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Hindi News ›   India News ›   Political gossips: doors of fate are about to open for CP Joshi in Rajasthan

कानों देखी: राजस्थान में सीपी जोशी के खुलने वाले हैं भाग्य के दरवाजे?

Thu, 22 Sep 2022 07:15 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 22 Sep 2022 07:15 AM IST
सार

उत्साह का कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की चर्चा है। लेकिन पिछले सप्ताह से सियासी गलियारे में एक खबर और तैर रही है। अशोक गहलोत के खेमे के एक नेता की माने तो सीपी जोशी के भाग्य के दरवाजे खुल सकते हैं। सीपी जोशी और अशोक गहलोत में अच्छी निभती है।

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Political gossips: doors of fate are about to open for CP Joshi in Rajasthan
राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी। - फोटो : ANI

विस्तार

राजस्थान में खबरों का बाजार काफी गरम चल रहा है। भाजपा में भी कांग्रेस में भी। सस्पेंस भी खूब है। भाजपा में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को लेकर तो कांग्रेस में नए सीएम फेस को लेकर। वसुंधरा का खेमा कुछ समय पहले तक थोड़ा उलझा था। अब बात कीजिए तो थोड़ा उत्साह में लौट रहा है। दूसरी तरफ सचिन पायलट के खेमे में उत्साह बढ़ रहा है।

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इस उत्साह का कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की चर्चा है। लेकिन पिछले सप्ताह से सियासी गलियारे में एक खबर और तैर रही है। अशोक गहलोत के खेमे के एक नेता की माने तो सीपी जोशी के भाग्य के दरवाजे खुल सकते हैं। सीपी जोशी और अशोक गहलोत में अच्छी निभती है। पहले यह रिश्ता ठीक नहीं था। सीपी जोशी कभी राहुल गांधी के भी खासमखास हुआ करते थे। उनके पास भी सचिन पायलट की तरह सीएम बनने की जोरदार महत्वाकांक्षा है। खबर है कि गहलोत जयपुर छोड़ने की शर्त पर सीपी जोशी का उत्तराधिकार चाहते हैं। हालांकि होता तो वही है जो कांग्रेस हाई कमान तय करता है। वैसे गहलोत भी पार्टी में जादूगर के नाम से मशहूर हैं।
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बड़ी उम्मीद थी कि लखनऊ में कुछ तो पानी का मिजाज बदलेगा?
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा? उत्तर एक ही सटीक लगता है कि पानी जैसा। लखनऊ में कुछ ऐसा ही किस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दूसरे कार्यकाल में छाछ और दूध दोनों फूंक फूंककर पी रहे हैं। पांच साल सीएम रहने के बाद राजनीति की लंतरानियों को समझने में देर नहीं लगाते। इसके कारण जहां कई नेताओं का बिना कहे रक्तचाप बढ़ रहा है, वहीं कुछ बाबुओं में नई चिंता पसर गई है। यह चिंता अवनीश अवस्थी को लेकर है। योगी महाराज अवस्थी पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। अवस्थी को जब सेवा विस्तार नहीं मिला तो पंचम तल से लेकर कई महकमें के अफसरों ने राहत की सांस ली थी। कुछ दूसरे खेमे के नेताओं ने भी राहत की सांस ली थी। इनमें से एक मंत्री जी लखनऊ सचिवालय में अफसरशाही के राज के लिए अवस्थी जैसे को ही जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन जब से अवस्थी जी मुख्यमंत्री के सलाहकार बनकर अवतरित हुए हैं, तब से फिर इन्हें कुछ न बदलने का डर सताने लगा है।  
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'उन्हें खुद को बचाना है तो मेरे साथ आना पड़ेगा'
सियासत के इसी सिद्धांत पर कांग्रेस के रणनीतिकार कुलाचें भर रहे हैं। एक महासचिव का कहना है कि विपक्ष के नेता अभी चाहे जितनी बातें कर लें, लेकिन वह सभी और भाजपा के सहयोगी दल जद (यू), अकाली दल (बादल), लोजपा, जजपा का हश्र देखकर जानते हैं कि उन्हें राजनीति में बने रहना है तो प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की राजनीति का विरोध करना ही होगा। वह एक लाइन और जोड़ते हैं। कहते हैं कि मौजूदा भाजपा और उसके सरकार के विरोध की लाइन कांग्रेस से ही शुरू होती है और कांग्रेस पर ही आकर खत्म होती है। इसलिए विपक्षी एकता के मामले में कांग्रेस दरकिनार नहीं हो सकती। विदेश से पढ़कर आए और कांग्रेस को मजबूत करने में लगे एक अन्य प्रोफेशनल का कहना है कि इसी को ध्यान में रखकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा शुरू की गई है। क्योंकि सबसे पहले जरूरी है कि कांग्रेस की मजबूती बनी रहे।



मुंबई में हल्ला है कि आखिर क्या गपियाए उद्धव-अडाणी
उद्योगपति गौतम अदाणी मातोश्री पहुंच गए। करीब एक घंटे तक महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से बात की। खबरची बताते हैं कि अदाणी के मातोश्री पहुंचने के पहले यह खबर मुंबई के राजनीतिक गलियारे में तेजी से फैलने लगी। कहा जा रहा है कि उद्धव से करीबी रिश्ता रखने वाले अदाणी किसी बड़े संदेश के साथ ठाकरे के पास गए। हालांकि अभी इसके राज सामने नहीं आए हैं। वैसे इन सबके पीछे यह भी कहा जा रहा है कि उद्धव बनाम अमित शाह का दौर खत्म करने के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी है। दूसरा बड़ा हल्ला दशहरा की रैली को लेकर है। उद्धव ने शिवाजी पार्क में रैली के लिए जान लड़ा दी है। शिवसैनिक इसे अपना अधिकार बताते हैं। शिवसेना संस्थापक बाला साहब ठाकरे के जमाने से शिवसेना शिवाजी पार्क में ही दशहरा रैली करती रही है। देश भर के शिवसैनिक भी वहीं पहुंचते हैं। बताते हैं कभी इसी पार्क से कार की बोनट पर बाला साहब ने आवाज बुलंद की थी। उद्धव सरकार के एक मंत्री कहते हैं कि शिवाजी पार्क में जिसकी रैली, उसी की असली शिवसेना। लिहाजा उद्धव ठाकरे ने रैली के लिए अदालत का भी दरवाजा खटखटा दिया है।

आराम तलब कांग्रेसियों के पसीने छुड़ा रहे हैं राहुल गांधी
स्वतंत्रता आंदोलन से निकली कांग्रेस पार्टी के नेताओं का इन दिनों हाल बुरा है। भारत जोड़ो यात्रा के 14 वें दिन भी राहुल गांधी 20 किमी पैदल चलने के बाद लोगों से मिलने जुलने का न केवल समय निकालते हैं, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों को भी समय दे रहे हैं। उनके पास इसके लिए ऊर्जा बची रहती है। जबकि आराम तलबी में माहिर कांग्रेसियों का बुरा हाल है। बताते हैं कि हर रोज यही हाल है। इतना ही नहीं यात्रा ने नेताओं में बड़ा मेल जोल बढ़ा दिया है। जो भी नेता राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने पहुंच रहा है, वह यात्रा का शेड्यूल पूरा होने के बाद बड़े नेता, छोटे नेता में फर्क भी नहीं दिखाई देता। थकान मिटाने के लिए जहां जगह पाता हैं, थकान मिटाने लगते हैं। कांग्रेसी नेताओं का यह हाल सोशल मीडिया पर भी देखा जाता है।

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