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माल्या के देश छोड़ने पर सरकार-कांग्रेस के बीच सियासी महाभारत

Thu, 10 Mar 2016 09:08 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, दिल्ली
ब्यूरो / अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 10 Mar 2016 09:08 PM IST
सार

  • राहुल बोले, माल्या को मोदी सरकार की फेयर एंड लवली स्कीम का मिला लाभ
  • जेटली का पलटवार, क्वात्रोकी को राजीव सरकार के दौरान देश से भगाने में मिली थी मदद।

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political furore on vijay Mallya between governmet and congress

विस्तार

बैंकों के हजारों करोड़ रुपये डकारने वाले कारोबारी विजय माल्या के देश से बाहर भागने के मामले में सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी महाभारत शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को संसद और संसद के बाद सरकार और कांग्रेस ने एक दूसरे पर तीखा वार-पलटवार किया।

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जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह कह कर कांग्रेस को घेरा कि यूपीए के कार्यकाल में माल्या पर न केवल बैंकों ने धनवर्षा की, बल्कि उन्हें दिए गए ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में डाला। इस दौरान वित्त मंत्री ने कांग्रेस को भोपाल गैस त्रासदी मामले के अभियुक्त क्वात्रोकी के राजीव सरकार के दौरान देश से भगाने में मिली मदद की याद दिलाई। 
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हालांकि, वित्त मंत्री ने इस दौरान स्वीकार किया कि माल्या को विदेश जाने से रोकने के लिए बैंकों को पहले से ही कानूनी कार्रवाई शुरू कर देना चाहिए था। राज्यसभा में भी नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने लुक आउट नोटिस जारी होने के बावजूद माल्या के भाग जाने का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया। आजाद ने कहा कि हमेशा हूरों से घिरा रहने वाला व्यक्ति दिन के उजाले में ही सरकार की आंख के नीचे से कैसे गायब हो गया। 
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लोकसभा में प्रश्नकाल के तत्काल बाद कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार कालाधन तो नहीं ला पाई, मगर माल्या बैंकों का 9900 करोड़ रुपये ले कर जरूर फरार हो गए। उन्होंने कहा कि लुक आउट कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद ऐसा कैसे संभव हुआ?

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि माल्या को फेयर एंड लवली स्कीम का लाभ दिया गया है। इस पर पहले संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि माल्या सरकार के लिए संत नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसी के कार्यकाल में बैंकों ने माल्या को भरपूर ऋण उपलब्ध कराया।

'पिछली सरकार ने माल्या पर की मेहरबानी'

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अरुण जेटली - फोटो : amar ujala

जेटली ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि माल्या पर मेहरबानी तो पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने बरसाई। उसी के कार्यकाल में उन्हें 9,091 करोड़ का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया। इतना ही नहीं अप्रैल 2009 में इसी यूपीए सरकार ने माल्या के ऋण को ‘नहीं वसूल हो पाने वाला बकाया’ घोषित कर दिया।

माल्या के देश छोड़ने के संबंध में वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल को समझना होगा कि माल्या और क्वात्रोकी के बाहर जाने में अंतर है। किसी को देश से बाहर जाने से रोकने की एक कानूनी प्रक्रिया होती है। माल्या ने जिस दिन देश छोड़ा उस दिन तक बैंकों ने कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की थी।

इस दौरान जेटली ने बैंकों से ऋण ले कर न चुकाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। माल्या मामले में भी सरकार हर संभव कानूनी कार्रवाई करेगी।

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