भाजपा नेताओं से भी कहीं ज्यादा है। वहीं कांग्रेस पार्टी के पूर्व केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि जब सबकुछ जा रहा हो तो जो बच जाए, वही बेहतर है। पांच राज्यों के चुनाव में कम से कम केरल और असम में तो कांग्रेस सीधी लड़ाई में है। इसलिए पूर्व अध्यक्ष ठीक कर रहे हैं। तमिलनाडु में सहयोगी डीएमके लड़ रही है और इसका असर पुडुचेरी पर भी पड़ेगा। इसलिए भी वह ठीक कर रहे हैं।

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कहां जाएंगे पूर्व कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा ?

प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार, पूर्व कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा कहां जाएंगे? उन्हें नई तैनाती क्या मिलेगी? इसे लेकर केन्द्रीय सचिवालय में तरह-तरह की चर्चा है। इसी तरह की चर्चा भाजपा नेताओं के बीच भी है। एक सचिव स्तर के अधिकारी को लग रहा है कि जल्द ही पीके सिन्हा दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल का स्थान ले सकते हैं। बताते हैं कि 31 दिसंबर 2016 को बैजल दिल्ली के उपराज्यपाल बने थे। अनिल बैजल करीब 75 साल के हो चुके हैं और उनके विकल्प की तलाश है। इसके समानांतर भाजपा के नेताओं में भी पीके सिन्हा की नई तैनाती को लेकर चर्चा चल रही है। उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर का कहना है कि मई-जून 2021 तक इस तरह की खबर सुनने को मिल सकती है।

सुप्रिया श्रीनेत से खुश हैं कांग्रेसी, राहुल भी देखते हैं डिबेट

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने अपनी पार्टी के नेताओं का दिल जीत लिया है। प्रियंका गांधी के कार्यालय सूत्र की मानें, तो सुप्रिया श्रीनेत की टीवी पर डिबेट को खुद प्रियंका गांधी भी देखती हैं। यहां तक कि राहुल गांधी को भी सुप्रिया के टीवी स्क्रीन पर हावभाव अच्छे लगते हैं। खास बात यह है कि श्रीनेत की कांग्रेस नेताओं में यह टीआरपी टीवी डिबेट के दौरान भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा की बोलती बंद कराने के कारण बनी है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि 44 साल की श्रीनेत कांग्रेस की प्रभावी प्रवक्ता हैं। वह भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा के ऊल-जुलूल तर्कों का उन्ही के लहजे में जवाब देती हैं। यही काम पहले कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी करते थे पर दुर्भाग्य से उनका असामयिक निधन हो गया।

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